जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे बने जीनियस

289209-sachinbookbestसचिन की यह किताब बताती है कि बल्लेबाजी को निरंतर सुधारने, मांजने और बेहतर करने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की। जब क्रिकेट खेलने के लिए किशोर सचिन को चाचा के यहां रहना पड़ा, तो चाची उन्हें ड्राइंग रूम में टेनिस बॉल फेंकती थी। पेश है आगे की कुछ रोचक बातें।

सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि उनके बारे में हर कोई जानना चाहेगा। सचिन की आत्मकथा के आकर्षण का तो खैर कहना ही क्या! ग्यारह की उम्र में क्रिकेट में समर्पण दरअसल एक बेहद चंचल किशोर के जीवन को मोड़ देने वाला क्षण था। वह बेहद शरारती थे। टेनिस और क्रिकेट, दोनों के शौकीन। लेकिन बड़े भाई अजीत, जो खुद एक क्रिकेटर थे, की पारखी नजरों ने ताड़ लिया था कि सचिन एक बड़ा क्रिकेटर बन सकता है।

गर्मी की छुट्टियों में सचिन की शरारत जब हद से ज्यादा बढ़ गई, तब अजीत उन्हें रमाकांत अचरेकर के पास ले गए। उनके सामने सचिन के खेल में वह नैसर्गिकता नहीं थी। अचरेकर सर ने कहा, इसे बड़ा होने के बाद ले आना। पर अजीत ने कहा, आप छिपकर एक बार उसकी बैटिंग देखें। अचरेकर छिप गए। सचिन ने समझा, वह चले गए हैं। फिर तो उन्होंने ऐसे हाथ खोले कि अचरेकर सर के कैंप में उनकी एंट्री हो गई।

सचिन ने हर तरह की पिच पर बल्लेबाजी की प्रैक्टिस की। जब छुट्टी के दिन वह अचरेकर सर के यहां नहीं जाते, तो सर खुद आते और स्कूटर के पीछे बिठाकर कहते, क्रिकेट का मैदान तुम्हारा इंतजार कर रहा है। उसी स्कूटर पर सर उन्हें एक मैदान से दूसरे मैदान में मैच खेलने ले जाते थे। उनका सिद्धांत था-नेट प्रैक्टिस की तुलना में मैच खेलना ज्यादा जरूरी है।

एक दिन में दो-दो, तीन-तीन मैच वह खेलते थे। दिन के अंत में आखिरी पंद्रह मिनट में तीस खिलाड़ी सचिन को घेरकर खड़े हो जाते और अचरेकर सर विकेट पर एक का सिक्का रख देते थे, आउट न होने पर वह सिक्का सचिन का होता था। सबसे आखिर में पैड-ग्लव्‍स-बैट के साथ सचिन को मैदान के दो चक्कर लगाने पड़ते थे! तेज से तेज गेंदों को धुन डालना सचिन की खासियत थी। पर पहले पाकिस्तान दौरे पर वसीम अकरम और वकार यूनुस की तेज गेंद और खासकर रिवर्स स्विंग ने सचिन को परेशान किया था। ऐसी तेज गेंदबाजी का उन्होंने सामना नहीं किया था। पहली पारी में सस्ते में आउट हो जाने पर जब उन्होंने वरिष्ठों से सलाह मांगी, तो रवि शास्त्री ने बताया था कि विकेट पर टिके रहने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके अलावा गेंद पर हमेशा नजर बनाए रखने की आदत का भी उन्हें लाभ मिला।

गेंदबाजों के खिलाफ तैयारी को लेकर सचिन ने क्या लिखा

गेंदबाजों के खिलाफ तैयारी और उनकी गेंदों के अध्ययन के बारे में सचिन ने जो कहा है, वह ध्यान देने लायक है। सचिन लिखते हैं कि खासकर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन की गेंदें खेलकर उन्होंने वॉर्न के खिलाफ तैयारी की। वह गेंदबाज का ऐक्शन और बॉल की ग्रिप देखकर रणनीति बनाते थे। क्रिस क्रेयर्न्स के गेंदबाजी एक्शन को न भांप पाने पर एक टेस्ट में सचिन और द्रविड़ ने योजना बनाई, जिसके तहत नॉन-स्ट्राइकर ऐंड पर खड़ा बल्लेबाज स्ट्राइकर को गेंद के बारे में इशारा कर देता था, हालांकि बाद में बॉलर ने इसे भांप लिया था। डियोन नैश और पेड्रो कॉलिन्स की गेंदबाजी का सामना करते हुए भी शुरुआत में सचिन को परेशानी हुई।

कॉलिन्स का गेंदबाजी एक्शन देखने के लिए वह कई बार क्रीज छोड़कर जान-बूझकर ऑफ साइड में चले जाते थे! विभिन्न किस्म की गेंदबाजी का सामना करने के लिए सचिन जिस तरह अपना स्टांस बदलते थे, वह भी ध्यान देने लायक है। आत्मकथा में अपनी प्रेम कहानी, अंजलि से शादी और साथी खिलाड़ियों के बारे में उन्होंने विस्तार से लिखा है। इस किताब में क्रिकेट के एक जीनियस के बनने की कहानी तो है, लेकिन मैच-दर-मैच ब्योरे से अगर बचा जाता, तो किताब थोड़ी और रोचक हो सकती थी।

-कल्लोल चक्रवर्ती

(साभार-अमर उजाला)

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