शरद ने नीतीश को किया पैदल अब जदयू को करेंगे बर्बाद

jd-u-president-sharad-yadav-r-with-bihar-chief-minister-nitish-kumar-during-the-party-s-national-executive-meeting-in-new-delhi-13658486880934जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव पहले राजनीतिक रूप से नीतीश कुमार को ठिकाने लगा चुके हैं। उनकी अगली रणनीति अब जदयू को बर्बाद कर देने की है। शरद यादव के ही विश्वशस्तक लोगों की माने तो वह भाजपा में भी अपने लिए रास्ते तलाश रहे हैं।

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद शरद यादव के हर कदम से नीतीश कुमार कमजोर हुए हैं और जदयू का आंतरिक संकट बढ़ा है। यह स्थिति थमती नजर नहीं आ रही है। नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से अपाहिज बना चुके शरद यादव अब जदयू को तबाह कर देना चाहते हैं।

हाल के राजनीतिक घटनाक्रम इसी बात के गवाह हैं। लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने मुख्येमंत्री पद से इस्तीइफा दे दिया था। विधायक इसके लिए तैयार नहीं थे कि नीतीश को हटाया जाए, लेकिन शरद यादव की जिद के कारण नीतीश को आखिरकार इस्ती फा राज्यकपाल को सौंपना पड़ गया था। इसके बाद शरद के दबाव में ही नीतीश कुमार लालू यादव के सामने आत्मासमर्पण करने को विवश हुए थे। और आज नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक साख की लड़ाई लड़ रहे हैं।

विभाजन की तैयार कर दी जमीन

शरद यादव की अगली रणनीति जदयू को बर्बाद करने की है। उनकी ही सह पर राज्यरसभा चुनाव में बागी विधायकों ने निर्दलीय उम्मी दवार का खुलेआम समर्थन किया। इसके साथ ही पार्टी का आंतरिक कलह गहराने लगा था और स्थिति यह हो गयी कि पार्टी नीतीश और मांझी के खेमे में बंट गयी है। दोनों खेमों ने शक्ति परीक्षण की तिथि भी तय कर दी। सीएम मांझी ने प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले में नीतीश की उपेक्षा शुरू की तो नीतीश ने पार्टी के अंदर ही मांझी विरोधी खेमे को बढ़ावा दिया। उन्हें उकसाया भी। और जब मांझी ने नीतीश के विश्वदस्तव पीके शाही और ललन सिंह के कामकाज पर सवाल खड़ा कर दिया तो नीतीश खुद बगावत पर उतर आए। अब वह खुद मुख्यखमंत्री बनना चाहते हैं। शरद यादव इसी समय की प्रतीक्षा में थे कि नीतीश और मांझी एक-दूसरे पर ‘तीर’ तान दें।

भाजपा की जमीन सींच रहे हैं शरद

शरद यादव ने विधायक दल की बैठक बुलाकर मांझी को भड़काया और मांझी ने न केवल शरद यादव की बुलायी बैठक में जाने से मना कर दिया, बल्कि स्वरयं भी विधायक दल की बैठक बुला ली। इससे स्पबष्टम हो गया है कि जदयू में विभाजन तय है। विश्वमस्ति सूत्रों की माने तों शरद दोनों खेमों में लड़ाई लगाकर दिल्लीं रवाना हो जाएंगे। दरअसल शरद यादव भाजपा में जाने की राह तलाश रहे हैं और भाजपा की जमीन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

बीरेंद्र कुमार यादव
लेखक आह्वान (साप्ताहिक ई-पत्रिका के संपादक हैं)

फाइल फोटो- बाएं नीतीश कुमार, दाएं शरद यादव।

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