‘मुजफ्फरनगर दंगा और दुर्गा शक्ति प्रकरण काले धब्बे हैं’

mpप्रचंड जनादेश और उम्मीदों के साथ अखिलेश यादव ने 18 महीने पहले उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली थी। लेकिन इसके बाद वे अक्सर गलत कारणों के चलते ही खबरों में आए। मुजफ्फरनगर दंगा सबसे नया उदाहरण है। आरोप लग रहे हैं कि इसमें सपा और भाजपा की मिलीभगत थी ताकि 2014 के आम चुनावों में दोनों को इसका फायदा हो सके। धारणा यह भी बन गई है कि अखिलेश बस नाम के मुख्यमंत्री हैं।  शोमा चौधरी के साथ बातचीत में उन्होंने इन तमाम आलोचनाओं के जवाब दिए। बातचीत के संपादित अंश
अखिलेश, आप उत्तर प्रदेश की जनता के लिए बड़ी उम्मीद बन कर आए थे। अब वह उम्मीद टूट रही है।

उम्मीदें इतनी जल्दी टूटती हैं ? अगर ऐसा होगा तो कोई काम कैसे कर सकेगा ?

जल्दी नहीं है, आप 18 महीने से मुख्यमंत्री हैं। हम पहले मुजफ्फर- नगर की बात करते हैं। आपकी सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। आपसे कहां चूक हुई 
यह बहुत दुखद है। यह नहीं होना चाहिए था। मैंने विधानसभा में भी इसकी निंदा की। जब भी मेरी राजनीतिक यात्रा का इतिहास लिखा जाएगा, मुजफ्फरनगर और दुर्गा शक्ति नागपाल की घटना मेरे ऊपर काले धब्बे के रूप में याद की जाएगी। जो भी गड़बड़ियां हुई हैं उनकी जांच का आदेश दिया गया है। मैं इस पर पूरी नजर बनाए हुए हूं। आगे भी लोगों के खिलाफ कार्रवाइयां होंगी। फिलहाल मेरी सबसे बड़ी चिंता है विस्थापितों को उनके घर वापस भेजना। हमारी जिम्मेदारी है कि विभिन्न समुदायों के बीच में विश्वास का माहौल पैदा किया जा सके।

साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसी ताकतों के ऊपर नियंत्रण किया जाए जो इस तरह की मामूली घटनाओं को बड़े हादसों में बदलने का काम कर रहे हैं। चुनाव करीब आने के साथ ही वे हर मामले को हिंदू-मुसलमान का मामला बनाने में लगे हुए हैं। आप देखिए कि उन्होंने 84 कोसी यात्रा के दौरान क्या किया। सबको पता है कि यह यात्रा का सही समय नहीं था। वे हमसे यात्रा की अनुमति के लिए मिले थे। पर वे 100 कोस अतिरिक्त यात्रा करने की मांग कर रहे थे। यह गलत था, इसलिए हमने उन्हें इजाजत ही नहीं दी।

पहले आपने उन्हें अनुमति दी और फिर वापस ले ली, एक तरह से आपने भी इसे बड़ा मसला बनाने में योगदान किया ?

गलत, कोई परमीशन नहीं दी गई थी। वे झूठा दावा कर रहे हैं।

पहले हम कवाल की बात करते हैं। सात मु्स्लिम युवकों को क्यों और किसके निर्देश पर रिहा किया गया था 

कवाल में कोई कह रहा है कि साइकल और मोटरसाइकल आपस में टकरा गए थे। कोई कहता है कि लड़की को छेड़ा गया था। यह जांच का विषय है। जो बात साफ है वह यह है कि पहले एक लड़के की हत्या हुई, इसके बाद दो और लड़कों की। पुलिस को गिरफ्तारी करनी चाहिए और उसने की भी। आपकी बात सही है कि शायद सात मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया था जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। न्यायिक जांच में यह बात साफ होगी कि किसने उन्हें आदेश दिया था। जिसने भी यह किया था उसे निश्चित रूप से सजा मिलेगी। लेकिन जहां तक मेरी जानकारी है आजम खान का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे बताया गया है कि एक स्थानीय नेता था, लेकिन जांच पूरी होने से पहले मैं किसी का नाम नहीं ले सकता।

