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समझौता ब्लास्ट में असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी

नई दिल्ली. समझौता ब्लास्ट केस में सभी चार आरोपी बरी कर दिये गए हैं। पंचकुला की एनआईए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। एनआईए कोर्ट ने 2007 समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में असीमानंद सहित सभी चार आरोपियों को बुधवार को बरी कर बड़ी राहत दी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत ने बीते 11 मार्च को फरवरी 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे, जिसमें ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे। एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा एक नई याचिका दाखिल करने के बाद विशेष एनआईए अदालत को 14 मार्च को फैसला सुनाना था जिसे सोमवार (18 मार्च) तक के लिए टाल दिया गया था।

महिला राहिला ने अपनी वकील के जरिए एक ईमेल भेजा था, जिसमें कहा गया कि वारदात के पाकिस्तान के प्रत्यक्षदर्शियों को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया है। राहिला विस्फोट में मारे गए एक पाकिस्तानी की बेटी थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि पाकिस्तान के गवाहों को न तो समन भेजा गया और ना ही अदालत के समक्ष पेश होने को कहा गया। एनआईए अदालत को नई याचिका को स्वीकार करने पर फैसला लेना था।

एनआईए के विशेष न्यायाधीश जगदीप सिंह ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस याचिका में कोई विचारणीय मुद्दा नहीं है। एनआईए के वकील राजन मल्होत्रा ने बताया, ”अदालत ने सभी चारों आरोपियों नबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिन्दर चौधरी को बरी कर दिया।”

एनआईए अदालत ने इस मामले में जनवरी 2014 को हिंदू नेता स्वामी असीमानंद व तीन अन्य कमल चौहान, राजेंद्र चौधरी व लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे। असीमानंद को अदालत से अगस्त 2014 में जमानत मिल गई। इस मामले में बहस 6 मार्च को समाप्त हो गई और एनआईए अदालत ने कहा था कि फैसला 11 मार्च को सुनाया जाएगा, जिसे बाद में 20 मार्च तक के लिए टाल दिया गया था। यह विस्फोट दिल्ली से लाहौर के बीच चलने वाली ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत में हुआ था, जिसमें 68 लोग मारे गए थे। 43 पाकिस्तानी, 10 भारतीय व 15 अज्ञात लोग मारे गए थे।