Wednesday, September 8, 2021

इस आईएएस की मनमानी पर मुख्यमंत्री करेंगे फैसला

10लखनऊ ।। नियुक्ति और कार्मिक विभाग के सचिव राजीव कुमार अपने एक आदेश को लेकर विवादों में हैं। इस आदेश को मुख्यमंत्री और शिवपाल को भरोसे में लेने से पहले ही जारी कर दिया गया। यही वजह है राजीव कुमार के आदेश से शिवपाल यादव खासे नाराज बताए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री के लखनऊ लौटने पर राजीव पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है।

मामला प्रमोशन में आरक्षण को लेकर है। आरोप है कि आईएएस अधिकारी राजीव ने प्रमोशन पाए होमगार्ड और सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को रिवर्ट करने का आदेश जारी कर दिया था। बताया जा रहा है कि उन्‍होंने यह आदेश सरकार और मंत्री की अनदेखी करते हुए दिया था। इसके बाद से यूपी में आरक्षण के नाम पर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी रोटी सेंकनी शुरू कर दी थी। इस आदेश का असर देखते हुए राजीव कुमार सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव के आंखों की किरकिरी बन गए थे।

सिंचाई विभाग में आरक्षण को लेकर आदेश जारी कर अब राजीव कुमार फंस चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्‍होंने आदेश जारी करने से पहले मंत्री शिवपाल यादव की सहमती भी नहीं ली थी। इससे शिवपाल काफी गुस्से में हैं। इसको लेकर उन्‍होंने राजीव कुमार को तलब भी किया था और इससे संबंधित बात भी की थी। इस आदेश से सबसे ज्यादा नुकसान शिवपाल यादव को हुआ है। सपा के बीते तीन साल देखे जाएं, तो शिवपाल ने सबसे ज्यादा कैबिनेट मंत्रियों में काम किया है। जनता के बीच भी वह बीते तीन सालों में लोकप्रिय हुए हैं। ऐसे में सिंचाई विभाग में ऐसे आदेश से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से वह वह राजीव कुमार से नाराज हैं। आदेश को लेकर बवाल बढ़ता देख शिवपाल यादव ने सीएम अखिलेश यादव से इस बारे में चर्चा की। अब कोई भी फाइल बिना मुख्य सचिव आलोक रंजन और प्रमुख सचिव सीएम अनीता सिंह के देखे बिना राजीव कुमार तक नहीं पहुंच रही है। यही नहीं तबादला संबंधी फाइलों पर विशेष तौर पर निगरानी की जा रही है।

सबसे अहम यह भी है कि राजीव कुमार पर दाग भी लगा हुआ है, लेकिन अखिलेश सरकार ने दरियादिली दिखाते हुए उन्हें सचिवालय के सबसे बड़े पद पर बैठाया। राजीव कुमार पर नोएडा के प्लाट आवंटन घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट है। मुलायम सिंह के पिछले कार्यकाल में मुख्य सचिव रही नीरा यादव के साथ राजीव कुमार पर नोएडा भूमि आवंटन घोटाले के छींटे पड़े थे। इसमें सीबीआई ने उन्हें आरोपित भी बनाया था। मामला अभी गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। उनकी गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है।

गौरतलब है कि मायावती जब 2007 में चौथी बार यूपी की सीएम बनी तो उन्होंने सरकारी नौकरियों में तरक्की में आरक्षण लागू कर दिया। पांच साल में इस व्यवस्था से करीब 1550 दलित अफसरों और कर्मचारियों को कई बार तरक्की का लाभ हुआ। सिंचाई विभाग में जब अधिकारीयों को रिवर्ट करने का आदेश जारी हुआ तो सभी विभागों में हडकंप सा मच गया। मजबूरन सीएम अखिलेश यादव को बयान देना पड़ा कि कोई भी अधिकारी रिवर्ट नहीं होगा।