कौन बनी 48 हजार करोड़ की मालकिन ?

resizedimage dddइंदौर।। (डीडीसी) ।। जिंदगी जीने का अर्थ है इसे दिशा देने की काबिलियत। स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है लाइफ के लेवल को सुधारना। हमें याद रखना चाहिए कि जिंदगी के सफर में लुत्फ खुशी का होता है, मंजिल पर पहुंचने का नहीं। लाइफ मैनेजमेंट का मूल मंत्र यही है- हैप्पीनेस इज़ अ जर्नी, नॉट अ डेस्टिनेशन। यह कहना है कि 48 हजार करोड़ रुपए के उद्योगपति घराने की मालकिन का। इन मोहतरमा का मानना है कि बदलाव ही तरक्की का मूलमंत्र है। शायद उन्होंने भी जीवन के इन्हीं बदलावों को आत्मसात कर इतने बड़े समूह की मालकिन बनने का गौरव हासिल किया है।

यह हस्ती हैं आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला की पत्नी नीरजा बिड़ला। वे यहां यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में हुए रोटरी इंटरनेशनल के 29वें सालाना अधिवेशन में हिस्सा लेने आईं थीं। मूलत: इंदौर की नीरजा ने अपने उद्बोधन में लाइफ मैनेजमेंट पर बात की। उन्होंने गीता के श्लोकों का जिक्र किया और अध्यात्म को सफलता का मंत्र बताया।

अपने लाइफ मैनेजमेंट के बारे में पूछे जाने पर नीरजा ने कहा कि चेंज को वेलकम करना जरूरी है। वक्त के साथ नहीं बदलेंगे तो तरक्की नहीं हो पाएगी। गर्मी और ठंड की तरह खुशी और गम व कामयाबी और नाकामी का तजुर्बा हर सेक्टर और हर जगह मिलेगा। ऐसे मौसम आएंगे और चले जाएंगे। मगर इनका वजूद बेहद कम वक्त के लिए होगा। ऐसे में हमें सेल्फ कंट्रोल नहीं खोना चाहिए।

बिजनेस टायकून कुमार मंगलम बिड़ला की पत्नी नीरजा इंदौर में ही पली-बढ़ीं नीरजा रोटरी इंटरनेशनल के 29वें सालाना अधिवेशन में बतौर खास मेहमान मौजूद थीं। यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में दिए संबोधन में उन्होंने डू वॉट यू वैल्यू, वैल्यू वॉट यू डू पर फोकस रखा।

सबसे बड़ी चुनौती हमारा मनWatch Full Movie Online Streaming Online and Download

नीरजा ने कहा कि सबसे बड़ी और कठिन चुनौती हमारा मन है। बाकी सब चीजों पर काबू पाना आसान होता है। मन पर काबू मुश्किल है। मन पर काबू से जीवन पर काबू पाया जा सकता है। इसका मतलब है – लाइफ मैनेजमेंट इक्वल्स टू माइंड मैनेजमेंट। जो अपने मन का मालिक है, वही अपने जीवन का भी मालिक है। नीरजा ने कहा कि गीता के छठवें अध्याय में यही बात कही गई है।

आत्मा एवही आम्तमनो बंधु:, आत्मा एव रिपु: आत्मन:। मतलब मन हमारा सबसे अच्छा मित्र है और सबसे बड़ा शत्रु भी। आध्यात्मिकता मन की उलझनों और भ्रम से मुक्ति पाने का रास्ता है। आध्यात्मिकता ही सफलता का मंत्र है। नीरजा ने कहा कि सफलता के लिए कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना होगा। आलोचनाएं सहना होंगी। हम अपनी बनाई भावनात्मक बैसाखी पर ही चलना चाहते हैं। हम अपने ही बनाए दायरों में कैदी बन कर रह जाते हैं। इसी कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की हिम्मत करने पर ऊंचाइयां हासिल हो सकती हैं। रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट रिप्रेज़ेंटेटिव डॉ. महेश कोटबागी व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी संबोधित किया। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लोकेंद्र पापालाल और जनरल सेक्रेटरी अनिल उपाध्याय मौजूद थे। कॉन्फ्रेंस चेयरमैन आर. के. मेहता थे।

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निगेटिविटी से दूर रहें

नीरजा बिड़ला ने बताया कि आदित्य बिड़ला समूह का मध्यप्रदेश के शहरों में स्कूल शुरू करने का विचार है। इसकी प्लानिंग जल्द होगी। युवा पीढ़ी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि न्यू जनरेशन के आसपास नेगेटिव इन्फ्लूएंस ज्यादा है। इस बात का ध्यान रखा जाए कि बच्चों को कितना एक्पोजर देना है।

 

 

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