प्रशासन की गलती थी कि वह उस मंच पर मौजूद था जिसे मुस्लिम नेताओं ने आयोजित किया था। प्रशासन ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन लोगों ने घोषणा कर रखी थी कि मीटिंग के बाद वे डीएम के आवास तक जुलूस निकालेंगे। प्रशासन ने मामले को बैठक स्थल पर ही खत्म करने की नीयत से ऐसा किया था। लेकिन मीडिया ने इसे अलग तरीके से प्रचारित किया। इससे स्थितियां बिगड़नी शुरू हो गईं। अगले दिन पंचायत हुई और फिर सात तारीख को महापंचायत का आयोजन हुआ। हमारी तरफ से गड़बड़ी यह हो गई कि हम इतनी बड़ी भीड़ का अंदाजा लगाने में चूक गए। हालात को और बिगाड़ने का काम किया इस दौरान मोबाइल और इंटरनेट पर फैलाए जा रहे वीडियो और संदेशों ने। जान-बूझकर अविश्वास और भय का माहौल पैदा किया गया। इस महापंचायत में भाजपा के कई नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए। इसके बाद एक मुस्लिम ड्राइवर की हत्या हो गई। इसकी प्रतिक्रिया में जौली गांव में कई लोगों की हत्याएं हुईं। गलती यह हुई कि हमने समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए। हम हालात का सही  अंदाजा लगाने में असफल रहे। हालात बिगड़ने पर हमने तत्काल ही सेना से मदद मांगी ताकि हालात और न बिगड़ने पाएं। नौ सितंबर तक स्थिति नियंत्रण में आ गई थी।

आप कह रहे हैं कि आप महापंचायत का अंदाजा लगाने में चूक गए। पर जब धारा 144 लागू थी तो महापंचायत की अनुमति क्यों दी गई ?

पहले ही कई पंचायतें हो चुकी थीं और कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी। नियमत: पंचायतें अपने मुद्दे पर बहस करती हैं और फिर एक प्रस्ताव पास करके उसे प्रशासन को सौंप देती हैं। कभी भी ये इस तरह से अनियंत्रित नहीं हुई हैं। इसलिए हम अनुमान लगाने में चूक गए।

तमाम नेता, जिसमें आपकी अपनी पार्टी के अलावा बसपा और कांग्रेस के लोग भी शामिल थे, पहले ही मुस्लिम पंचायतों में भड़काऊ भाषण दे रहे थे। तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि आपको अंदाजा नहीं था

ये सवाल तो आज खड़े हो रहे हैं ना, जब आप पंद्रह दिन बाद बैठकर चीजों को समझ रहे हैं। पुलिस वहां मौजूद थी, घटनाएं हुईं, उन्होंने रोकने की कोशिश की। अब इसकी जांच के आदेश भी दिए जा चुके हैं। दोषी अफसरों को निश्चित तौर पर दंड मिलेगा।

पांच सितंबर को भाजपा ने मुजफ्फरनगर बंद का आह्वान किया था। एडीजी मुकुल गोयल, डीजी पुलिस और एडीजी (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार वहां मौजूद थे। ये लोग सात तारीख तक वहीं रहे। ये विश्वास कैसे कर लिया जाए कि उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था ?

नहीं, ज्यादातर अधिकारी वापस आ गए थे। मुकुल गोयल को इसलिए भेजा गया था क्योंकि आस-पास के इलाकों में ट्रेनों और बस अड्डों पर हमले की कई घटनाएं हुई थीं। उन्हें इन पर नियंत्रण के लिए भेजा गया था। जहां तक पंचायतों और महापंचायतों का सवाल है, प्रदेश के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि राजनीतिक पार्टियां वहां इस तरह के भड़काऊ भाषण दें। मैं गलत हूं तो आप मुझे बताएं एक भी ऐसी घटना।

अगर यह पहली घटना होती तो शायद आपकी इतनी आलोचना नहीं हो रही होती। पिछले 18 महीने में इस तरह की अनेक घटनाएं हुई हैं। ऐसा लगता है कि आप इन्हें गंभीरता से लेते ही नहीं हैं 

पर हमने तो सारे मामलों में कार्रवाई की है। आपको शायद पूरी जानकारी नहीं है। अगर आप एक-एक घटना की पड़ताल करें तो पाएंगी कि सरकार ने सबमें कार्रवाई की।

जहां तक हमारी जानकारी है, किसी में भी ठीक से कार्रवाई नहीं हुईहै। फैजाबाद के दंगे में भाजपा विधायक राम चंद्र यादव पर घृणा फैलाने के लिए धारा 153 लगाई गई। फिर भी न तो उन्हें गिरफ्तार किया गया, न आरोपपत्र दाखिल हुआ।

कार्रवाई होगी, आपको पता है कि कितने लोग फैजाबाद दंगों के आरोप में जेल में हैं?

