एक्ट्रेस की मां ने ही किया उसे सेक्स को मजबूर!

resizedimage (15)मुंबई।। शोभा डे, राहुल गांधी पर की गई अपनी एक टिप्पणी की वजह से फिलहाल सुर्ख़ियों में हैं। विवादों से उनका नाता शुरू से ही रहा है। उन्होंने भले ही एक मॉडल के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की हो, लेकिन जल्द ही एक जर्नलिस्ट के तौर पर पूरे देश में उन्हें पहचान मिली। अपने इस सफ़र में उन्होंने फ़िल्मी दुनिया और उससे जुडी गॉसिप पर जमकर लिखा।

हम शुरू कर रहे हैं शोभा डे पर आधारित एक खास सीरीज, जिसमें उनके जीवन से जुडी घटनाओं, उनके लेख और उन किताबों से आपको रूबरू कराएंगे जो न सिर्फ बेहद विवादास्पद रहीं बल्कि, बेस्ट सेलर भी रहीं। श्रृंखला की पहली कड़ी में उस किताब का जिक्र है, जिसे फ़िल्मी दुनिया के चार ऐसे एक्टर और ऐक्ट्रेसेस से जोड़ा गया जो उस जमाने पर टॉप पर थे।

 शोभा डे द्वारा लिखा गया यह दूसरा  उपन्यास था जो बेस्ट सेलर रहा। इस उपन्यास का नाम था स्टैरी नाइट्स (Starry Nights). वैसे तो इस उपन्यास की श्रेणी फिक्शन है, लेकिन कहा जाता है कि यह कुछ सितारों के वास्तविक व्यक्तिगत जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद सितारों की रातेंनाम से प्रकाशित हुआ। शोभा जी के लिखने के स्टाइल को कुछ लोग सॉफ्ट पोर्न तो कुछ लोग इसे पल्प फिक्शन भी कहते हैं। इस किताब को किस श्रेणी में रखा जाए, इससे परे हम आपको इसके कुछ खास पहलुओं के बारे में बता रहे हैं।

इस किताब के अनुवाद का एक नमूना पढ़ें।

उसकी बगल में बैठे आदमी का कसमसाना पहले ही शुरू हो गया था। किशनभाई ने धीमे से उसे गरियाया। सिंथेटिक कपड़े का नीला कुरता‍-पाजामा पहने यह दो कौड़ी का भंगी आज रात गोपालजी बना बैठा है। गोपालजी माई फूट,, उसने फनफनाते हुये धीमे से कहा। वह कोई गोपालजी-वोपालजी नहीं था। वह तो मुंबई की गंदी नालियों का भंगी था, भंगी। और आज वही कुतिया का पिल्ला प्रोड्यूसर बना बैठा है। बड़े नाम, बड़े दामवाला प्रोड्यूसर, हरामजादा ! अभी सात साल पहले यही आदमी किशनभाई की प्रोडक्शन कंपनी में यूनिट की जी-हुजूरी किया करता था। “

क्या है इस किताब की कहानी :

किताब का केंद्रीय पात्र आशा रानी नाम की एक लड़की है। पुस्तक में खासतौर से यह दिखाया गया है कि मुख्य नायिका सफलता प्राप्त करने के लिए किसी के भी साथ हमबिस्तर होती रहती है और उसे इस नर्क में डालने वाला कोई पराया नहीं, बल्कि उसकी अपनी मां है।

पुस्तक में इस सच को भी रेखांकित करने की कोशिश की गई है कि किस तरह से फिल्मी दुनिया पूरी तरह से मर्दों के शिकंजे में है। फिल्मी दुनिया के अंदरूनी रंग-ढंग और लटके-झटकों को भी इस किताब में बखूबी पेश किया गया।

हालंकि, पिछले कुछ वर्षों से फ़िल्मी दुनिया में कास्टिंग काऊच को लेकर काफ़ी हो-हल्ला भी मचा हुआ है। किताब में गाली-गलौच और गंदी भाषा का भी खुलकर इस्तेमाल किया गया है।

