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कोरोना की जंग में हर नागरिक है सिपाही, एप डाउनलोड कर मुहिम का दें साथः डॉ. कौलेश्वर

कोरोना को लेकर जहां सरकारें चिंतित हैं और हर संभव उपाय कर रही हैं, वहीं पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के प्रोफेसर भी अपने स्तर पर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। रवीन्द्र किशोर शाही राजकीय महाविद्यालय पथरदेवा देवरिया के एसोसिएट प्रोफेसर (समाजशास्त्र विभाग) डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी ने लाक डाउन 3.0 को लेकर लोगों से अपील की है। पेश हैं अपील के संक्षिप्त अंश-

अपील

प्यारें विद्यार्थियों एवम् सम्मानित अभिभावकगणों

शतर्क रहें, सुरक्षित रहें, घर में रहें,

1- नजर हटी, दुर्घटना घटी।
2- कर्ज और बीमारी अवसर पड़ते ही दोबारा उभर जाती है, इसलिए लापरवाही न बर्तें।
3- देश कोरोना वायरस से युद्ध में है। सही मायने में यह जनता की लड़ाई है।
4- कोरोना महामारी से लड़ाई में हर नागरिक सिपाही है।
5- दो गज दूरी, बहुत जरूरी।

सरकार एक निश्चित समयावधि तक ही lockdown रख सकती है। धीरे-धीरे lockdown खत्म हो जाएगा, सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी, क्योंकि सरकारों को जन जीवन सुरक्षा, संरक्षा हेतु उद्योग धंधे, सरकारी गैर सरकारी उत्पादक इकाईयां संचालित करनी पड़ेंगी, जिससे जन सामान्य को भूख, भय, मानसिक तनाव, मानसिक विकार के साथ ही साथ मानसिक बेरोजगारी से बचाया जा सके और देश के जन सैलाब के मौलिक अधिकारों की रक्षा कर उनकी मौलिक आवश्यकताएं पूरी कर सकें।

सरकारी निजामों (देश-देशान्तर) ने हम सबको कोरोनावायरस बीमारी के बारें में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है। बीमार होने के बाद की स्थिति भी हम लोग देश और दुनिया में कोरोना वायरस (कोविड-19) की स्थिति देख ही रहे हैं।

हम सभी को समझदारी से अपने आगे के लम्बी अवधि तक अपनी दिनचर्या, काम करने का तरीका समझना चाहिए। कोई भी जनप्रिय और जनतांत्रिक सरकार दीर्घावधि तक चौकीदारी कर सकती है क्या??

हम सभी देश के नागरिकों के हाथों में ही अपने-2 परिवार के साथ ही साथ देश के सुखद-स्वास्थ्य का भविष्य देश के राष्ट्रवादी राष्ट्रभक्त नागरिकों के हाथ में हैं। लॉकडॉऊन जब भी खुले, खुलने के बाद सोच समझ कर घर से निकले एवं काम पर जाये व नेक नियति व नियमानुसार ही अपना योगदान राष्ट्र व मानवहित में करें।

क्या आपको लगता कि एक निश्चित समयावधि के बाद एका-एक कोरोना चला जायेगा और हम सभी पहले की तरह ही जीवन जीने लगेंगे?

कोरोना वायरस की जटिलता को देखते हुए ऐसा नहीं कहा जा सकता है, जैसा कि विश्व के सभी चिकित्साशास्त्रियों द्वारा इसकी विलक्षणता के बारें बार बार दुनिया को चैतन्य रहने की सलाह दे रहे हैं। ये वायरस अब देश और दुनिया में जिस प्रकार महामारी की तरह फैल रहा है, हमें इसके साथ रहना सीखना चाहिए। हमें इससे भयभीत होने की जरुरत नहीं है, बल्कि शतर्क रहकर प्रदेश व देश के सरकार आदेशों का अक्षरसः पालन कर हम अपने जीवन को रोग मुक्त रखकर देश के एक जिम्मेदार नागरिक सैनिक भूमिका निभा कर देश और मानव समाज की रक्षा में मानवरक्षा सेनानी बनने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त कर सकते है।

आखिर कैसे?

हमे स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपने जीवन शैली में बदलाव करके, अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करके।

शुद्ध आहार लें

  • आंवला, एलोवेरा, गिलोय, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, लौंग, अदरक, हल्दी आदि पर निर्भर हों कर एन्टी बायोटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करें।
  • अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ायें, फ़ास्ट फ़ूड का उपयोग ना करें।
  • अपने बर्तनों को बदलना होगा, अल्युमिनियम, स्टील, टेफ़लोन कोटिंग आदि से निजात पाना होगा। हमे भारी बर्तन जैसे पीतल, कांसा, तांबा, मिट्टी को अपनाना चाहिए, जो प्राकृतिक रूप से वायरस को खत्म करते हैं। अपने आहार में दूध, दही, घी की मात्रा बढ़ानी होगी। हम सब तभी सरवाइव कर पाएंगे, जब खुद की आदतें बदल लें। नहीं बदलेंगे, तो पूरी दुनिया भयंकर महामारी का कोप भाजन हो ही रही है।
  • समझदार और व्यवहारिक बने और इस बात को मान कर इस पर अमल करना शुरू कर दें कि जिंदगी आपकी है, लेकिन फैसला आप खुद नहीं कर सकते है, क्योंकि इसका असर संपूर्ण मानव समाज पर पड़ेगा इसलिए स्वयं स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहें। जहां है, वही रहें।
  • आरोग्य सेतु, आयुष कवच ऐप डाऊनलोड कर निर्भय हो और शासन/प्रशासन के दिशा निर्देशों का अक्षरसः पालन सुनिश्चित करें।

डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, रवीन्द्र किशोर शाही राजकीय महाविद्यालय, पथरदेवा देवरिया।