Breaking News

बच्चा करे ऐसी हरकत तो न करें नजर अंदाज

लखनऊ. बच्चों की गंभीर बीमारी को लेकर ब्रिटेन के डाक्टर राहुल भरत लखनऊ में सेंटर खोलकर सेवाएं दे रहे हैं। ऑटिज्म नाम की इस बीमारी का बच्चों के माता-पिता को तो पहले पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है, तो वह इसे नजर अंदाज करने लगते हैं। यह उनके बच्चों के लिए घातक होता है।

सोमवार को राजधानी लखनऊ के एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान डा. राहुल भरत ने बताया कि एसोसिएशन ऑफ चाइल्ड ब्रेन रिसर्च सेंटर इस दिशा में पिछले कई साल से काम कर रहा है। यह बीमारी बच्चों की जिंदगी को बर्बाद कर देती है। पैरेंट्स को इसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ जरूरी एहतियात और फिजिकल एक्टिविटी से इसे दूर किया जा सकता है। एसोसिएशन का मुख्य उद्देश्य उन सभी बच्चों की परेशानियों के निदान और उपचार के लिए सर्वोत्तम जानकारी देना है।

डा. भरत ने यह भी बताया कि पूरे विश्व में 2 अप्रैल को ऑटिज्म डे मनाया जा रहा है। इस जागरुकता दिवस पर एसोसिएशन ऑफ चाइल्ड ब्रेन रिसर्च ने 2 अप्रैल को राजधानी लखनऊ के एमबी क्लब में एक प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। प्रतियोगिता जीतने वाले बच्चों को पुरस्कार दिए जाएंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि अभी तक बच्चों में इस परेशानी के कारक का पता नहीं चल पाया है। इस बीमारी के लक्षण को देखकर बिना कोई दवा दिए ही इसका इलाज किया जा सकता है। यह पूरी तरह से फिजिकल एक्टिविटी पर आधारित है।

ये भी जानें

क्या आपका बच्चा आपके चेहरे के हावभाव को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है ? क्या वह आपकी आवाज सुनने के बावजूद न तो खुश होता है और न ही कुछ जवाब देता है? क्या वह दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा चुप रहता है? अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण हैं तो हो सकता है कि वह ऑटिज्म से पीड़ित हो।

ऑटिज्म एक मानसिक बीमारी है जिसके लक्षण बचपन से ही नजर आने लग जाते हैं। इस रोग से पीड़ित बच्चों का विकास तुलनात्मक रूप से धीरे होता है। ये जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु तक विकसित होने वाला रोग है जो सामान्य रूप से बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है। ऐसे बच्चे समाज में घुलने-मिलने में हिचकते हैं, वे प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं और कुछ में ये बीमारी डर के रूप में दिखाई देती है।

हालांकि ऑटिज्म के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन ऐसा माना जाता है कि ऐसा सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। कई बार गर्भावस्था के दौरान खानपान सही न होने की वजह से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।

क्या होते हैं लक्षण:

– सामान्य तौर पर बच्चे मां का या अपने आस-पास मौजूद लोगों का चेहरा देखकर प्रतिक्रिया देते हैं पर ऑटिज्म पीड़ित बच्चे नजरें मिलाने से कतराते हैं।

– ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे आवाज सुनने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

– ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को भाषा संबंधी भी रुकावट का सामना करना पड़ता है।

– इस बीमारी से पीड़ित बच्चे अपने आप में ही गुम रहते हैं वे किसी एक ही चीज को लेकर खोए रहते हैं।

– उनकी सोच बहुत विकसित नहीं होती है। इसलिए वे रचनात्मकता से दूर ही नजर आते हैं।

– अगर आपका बच्चा नौ महीने का होने के बावजूद न तो मुस्कुराता है और न ही कोई प्रतिक्रिया देता है तो सावधान हो जाइए।

– अगर बच्चा बोलने के बजाय अजीब-अजीब सी आवाजें निकाले तो यह समय सावधान हो जाने का है।