सॉफ्ट पोर्न , सेक्स का जमकर उल्लेख :

किताब में सेक्स के बारे बहुत ही खुल कर और बार-बार लिखा गया है। हर तरीके के सेक्स एनकाऊंटर्स का बहुत ही खुला और विस्तृत वर्णन है।बिना किसी  लाग-पेट के सेक्स को एक खेल, एक जश्न या महाआनंद की तरह भी पेश किया गया है। कुछ बानगी देखिये …

मालिनी ने चीखते हुए कहा, “अपने इस साले फ़लसफ़े और लेक्चरबाजी को अपने …में घुसेड़ लो। मुझे तो मेरा पति वापस दो !

मालिनी ने चीखकर कहा, “सेक्स ! बस यही है तुम्हारे पास, सेक्स ! तुम्हारी जैसी औरतें इसी का इस्तेमाल करती हैं। घटिया कु…अपनी टांगें उठाती हो और किसी भी आदमी को अंदर ले लेती हो। सेक्स, सेक्स, सेक्स, गंदा, घिनौना सेक्स! विकृत सेक्सवालियों ! तुम जरूर विकृत सेक्स का इस्तेमाल करती होगी। क्या करती हो तुम उसके साथ‍, हैं? उसका … हो? या अपनी छातियों से उसका दम घोंटती हो ?”

यह कहकर आशा रानी उसके ऊपर चढ़ गई थ, और दिव्य गंध वाला वह तेल डालकर धीरे-धीरे उसकी मालिश करने लगी। वह किसी लोचदार नर्तकी की तरह हरकत कर रही थी। उसके बाल अक्षय के पूरे सीने पर फैल रहे थे, उसके उरोज अक्षय के मुंह पर आ-जा रहे थे, उनकी घुंडियां रह-रहकर अक्षय के होंठों को छू रही थीं। “सेक्सी औरत, यह सब कहां से सीखा तुमने ?”

कौन हैं शोभा डे :

शोभा डे किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वह बेस्ट सेलिंग उपन्यासों की लेखिका, सोशलाइट, मॉडल, लोकप्रिय स्तंभकार, डिजाइनर, स्वाभिमान और किटी पार्टी जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों की स्क्रिप्ट राइटर हैं। शोभा डे के प्रशंसक न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी फैले हुए हैं।

महाराष्ट्र के गौड़ सारस्वत ब्राह्मण परिवार में जन्मीं शोभा डे की प्राम्भिक शिक्षा क्वीन मैरी स्कूल, मुंबई में हुई। उन्होंने मुंबई के ही सेंट जेवियर्स कॉलेज से मनोविज्ञान की डिग्री ली और मॉडलिंग के साथ करियर की शुरुआत की।

एक मॉडल के रूप में नाम कमाने के बाद 1970 के दशक में उन्होंने मॉडलिंग के अपने करियर को छोड़ पत्रकारिता में कदम रखा। अपने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत में ही उन्होंने तीन पत्रिकाओं -स्टारडस्ट, सोसाइटी और सेलिब्रिटी की शुरुआत और संपादन का जिम्मा लिया।

एक साल के अंदर ही स्टारडस्ट की गिनती देश की सबसे चर्चित पत्रिकाओं में होने लगी। 1980 के दशक में उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया के रविवार अंक के लिए लेख लिखना शुरू किया जो काफी सराहा गया।

उनके ये लेख मुंबई की हाई प्रोफाइल जीवन शैली और सोशलाइट लाइफ़ के रहस्यों को खोलने वाले होते थे। वह एक स्वतंत्र स्तंभकार हैं और कई नामी अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लिखती हैं। फिलहाल, वह अपने दूसरे पति दिलीप डे और छः बच्चों के साथ मुंबई में रहती हैं। (सा.दै.भा.) 

 

loading...
Pin It