सोनू यादव ने भी कसर नहीं छोड़ी अखिलेश की लुटिया डुबोने में

लखनऊ ।। उत्तर प्रदेश के कार्यकारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ओएसडी प्रेस आशीष यादव उर्फ सोनू की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की चुनावी रैलियों में पत्रकारों को भेजने को लेकर जाति और वर्ग विशेष का ध्यान रखा गया। दलित और पिछड़े वर्ग के पत्रकारों को इस तरह से हाशिए पर रखा गया कि वह यूपी सरकार की सही रिपोर्टिंग करने से दूर रहें।

विधानसभा चुनाव के दौरान जिन अखबारों, टीवी चैनलों और वेब पोर्टलों को कमीशन लेकर विज्ञापन दिया गया, वह भी काफी अहम है। पार्टी कार्यालय में दिन भर घूमने वाले घुमंतू पत्रकारों के अखबरों और वेबपोर्टलों को जमकर विज्ञापन दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी गतिविधियां आशीष यादव उर्फ सोनू की देखरेख में ही हो रही थीं। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी इससे पल्ला झाड़ते रहे हैं। 

समाजवादी पार्टी कार्यालय में पिछले पांच साल तक सामंतवादी गतिविधियां चलती रहीं। दलित और पिछड़ी जाति के पत्रकारों की इतनी हैशियत बना दी गई थी, वह खबरों के लिए भी पार्टी कार्यालय बड़ी मुश्किल से आते थे। उनके मोबाइल नंबर और मेल आईडी भी दर्ज करवाने में यह कार्यालय कोताही बरतता रहा। पार्टी कार्यालय में वर्ग और जाति विशेष के पत्रकारों को ही तवज्जों दी जाती थी। यही वजह रही है कि समाजवादी पार्टी का लखनऊ मुख्यालय पूरी तरह से हाईजैक हो गया था। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने तो यहां आना ही छोड़ दिया था।

राजधानी लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार तो नाम न लिखे जाने की शर्त पर बताते हैं कि उन्होंने समाजवादी मुख्यालय जाना ही बंद कर दिया था, क्योंकि यह कार्यालय खबरों का नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों का अड्डा बन गया था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपने ही कार्यालय की गतिविधियों को नजर अंदाज किया। चुनाव में इसका भी खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है।

फोटोः फाइल।

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