पुरुष क्यों नहीं पहनते ऊंची हील के जूते ?

resizedimage (1)

ऊंची हील के जूते कई पीढ़ियों से महिलाओं के नारीत्व और उनकी व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ज़माने में ऊंची हील के जूते पुरूषों की जिंदगी का अहम हिस्सा थे.

आम सोच में ऊंची हील के जूते सुंदर हैं, सेक्सी है और भी बहुत कुछ लेकिन ऊंची हील को दिल से चाहनेवाले भी ये नहीं कह सकते कि इन जूतों का कोई व्याहवारिक पहलू भी ना इन्हें पहनकर पहाड़ पर चढ़ा जा सकता है, ना बर्फ पर चला जा सकता है, ना पत्थरीली सड़क पर चला जा सकता है.

ऊंचाई का मतलब

जो महिलाएं ऊंची हील के जूते पहनती हैं उन्हें सलाह दी जाती है कि वो घास पर ना चलें, बर्फ पर ना चलें, पत्थरीली सड़क पर ना चलें और ना ही चिकने फर्श पर इतना ही नहीं ये हाई हील आरामदायक भी नहीं होती. इतनी तकलीफदेह की उन्हें देखकर लगे कि इन्हें चलने के लिए नहीं बनाया गया होगा, सच्चाई यही है. ऊंची हील के जूतों को पैदल चलने के मकसद से नहीं बनाया गया था.

resizedimage (2) ss

पर्शियाई घुड़सवारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले जूते

टोरंटो में बाटा शू म्यूज़ियम की ऐलिज़ाबेथ सैमलहैक कहती हैं,“ऊंची हील के जूतों को सदियों से घुड़सवारी के जूतों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है.”

आज के ईरान और उस समय के पर्शिया में अच्छा घुड़सवार होना ज़रूरी था.

रकाब से रुतबे तक

जब घुड़सावार दौड़ते हुए घोड़े से तीर का निशाना लगाता तो यही ऊंची हील उसे घोड़े के रकाब पर पकड़ देती थी. जब 1599 में पर्शिया के शाह अब्बास ने यूरोप में अपने राजदूत भेजे तो उनके साथ ये जूते यूरोप तक जा पहुंचे.

इन जूतों को अभिजात वर्ग ने स्वीकार कर लिया और इन्हें दिलेर और पौरुष वयक्तित्व का हिस्सा माना जाने लगा.

 

1701 में लूईस चौदहवें की तस्वीर

उस वक्त ऐसा माहौल बना कि मानो ये ऊंची हील के जूते ही पुरुषों को पौरूष और दिलेर बना सकते हैं.

जैसे-जैसे ये शौक रईसों से आम लोगों में पहुंचा, रईसों ने अपने जूतों की हील को बढ़ाना शुरु कर दिया और इसी तरह ऊंची ऐड़ियों के जूतों का चलन आया.

17वीं सदी के यूरोप की कीचड़ से भरी गलियों में इन जूतों की कोई ज़रुरत नहीं थी.

लेकिन यहीं बात इन्हें खास बना रही थी. उस दौर में अव्यहवारिक होकर ही अपने रुतबे को दिखाने का चलन था.

ऐलिज़ाबेथ सैमलहैक कहती हैं, “उच्च वर्ग हमेशा से ही अव्यहवारिक फैशन चलाते रहे हैं. ये भी उसी चलन का हिस्सा था. उन्हें ना तो आम जीवन के कामधाम करने थे और ना ही दूर तक चलना था.”

जूतों की इतिहास की बात की जाए तो फ्रांस के लूईस चौदंवें का जिक्र करना ज़रूरी है. वो शासक महान थे लेकिन उनकी लंबाई सिर्फ पांच फुट चार इंच थी.

उन्होंने 10 इंच की हील से अपनी ऊंचाई की कमी को पूरा किया. इस हील पर अक्सर उनकी लड़ाईयों का जिक्र उकेरा गया होता था.

हाई हील पर हमेशा मार्शल कौम का लाल रंग होता था और बेहद मंहगीं पॉलिश का इस्तेमाल होता था.

1670 में लूईस चौदहवें ने आदेश जारी किया कि लाल पॉलिश वाले जूते सिर्फ उनके दरबारी ही पहन सकते हैं.

इसका मतलब था कि जो राजा के पक्ष में है वो ही हील के जूते पहनेगा. वैसे गैरकानूनी रुप से ऊंची हील के जूते ज़रुर उपलब्ध थे.

पुरूषों सा दिखने की चाहत

w

आज भले ही ये हील बनाना आसान हो, उस जमाने में इस तरह की हील बनाना एक इंजिनियरिंग चुनौती थी.

जब महिलाओं में पुरुषों सा दिखने का फैशन चला तो यही ऊंची हील महिलाओं और बच्चों की पसंद बन गया.

उस दौर में बाल काटना, पुरुषों की तरह कंधे पर बिल्ले पहनना महिलाओं के फैशन का हिस्सा था.

महिलाएं पुरुषों की तरह दिखना चाहती थी और ये ऊंची हील के जूते उनकी इस चाहत को बखूबी पूरा कर रहे थे.

इस दौरान पुरुषों की हील कम होती चली गई और महिलाओं की हील ज्यादा ऊंची और गोलाइदार होती चली गई.

महिलाओं के जूतों की नोक पैनी होती थी ताकि उनके पैर छोटे और कोमल लगें.

कुछ साल आगे बढ़े तो लोगों का नज़रिया बदला, अब लोगों का ज़ोर शिक्षा और उपयोगिता पर हुआ. अब दिखावा नहीं उपयोगिता मायने रखती थी.

1740 तक पुरुषों ने ऊंची हील का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. 50 साल बाद ये ऊंची हील के जूते महिलाओं के पैरों से भी गायब हो गए.

कामुक्ता से रिश्ता

इस तरह की तस्वीरों ने ऊंची हील के जूतों को वापस फैशन में ला खड़ा किया.

इसके बाद 19वीं सदी के मध्य में ऊंची हील के जूते वापस फैशन में लौटे.इस दौर में फोटोग्राफी महिलाओं की छवी और फैशन को निर्धारित कर रही थी.

फोटोग्राफर इस फैशन को अपनाने वालों में सबसे पहले थे. नई तकनीक के सहारे उन्होंने पोस्टरों के लिए महिलाओं की नग्न तस्वीरें खींची. देखने में तो ये परंपरागत नग्न तस्वीरों जैसी ही हुआ करती थी लेकिन इन तस्वीरों में महिलाओं को आधुनिक ऊंची हील वाले जूते पहने हुए दिखाया जाता था.

ऐलिज़ाबेथ सेमलहैक मानती हैं कि उन तस्वीरों से ही ये मान्यता शुरु हुई कि ऊंची हील महिलाओं के उत्तेजक रुप को पेश करने के लिए अहम है.

1960 में कम ऊंची हील वाले जूते पुरुषों के लिए फैशन में आए लेकिन 1970 तक पुरुषों की हील का फैशन जा चुका था.

 

loading...
Pin It