हां, पर मुख्य अभियुक्त अब भी आजाद है। फैजाबाद के पांच कस्बों में एक साथ दंगे हुए। ऐसा बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद भी नहीं हुआ था। इससे यह संदेश जा रहा है कि सपा और भाजपा के बीच में मिलीभगत है। 

यह बिल्कुल गलत बात है। हमारी पार्टी को इससे क्या फायदा मिलेगा। जो लोग घटना के वक्त मौजूद थे उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जो रह गए हैं उन्हें भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

एक आम धारणा है कि आपकी सरकार में कई सारे सत्ता केंद्र हैं। आपका अपनी सरकार पर नियंत्रण ही नहीं है। 

जो भी बड़ा फैसला लेना होता है, सरकार उसे लेती है। मुझे पता है कि मौजूदा हालात में कोई भी हमारी सरकार के विकास कार्यों के बारे में नहीं सुनना चाहता। लोगों को शांत करना और समझाना बहुत कठिन है। लोगों को भड़काना बहुत आसान है। धर्मनिरपेक्षता बहुत कठिन है, सांप्रदायिकता बेहद आसान खेल है। फिर भी हमारा सारा ध्यान विकास के एजेंडे पर है। नए विश्वविद्यालय, एमबीबीएस की पांच सौ नई सीटें, दो नए मेडिकल कॉलेज, मुफ्त सिंचाई, बीज और खाद जैसी चीजें आपको हर जगह मिलेंगी। नई मंडियां बनाई जा रही हैं, निजी-सरकारी सहयोग से बनने वाली तमाम सड़क परियोनाओं को हमने हरी झंडी दिखाई है। बनारस से सोनभद्र, दिल्ली से सहारनपुर और हल्द्वानी से बरेली के बीच फोर लेन हाइवे निर्माणाधीन है। इसके अलावा 16 दूसरी सड़क परियोजनाएं विचाराधीन हैं।

आपकी जनहित की योजनाओं से हम इनकार नहीं कर रहे लेकिन नौकरशाही में तमाम लोगों से बातचीत में हमने पाया कि शासन पर आपकी पकड़ ही नहीं है।

कहां? कैसे? आपने ऐसा कैसे महसूस किया। आपने मुझसे इतने सारे सवाल किए? मैंने किसी भी सवाल का जवाब किसी से सलाह लेकर या पूछकर दिया? आपको कहीं से भी ऐसा लगा कि मुझे हालात की जानकारी नहीं है?

लेकिन एक धारणा तो बन ही गई है कि मुख्यमंत्री भले ही आप हों पर आपके सचिवालय तक पर आपकी नहीं चलती। हर जगह आपके पिता, चाचा और अनीता सिंह जैसे नौकरशाहों का नियंत्रण है।

यह धारणा हो सकती है,  लेकिन आप जमीन पर जो हो रहा है उसे भी तो देखें। जो भी योजनाएं चल रही हैं, क्या उन्हें नौकरशाही नहीं चला रही? ये तो हमेशा होगा कि कुछ अच्छे अफसर होंगे और कुछ अक्षम। जो अच्छे होंगे उन्हें और जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जो अच्छा काम नहीं करेंगे उन्हें ठीक किया जाएगा।

क्या आप यह कह रहे हैं कि आपके 18 महीने के कार्यकाल में कोई कमी नहीं रही है ?

जो उत्तर प्रदेश मुझे मिला, उसकी हालत क्या थी आपको पता होगा। कई चीजों को पटरी पर लाना, स्मारक पार्कों और मूर्तियों की सनक से इसे दूर ले जाना, इसे विकास की एक नई दिशा देना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना।।।बिजली, यहां बहुत समस्याएं थीं। हम ऊर्जा उत्पादन और वितरण पर काम कर रहे हैं।  हमने चीनी मिलों, मुर्गीपालन, सौर ऊर्जा के लिए नई नीतियां बनाई हैं और इन सबमें निवेश भी शुरू हो चुका है। गरीबों को घर देने के लिए हम एक नई योजना बना रहे हैं। हम लोहिया ग्राम बना रहे हैं। रोजगार तो पैदा कर ही रहे हैं, बेरोजगारों को भत्ता भी दे रहे हैं। हम छात्रों को कंप्यूटर दे रहे हैं। दूसरा कौन राज्य यह कर रहा है?

