सर्दियों में आपको बीमारियों से कौन बचाएगा ?

uuसर्दियां आते ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानी शुरू हो जाती है। सर्द हवाओं और व्यायाम की कमी से हमारी दिनचर्या बिगड़ जाती है। कई कोशिशों के बावजूद कफ, कोल्ड और साइनस जैसे परेशानी आम होती है। इस सर्दी में सांस से जुड़े संक्रमण से बचने का सबसे बेहतर तरीका है अपने खानपान में थोड़ा बदलाव किया जाए और लाइफस्टाइल में प्राकृतिक चीजों को मिलाया जाए। सर्दी के दिनों में कफ एलर्जी बढ़ने लगती है, जिससे बलगम, खून जमना, लंग इंफेक्शन, खांसी और जुकाम जैसी समस्या आम होती है। इस मौसम से जुड़ी और भी कई समस्याएं हैं जैसे अस्थमा, साइनस, आर्थराइटिस, वजन का बढ़ना और उच्च कोलेस्ट्राल स्तर। इस मौसम में आयुर्वेद, नैचुरोपैथी और यूनानी दवाइयां बच्चों और बड़े दोनों को ठंड से बचाने में मदद करती हैं। प्याज और लहसुन का सेवन करना इस मौसम में बेहतर होता है। कच्चा प्याज और लहसुन खाना, गुड़ के साथ उनका जूस पीना कफ और कोल्ड से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है। अगर कच्चा लहसुन और प्याज खाना पसंद नहीं तो आप इसे सूप और सलाद में भी डालकर खा सकते हैं।

अदरक और तुलसी को पानी में तब तक उबालें, जब तक वह आधा न हो जाएं। फिर इसे सादा या एक चम्मच शहद के साथ पीएं। यह घोल छह साल से ऊपर के बच्चों के लिए बेहतर होता है। बच्चों के पैरों के तलवे और हथेली पर लहसुन को तिल के तेल में पका कर मालिश करने से रक्त संचार बेहतर होता है। बड़ों की बात करें तो सौंफ, काली मिर्च, काला नमक और लौंग के मिश्रण में शहद मिलाकर खाएं। यह बेहतरीन इलाज हर तरह के गले के संक्रमण, कफ और कोल्ड से राहत देता है। इस मिश्रण को गर्म पानी के साथ या गर्म पानी में घोलकर पीया जा सकता है। हल्दी का सेवन एक तरह से एंटीसेप्टिक का काम करता है जिससे साइनस जैसे संक्रमण भी दूर होते हैं।

इस मौसम में प्राचीन यूनानी दवाइयां खासकर जोशांदा सबसे कारगार दवाई साबित होती है। बच्चों और बड़ों में होने वाले हर तरह के कफ, कोल्ड, अस्थमा, साइनस और फेफड़ों के संक्रमण में ये दवाइयां कारगर होती हैं। हालांकि कई लोग जोशांदा जैसी दवाइयां नहीं लेते। जबकि इसमें प्राकृतिक मिश्रण जैसे यूकलिप्टस, लिकराइस, मालाबार नट्, हिसोप, पेपरमिंट और सौंफ होता है तो सर्दी में होने वाली बीमारियों में यह बेहतर काम करता है। इन सारे हर्बस को पानी में तब तक उबालना चाहिए, जब तक यह आधा न हो जाए। फिर इस मिश्रण का काढ़े के रूप में तब लें जब यह थोड़ा सा गर्म हो।

हर दिन गर्म पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर गरारे करने से गले का संक्रमण थोड़ा कम होता है। हर दिन ब्रश के बाद गरारे करना फायदेमंद होता है। दूसरा तरीका है सर्दी के दौरान हफ्ते में दो दिन भाप लेना। यह प्रक्रिया जुकाम होने से रोकने से मदद करती है। यह नेजाल ट्रैक्ट संक्रमण को दूर रखती है। साइनस जैसी बीमारी से बचने के लिए हल्दी की जड़ों को जलाकर उसका धुआं सूंघना फायदेमंद होता है। हल्दी को सबसे लाभदायक एंटीसेप्टिक माना जाता है जो साइनस संक्रमण को रोकने में कारगार होती है। साथ में सर्दी में होने वाले कफ और कोल्ड को भी दूर रखती है।

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