Breaking News

सांसद सावित्री बाई फुले की चुनाव आते ही बदल गई विचारधारा

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी से टिकट कटने की आशंकाओं को लेकर खुद को अंबेडकरवादी और मूर्तिपूजा का विरोधी करार देने वाली सावित्री बाई फुले अब बदलने लगी हैं। कांग्रेंस से टिकट मिलते ही सावित्री बाई फुले मंदिर में दर्शन करने और माथा टेकने पहुंच गईं।

हालांकि बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने समाजवादी पार्टी और बसपा का दरवाजा भी खटखटाया था। अखिलेश यादव से उन्होंने मुलाकात भी की थी, लेकिन दोनों ही दलों में उन्हें जगह नहीं मिल पाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संविधान विरोधी और बाबा साहेब के विचारों पर खुद को चलने का दावा करने वाली सावित्री बाई फुले को कांग्रेस ने बहराइच से टिकट देने का भरोसा दिया है, लेकिन सावित्री के लिए यह सीट इस बार जीत पाना आसान नहीं है। इलाके के लोगों का कहना है कि मोदी मैजिक पर सवार होकर सांसद बन गई सावित्री को अब विधानसभा चुनाव जीतने में भी पापड़ बेलने पड़ेंगे।

बहराइच के समाजसेवी महेश कुमार कहते हैं कि सावित्री बाई फुले ने अपने ही समाज के लोगों को धोखा दिया है। पिछले पांच साल में उन्होंने इलाके में कोई काम नहीं करवाया। उनका रिपोर्ट कार्ड जब खराब निकला तो भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं देने का फैसला एक साल पहले ही सुना दिया था। सावित्री बाई फुले अब विधानसभा चुनाव जीत जाएं तो भी बड़ी बात होगी। वह बहुजन समाज को अधिक समय तक गुमराह नहीं कर सकती हैं।