आप इतना कुछ कर रहे हैं तो सड़कों पर नरेंद्र मोदी और भाजपा का माहौल क्यों दिख रहा है?

सांप्रदायिक होना बहुत आसान है। मैं पढ़ता रहता हूं कि उन्होंने बहुत विकास किया है। अगर उन्होंने इतना विकास किया है तो वे और उनकी पार्टी सांप्रदायिकता के रास्ते पर क्यों चल रहे हैं?

अगर आप धर्मनिरपेक्ष हैं और आपका ध्यान विकास पर केंद्रित है तो आप पर बार-बार यह आरोप क्यों लग रहा है कि आप भी एक खतरनाक सांप्रदायिक खेल खेल रहे हैं?

देखिए, विधानसभा में मैंने सब पार्टियों के सामने कहा कि जो सांप्रदायिक माहौल बनाया गया है, हमें उसे ठीक करने के लिए काम करना होगा। हमें मीडिया के भी कुछ मित्रों को ठीक रास्ते पर लाना होगा।

IAS-officer-lea25675क्या आप मीडिया को दोष दे रहे हैं? लेकिन आप तो मीडिया की न के बराबर परवाह करते लगते हैं। दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड करने के आपके फैसले पर कितना विवाद हुआ था।

देखिए, वह एक अलग मामला है। यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि टेलीविजन मीडिया ने बात को जरूरत से ज्यादा ही तूल दिया। सरकार किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। अधिकारियों को नियमों का पालन करना होता है। आप किसी भी चीज को ऐसे ही तोड़ देंगे? आप लोगों को नोटिस नहीं देंगे? आप उन्हें जवाब देने के लिए वक्त नहीं देंगे?

गुंडा राज के लिए सपा हमेशा बदनाम रही। जब आपने आपराधिक छवि के डीपी यादव को टिकट देने से इनकार कर दिया तो आपकी खूब तारीफ हुई। सबको लगा कि अब उत्तर प्रदेश में कुछ अलग होगा। लेकिन आपके मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीनों के भीतर लोग कहने लगे कि गुंडाराज वापस आ गया। आपके मंत्री खुलेआम पार्टी कार्यकर्ताओं को कहते दिखे कि अगर अधिकारी न सुनें तो उन्हें कमरे में बंद करके पीटो। पुलिसवालों की वर्दी उतरवा दो।

ऐसा कहां हुआ था?

जावेद अबीदी, शिव कुमार बेरिया, शंख लाल मांझी की बातें आपने सुनी ही होंगी। 

क्या बेरिया की मेरी सरकार में कोई अहमियत है?

मुद्दा यह नहीं है। उनकी अहमियत भले न हो लेकिन उन्हें लगता है कि वे ऐसी बातें कह सकते हैं, वह भी सार्वजनिक मंचों पर।

मैं मानता हूं कि उन्हें ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी। आपने जिन नेताओं की बात की वे नेता नहीं हैं। कार्यकर्ता और जनता उनकी नहीं सुनेंगे। लेकिन हां, क्योंकि उन्हें मंच से ये बातें कही हैं तो हम इसके लिए जवाबदेह हैं। लेकिन इन नेताओं का कोई कद नहीं है। वे यह सब बस अपनी अहमियत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए कहते हैं।

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आपने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा राजनीतिक साजिश है। लेकिन जो दंगे पहले हुए उनके लिए कौन जिम्मेदार है?

क्या आप नहीं समझ रहीं कि यूपी में क्या हो रहा है? आपको लगता है कि जिन पार्टियों का मैंने जिक्र किया उनकी इसमें भूमिका नहीं है?

चलिए, मान लिया कि यहां संघ और भाजपा गंदी राजनीति कर रहे हैं। यह भी कि आपकी पार्टी का इसमें कोई हाथ नहीं। लेकिन फिर मुसलमान क्यों सपा से दूर जा रहे हैं? क्यों आपके वोट बैंक को यह लग रहा है कि आपने उसे धोखा दिया और इस्तेमाल किया 

मैं भी चाहता हूं कि सच सामने आए। क्यों यह सच सामने नहीं आ रहा? आप इन सभी घटनाओं की पड़ताल करके क्यों नहीं बताते कि इनके लिए कौन जिम्मेदार है? आप खुद इसकी पड़ताल करिए और बताइए कि क्या मैं जो कह रहा हूं वह गलत है।

