‘सपनों का सोना सपने में ही रहेगा, बंद होगी खुदाई’

resizedimage (1)लखनऊ।। यूपी के उन्नाव में सोने की तलाश के लिए हो रही खुदाई शुरू होने के 15 दिन बाद भी नतीजा शिफर है। पूरे देश की नजर उन्नाव के डौंडिया खेड़ा गांव में राजा राव रामबख्श सिंह के किले पर टिकी हुई थी। सूत्रों की माने तो उन्नाव के डोंडियाखेड़ा गांव में सोना नहीं है। वहां खुदाई कर रही एएसआई को सोना नहीं मिला है। अब एसआई ने मुख्य जगह पर खुदाई रोकने का फ़ैसला किया है हालांकि आधा दर्जन से ज़्यादा जगहों पर चोरों ने सोने के लालच में खुदाई शुरू कर दी है। चोरों को यकीन है कि सोना यहां गड़ा हुआ है। इंडिया टीवी चैनल के स्टिंग आपरेशन में भी शोभन सरकार ने उल्टे सीधे जवाब ही दिए हैं जो हकीकत से परे हैं। 

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कहा जाता है कि यूपी के उन्नाव में आज भी एक सिद्धपुरुष हैं जिन्हें सुनहरे सपने आते हैं। ये हैं साधु शोभन सरकार। बाबा का उन्नाव के आसपास बहुत प्रभाव है। यहां की बीघापुर तहसील में 1857 में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले बहादुर राजा राम बख्श सिंह के किले के अवशेष के पास साधु शोभन सरकार का आश्रम है। इलाके में चर्चा है कि एक दिन राजा राम बख्श सिंह की आत्मा स्वंय साधु महराज के सपने में आई, उन्हें किले के खंडहर में एक हजार टन स्वर्ण भंडार दबे होने की जानकारी दी। बाबा ने ये जानकारी खुद तक नहीं रखी। जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर उन्होंने अपने सपने की जानकारी दी। खंडहर के नीचे खजाना होने की बात बताई।

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बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी एसएसआई तक भी पहुंच गई और कमाल देखिए खंडहर के आसपास एएसआई की खुदाई टीम ने डेरा डाल दिया। हो सकता है आपको इन बातों पर यकीन न आ रहा हो। लेकिन बात सौ फीसदी सच है। ये उन्नाव के बीघापुर तहसील का डौंडिया खेड़ा गांव है। यहीं पर वो खंडहर मौजूद है जहां साधु शोभन सरकार ने 1000 टन स्वर्ण भंडार दबे होने का सपना देखा है। आपके सपने कितनी बार सच हुए हैं ये तो आप भी बेहतर जानते होंगे। लेकिन एएसआई ने साधु शोभन सरकार का सपना सच करने का बीड़ा उठा लिया है। लेकिन अब यही सपना टूटता नजर आ रहा है। 

दरअसल कभी राजा राम बख्श की रियासत उत्तर प्रदेश की अमीर रियासतों में गिनी जाती थी। लड़ते-लड़ते अंग्रेजों की कैद में चले गए और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई। लेकिन कहानी है कि अंग्रेजों के हाथों आने से पहले राजा ने एक बड़ा खजाना जमीन के नीचे दबवा दिया था। अब करीब डेढ़ सौ साल बाद राजा ने सपने में आकर खजाने की असली जगह का पता दिया है। इस पते के हाथ लगते ही पीएम से लेकर सीएम तक और सीएम से लेकर डीएम तक हरकत में आ गए हैं। पुरातत्व विभाग की टीम भी इस गुमनाम से किले में पहुंच गई है। और तैयारियां हो रही है खंडहर के नीचे खजाना खोजने की। किले के खंडहर से खजाना निकलना बाकी है लेकिन पुलिस के तैनाती के बाद अब इस मुद्दे पर भी गंभीर बहस छिड़ गई है कि 1000 टन स्वर्ण भंडार वाले खजाने का क्या होगा। ग्राम प्रधान ने एक लंबी चौड़ी चिट्ठी सरकार को भेज दी है, जिसमें स्कूल से लेकर एशिया का नंबर एक अस्पताल बनवाने तक की मांग है। दरअसल जिस किले में खजाना होने की बात कही जा रही है, वो किला 17वीं शताब्दी में स्थानीय ताल्लुकदार तिलक चंडी राजपूत ने बनवाया था। एएसआई के शुरुआती सर्वे में भी पता चला है कि किले लखौरी ईंटों से बना है जिसका इस्तेमाल 17वीं शताब्दी में होता था। यानी किले के खंडहर के नीचे खजाना है तो उसे ताल्लुकदार ने पहले दबाया होगा, इसके बाद उसके ऊपर किले का निर्माण कराया होगा। ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या एक छोटे से ताल्लुक की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी थी कि उसने 1000 टन सोने का भंडार इकट्ठा कर लिया। गौरतलब है कि देश के बहुत से बड़े मंदिरों के पास भी 1000 टन सोने का भंडार नहीं है, जहां हर साल कई किलो सोना चढ़ावे में आता है, ऐसे में सवाल है कि डौंडिया खेड़ा के ताल्लुकेदार के पास इतनी बड़ी दौलत कहां से आई होगी। एएसआई ने खजाने की खोज शुरू करने से पहले क्या वैज्ञानिक सबूत इक्ट्ठा किए हैं, इसकी जानकारी उसने सार्वजनिक नहीं की हैं, लेकिन खबरों के मुताबिक एएसआई ने खुदाई शुरू करने से पहले इलाके की मिट्टी की जांच की है। खुदाई से पहले स्वामी शोभन सरकार की बताई जगह पर एएसआई ने दो छेद ड्रिल किए थे। जमीन से करीब 20 मीटर नीचे ड्रिलिंग मशीन ऐसी सतह से टकराई है, जो मिट्टी नहीं लगती है।

हालांकि एक मंदिर में खजाना होने का किस्सा सच भी हो चुका है। हमें यकीन है कि केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर को आप भी नहीं भूले होंगे, जहां दो साल पहले एक अरब से ज्यादा का खजाना निकला था। 

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