Tuesday, September 7, 2021

अमर सिंह की सपा में वापसी का मुहूर्त तलाश रहे पंडित

amarसपा के दो दर्जन से अधिक मंत्री तो ऐसे हैं जो अमर सिंह के सामने बोल भी नहीं पाते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो अमर सिंह का कद मुलायम सिहं यादव के बाद दूसरे नंबर पर होगा, वह पार्टी और परिवार के हर गुट को न केवल साधने का काम करेंगे बल्कि उनका फैसला भी अहम होगा। मुलायम सिंह यादव भी चाहते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर अमर सिंह को साथ लेकर चला जाए।

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। वक्त बड़े-बड़े जख्मों को भर देता है। समाजवादी पार्टी से निकाले गए अमर सिंह ने कभी अपने नेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ नहीं हुए। हालांकि वह राष्ट्रीय लोकदल से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार जीत की परवाह नहीं करते हुए सपा के खिलाफ उनका रुख नरम ही रहा। अब वह दिन अब दूर नहीं कि अमर सिंह और जया प्रदा साइकिल की सवारी करेंगे। पंडित उनकी सपा में वापसी को लेकर शुभ मुहूर्त तय करने में जुटे हैं।

सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी में अमर सिंह की वापसी का मामला अब कुछ ही दिनों की बात है। बातचीत नए मुकाम पर पहुंच गई है। पिछले महीने ही अमर सिंह लखनऊ में थे, उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात की थी। इस मुद्दे को लेकर यादव परिवार में दो घंटे से ज्यादा समय तक आपसी मंथन भी हुआ था। सबसे अहम रहा कि बैठक में पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव भी शामिल थे, जो अमर सिंह की घर वापसी में आजम खान से कहीं ज्यादा बड़ी बाधा बताए जाते हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अमर सिंह न केवल सियासी रूप से पार्टी को मजबूत करेंगे, बल्कि मुलायम सिंह यादव के घर में शुरू हो रही आपसी कलह को भी शांत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।mul

जनता परिवार में होगा अहम कद

सूत्र यह भी बताते हैं कि उन्हें यूपी के साथ-साथ जनता परिवार को भी साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है। अमर सिंह पार्टी के मैनेजर की भूमिका में होंगे। वह इसके पहले भी मीडिया मैनेजमेंट की बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाते रहे हैं। जो काम अमर सिंह कर सकते हैं, वह काम आजम खां के बस की बात नहीं है। आजम खां से जहां मीडिया चिढ़ता है वहीं, अमर सिंह मीडिया में सुर्खियां बनाते हैं। मुलायम सिंह यादव भी चाहते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर अमर सिंह को साथ लेकर चला जाए।

ज्ञात हो कि फरवरी 2010 में सपा से निष्कासित होने के बाद अमर सिंह पांच अगस्त, 2014 को जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा के सार्वजनिक मंच पर प्रकट हुए थे। जनेश्वर मिश्र के नाम पर बने पार्क के लोकार्पण समारोह में अमर सिंह खास तौर पर बुलाए गए मेहमान थे। उन्हें यह न्योता खुद मुलायम सिंह यादव ने दिया था। इस आमंत्रण पर आजम खान एवं प्रोफेसर राम गोपाल यादव जैसे दिग्गज नाराज भी हो गए और कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए थे। तब कहा गया था कि अमर सिंह राज्यसभा की सांसदी बचाने के लिए व्याकुल हैं, लेकिन उस कथित व्याकुलता का कोई नतीजा नहीं निकला। अमर सिंह राज्यसभा की सदस्यता जारी नहीं रख पाए, लेकिन उसके बाद भी उनकी सपा प्रमुख से मुलाकातें होती रहीं। सपा नेताओं का एक खेमा अमर सिंह को पार्टी में फिर से शामिल किए जाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व को कुछ नेताओं की नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य की चिंता है।

फिर हाशिए पर चले जाएंगे कई नेता

बताया जा रहा है कि आजम की सपा में वापसी से जहां पार्टी को मजबूती मिल सकती है, वहीं उन नेताओं को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है, जो या तो नए हैं या पार्टी के लिए काम तो करते हैं, लेकिन जगह नहीं बना पाए हैं। सपा के दो दर्जन से अधिक मंत्री तो ऐसे हैं जो अमर सिंह के सामने बोल भी नहीं सकते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो अमर सिंह का कद मुलायम सिहं यादव के बाद दूसरे नंबर पर होगा।

फोटोः फाइल।