लेकिन यह एक तथ्य है कि मुसलमान आपसे दूर गए हैं, खासकर मुजफ्फरनगर के बाद।

मैं आपसे फिर कह रहा हूं। धर्मनिरपेक्ष होना मुश्किल है। सांप्रदायिक होना आसान। लेकिन समाजवादी पार्टी ने अतीत में भी सांप्रदायिक ताकतों को रोका है और वह भविष्य में भी ऐसा ही करेगी।

आपकी खुद की नौकरशाही कहती है कि आप अब भी मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी पार्टी के मुखिया की तरह काम करते हैं। आपके शुभचिंतकों के मुताबिक आपको यह अहसास नहीं है कि आपको एक व्यापक जनादेश ने मुख्यमंत्री बनाया है।

आपने मेरे शत्रुओं से बात की होगी। मुझे सार्वजनिक जीवन में कितना समय हो गया है? उत्तर प्रदेश के पुराने लोगों से पूछिए। यहां के पुराने पत्रकारों से पूछिए कि मुझमें कितना बदलाव आया है।

आपकी छवि एक ऐसे मुख्यमंत्री की बन गई है जिसकी काम करने में दिलचस्पी नहीं है।
आप ऐसा क्यों कह रही हैं? मैंने नौ महीने में एक फ्लाइओवर बनवाया है।

लोग कहते हैं कि सरकारी फाइलें देखते हुए आपका ध्यान बार-बार अपने ब्लैकबेरी फोन पर जाता रहता है।
अगर कोई फोन या एसएमएस आया है तो क्या मुझे उसका जवाब नहीं देना चाहिए?

चलिए ठीक है, आपके बारे में जो विरोधी कह रहे हैं हम उसकी बात नहीं करते। अपनी कमी या कमजोरी के बारे में आप खुद बताइए? एक युवा नेता की तरह विश्लेषण करके ईमानदारी से उत्तर दीजिए। 

देखिए यह बहुत मुश्किल सवाल है। उत्तर प्रदेश सिर्फ राज्य नहीं है बल्कि एक मायने में एक देश है। यहां बहुत कुछ करने की जरूरत है। बुनियादी स्तर पर काफी काम किया गया है जिसका असर छह महीने से लेकर साल भर के भीतर दिखाई देगा। आप बताइए कि यदि हमने सौरऊर्जा नीति पर काम नहीं किया होता तो इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में इस समय आ रहा निवेश कहां से आता। उत्तर प्रदेश में इस समय प्रतिदिन दो करोड़ अंडों की मांग होती है। पहले अंडे हैदराबाद और दक्षिण भारत के दूसरे हिस्सों से आते थे, अब इस क्षेत्र में भारी निवेश हो रहा है जो हमारी सफल पोल्ट्री योजना का परिणाम है। मैं अक्सर सुनता रहता हूं कि गुजरात दुग्ध उत्पादन में पहले नंबर पर है लेकिन ऐसा नहीं है। पहला स्थान तो उत्तर प्रदेश का है। मुझे पता है कि इस समय लोग विकास के लिए उठाए गए मेरे कदमों के बारे में सुनना नहीं चाहते लेकिन कुछ महीने बाद यह दोबारा सबसे महत्वपूर्ण मसला होगा। इसलिए मैं कहता हूं कि मेरे लिए अभी खुद का मूल्यांकन करना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश को वापस पटरी पर लाने की जिम्मेदारी मुझे दी गई है और मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं। आपको कुछ दिन बाद इसके नतीजे दिखाई देंगे।

कुछ आलोचकों का कहना है कि मोदी ने न मुफ्त में लैपटॉप बांटे, साड़ियां दीं  और न ही कन्यादान योजनाएं चलाईं फिर भी जनता ने उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री बना दिया। 
मैं और मेहनत करूंगा और आने वाले दिनों में अच्छे नतीजे दूंगा। लेकिन इस नकारात्मक धारणा को बदलने के लिए आपको भी मेरी मदद करनी होगी। मीडिया को इस बदलाव को पहचानना होगा।

इसे विडंबना ही माना जाएगा कि आज सपा को सांप्रदायिक ताकत कहा जा रहा है। आपको भी कुछ लोग अखिलेश मोदी कह रहे हैं।
देखिए, दो चीजें हैं जिन्हें मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं छोड़ पाऊंगा चाहे इस वजह से मेरे राजनीतिक करियर का जो भी हश्र हो : मैं ताउम्र समाजवादी रहूंगा और धर्मनिरपेक्षता का पालन करूंगा।

(साभार-तहलका)

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