उत्पीड़न भी कास्टबेस होता है-आरके चौधरी

DSC06078यूपी सरकार में कभी खेल मंत्री रहे आरके चौधरी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बीएसपी से नाता तोड़ने के 12 साल बाद एक बार फिर बीएसपी के ही टिकट पर लखनऊ के मोहनलालगंज लोकसभा सीट से मैदान में हैं। आरके चौधरी से कई मुद्दों पर डीडीसी न्यूज़ एजेंसी के यूपी स्टेट ब्यूरो प्रमुख अखिलेश कृष्ण मोहन ने बेवाकी से बातचीत की।  

सवाल-एक दशक बाद पुराने घर में वापसी हुई है कैसा लग रहा है ?

उत्तर- हम सब बाबा साहब के फालोवर हैं, अच्छा लग रहा है। एक दशक बाद ही सही बीएसपी में ससम्मान वापसी हुई है। दोबारा मौका मिला है निश्चित तौर पर अच्छा लगेगा। बीएसपी बड़ी पार्टी है, बड़ा बैनर है, कुछ बेहतर करेंगे।

सवाल- इस 12 सालों के दौरान कैसा अनुभव रहा क्या आपको कभी लगा कि बिना एक हुए काम नहीं चलेगा ?

उत्तर- देखिए हम चाहे बीएसपी में रहे हों या बीएसपी से अलग होकर अलग पार्टी बनाई। संघर्ष करने के लिए बीएस4 और राजनीति करने के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी। जो अनुभव है, वह है कि भारत में कास्ट सिस्टम है पीड़ितों को एक मंच पर लाकर ही कुछ कर सकते हैं। इस लिए एक मंच पर आ रहे हैं। समाज के दबे कुचले लोगों को ये समझना होगा एक हुए बगैर हम कमजोर ही रहेंगे। एकता में ही ताकत है।

सवाल- 12 साल बाद बीएसपी की याद आई वापसी भी हो गई अब क्या कोशिश होगी ?

उत्तर- 12 साल बाद याद नही आई, मैं पहले भी बीएसपी में था, किसी कारण से अलग हुआ, अगर बहुजन पार्टी में फिर चला गया तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी पार्टी है बीएसपी बेहतर काम करने का अवसर है। काम करेंगे भी । कार्यकर्ताओं को एक जुट करने का काम जारी है।

सवाल- बीएसपी केवल आरके चौधरी ने ज्वाइन किया है। या आपकी पार्टी बीएस4 का भी विलय हुआ है ?

उत्तर- बीएसपी हमने भी ज्वाइन किया है और पार्टी का भी बीएसपी में विलय भी हुआ है क्यों कि जब कार्यकर्ता बीएसपी के लिए काम करेंगे तो पूरी पार्टी बीएसपी में शामिल हो रही है।

सवाल- कई जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिश हो रही है क्या कहेंगे ?  

उत्तर- किसी भी जाति को ओबीसी या जनरल से निकाल कर अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए पहला दायरा है अनचटबिलिटी। इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता और ये मामला केंद्र सरकार का है, केंद्र सरकार इसे अकेले नहीं करेगी आयोग के रिकमेंडेशन से करेगी। अगर ऐसा होता है कि आर्थिक रूप से अतिपिछड़ी जातियों को अगर अनुसूचित जाति की सूचीं में डाला जाता है, तो परसेंटेज ऑफ रिजर्वेशन का हमेशा ध्यान रखना होगा। जब जातियां अनुसूचित में शामिल की जा रही हैं तो उसके आरक्षण का प्रतिशत भी बढ़ना चाहिए। जब मैं खेल मंत्री था तब भी ये प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास गया था मुस्लिम की जो कमजोर जातियां है जिनकी सामाजिक और शैक्षिक हालत दलितों के बराबर है उनको मिलाकर एससी में शामिल किया जाता है तो परसेंटेज ऑफ रिजर्वेशन बढ़ाकर 21 से 40 फीसदी या उससे अधिक किया जाए।

सवाल-लोकसभा चुनाव को लेकर कितने तैयार हैं ?

उत्तर- लखनऊ के सराउंडिंग में ही मोहनलाल गंज सीट है। हमने बीएस4 बैनर तले पहले भी काम किया है। चार साल पहले हमने भी मोहनलालगंज से लोकसभा चुनाव लड़ा था तब हमें मिला था एक लाख चालीस हजार वोट और बहुजन समाज पार्टी को हमसे ज्यादा वोट मिला था। अगर दोनों के वोट बैंक को मिला दिया जाए तो हम बड़ी ही आसानी से अच्छी मार्जिन से चुनाव जीत जाएंगे। तैयारी पूरी है हम चुनाव बड़े अंतर से जीतेंगे।

सवाल-एक अलग सवाल जो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो से उठ रहा है। क्या वजह है कि जेलों में दलित और मुस्लिम कैदियों का प्रतिशत देश में उनकी आबादी के प्रतिशत से भी अधिक है।

उत्तर-इंडिया में कॉस्टिजम है। घटनाएं भी कॉस्ट बेस होती हैं, और उत्पीड़न भी कॉस्ट बेस होता है। पहले भी था अब भी हैं। बैकवर्ड मुस्लिम इसके सबसे ज्यादा सफर करते हैं। दलित हमेशा निशाने पर होता है, आसान टारगेट है, यही मूल वजह है।

सवाल-अशिक्षा कितनी बड़ी वजह हो सकती है इसके लिए ?

उत्तर-अशिक्षा नहीं कॉस्टिजम ही इसकी सबसे बड़ी वजह है । भारत की जो बनावट है, सामाजिक बनावट वह कॉस्ट बेस है, उसी के अनुसार उत्पीड़न होता है।

(आरके चौधरी से साक्षातकार पर आधारित कुछ अंश)

(शनिवार 19 मई, स्थान-लखनऊ)

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