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वोटरशिप की मांग कर रहे भरत गांधी की जेल से रिहाई से पहले जमानतदार भी गायब

 रिपोर्ट- अखिलेश कृष्ण मोहन

लखनऊ. व्यवस्था परिवर्तन और आम आदमी की आवाज उठाने वाले भरत गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया है। भरत गांधी 13 मार्च को नागालैंड के दीमापुर में चल रहे राजनीतिक सुधार को लेकर प्रशिक्षण शिविर लगा रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उनको 10 दिन तक हिरासत में रखा और राजनीतिक साजिश के तहत जेल भेज दिया। उनकी जमानत 21 मई को होनी थी, लेकिन जमानतदार एक निजी होटल से रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। पुलिस पूरे मामले को लेकर उदासीन बनी हुई है।

गौरतलब है कि नागालैंड में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति नीतिर्देशक विश्वात्मा भरत गांधी की 13 मार्च को हुई गिरफ्तारी के मामले रहस्य बना हुआ है। जमानत के लिए दीमापुर में ठहरे हुए पार्टी के दो कार्यकर्ता विश्वात्मा की रिहाई से ठीक एक दिन पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। पार्टी ने इस घटना को विश्वात्मा भरत गांधी की रिहाई और उनके वोटरशिप अभियान को रोकने के लिए की जा रही साजिश का हिस्सा बताया है।

पार्टी के उत्तर प्रदेश कमेटी के प्रभारी क्रांतिकारी भानु प्रताप ने बताया कि 13 मार्च 2020 को विश्वात्मा भरत गांधी को दीमापुर में चल रहे राजनीति सुधारकों के प्रशिक्षण शिविर के बाद अचानक दीमापुर पुलिस द्वारा पूछताछ के नाम पर गिरफ्तार का लिया था। पुलिस ने विश्वात्मा को बिना ठोस कारण के 10 दिन पुलिस हिरासत में रखा। उसके बाद 24 मार्च को उनको सेंट्रल जेल में भेज दिया गया। दिल्ली से आए दो कार्यकर्ता, शिवाकान्त गोरखपुरी जो पार्टी की अखिल भारतीय समिति के सचिव हैं और उनके सहायक नवीन कुमार 14 मार्च से विश्वात्मा की रिहायी के लिए नागालैंड में ही रह रहे थे। बाद में लॉकडाउन शुरू होने के कारण वे वहीं पर फंस गए। वे दीमापुर में ही एक होटल में रह रहे थे और लगातार वकीलों से संपर्क कर विश्वात्मा को रिहा कराने का प्रयास कर रहे थे। 20 मई को विश्वात्मा जमानत पर बाहर आने वाले थे।

भानु प्रताप ने बताया कि विश्वात्मा की रिहाई से ठीक एक दिन पहले 19 मई की शाम करीब 4 बजे कुछ लोग शिवाकान्त और नवीन से मिलने आए और कुछ देर बाद दोनों कार्यकर्ता उन्हीं लोगों के साथ उनकी गाड़ी में बैठकर चले गए। उसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया। होटल के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखने से पता चलता है कि उनसे मिलने आए लोग संख्या में 4 थे। भानु प्रताप ने कहा कि पार्टी के नेता विश्वात्मा की गिरफ्तारी एक राजनीतिक साजिश का नतीजा थी। पार्टी के दोनों कार्यकर्ताओं के अचानक गायब होने के पीछे भी वही लोग हैं, जो चाहते हैं कि विश्वात्मा जेल से बाहर न आ पाएं, जिससे उनके द्वारा देश के सभी वोटरों को देश की औसत आय में से हिस्सा दिलाने का आंदोलन समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि लोकडाउन के बहाने देश की प्रशासन तानाशाहों जैसा व्यवहार कर रहा है। प्रशासन ने लोकडाउन के बहाने एक ऐसे व्यक्ति को पिछले 2 माह से जेल में रखा हुआ है, जो सदियों से आर्थिक तंगी झेल रहे मजदूरों, श्रमिकों, गरीबों और निम्न आर्थिक वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने के लिए कार्य कर रहे थे।

गौरतलब है कि आम आदमी की लड़ाई लड़ रहे विश्वआत्मा ने शादी नहीं की, परिवार नहीं बसाया, कोई संपत्ति नहीं बनाई। अपने जीवन का एक-एक पल देश ही नहीं विश्व के वंचित और आर्थिक तंगी झेल रहे लोगों के नाम कर दिया। उनके प्रयासों से वोटर जागरूक हो रहा है तथा सरकारों से सवाल कर रहा है। इसलिए प्रशासन ने एक साजिश के तहत पहले विश्वात्मा को जेल में डाल दिया और अब उनकी रिहाई का प्रयास कर रहे पार्टी कार्यकर्ता भी अचानक गायब हो गए हैं।