Wednesday, September 8, 2021

एनएचआरसी की यूपी सरकार को क्लीन चिट

nnbडीडीसी न्यूज़ नेटवर्क।। लखनऊ।। लखनऊ के योजना भवन में हुई राष्ट्रीय मानवाधिकार मीटिंग में यूपी सरकार को कई मुद्दों पर क्लीन चिट मिल गई है। आयोग ने मुजफ्फरनगर में बुल्डोजर चलवाए जाने जैसी ख़बरों को गलत बताया है और एनकाउंटर को लेकर रिपोर्ट तलब किया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को यूपी पुलिस की कार्यशैली पर भले ही ऐतराज है लेकिन मुजफ्फरनगर में बुल्डोजर चलाने की हकीकत तो दूर ख़बर से भी आयोग के अध्यक्ष अनजान हैं। आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि वहां तो बुल्डोजर चला ही नहीं।

प्रदेश के कई जिलों में पुलिस मुठभेड़ और पुलिस अभिरक्षा में हुई मौतों को लेकर भी आयोग को ऐतराज है। योजना भवन में तीन दिन हुई एनएचआरसी की दो खंडपीठों की बैठक में 43 मामले सुने गए। आयोग के अध्यक्ष केजी बालाकृष्णन व सदस्य एससी सिन्हा की खंडपीठ में 18 मामलों को गंभीरता से सुना गया। सबसे अहम बात तो ये रही कि जिन 43 मामलों की सुनवाई हुई उनमें पुलिस मुठभेड़ के 12 मामले केवल लखनऊ के रहे और छह मामले गाजियाबाद के हैं। राज्य सरकार ने आयोग की मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये आर्थिक राहत राशि देने की सिफारिश मंजूर कर ली है।

एनएचआरसी की खंडपीठ के सामने लखनऊ के डीआईजी नवनीत सिकेरा के लखनऊ और मुजफ्फरनगर की तैनाती के दौरान हुए मुठभेड़ के मामले आए। आरोप था कि इनकी तैनाती के दौरान 41 मुठभेड़ हुई। आयोग ने इस सिलसिले में अफसरों से सम्बंधित ब्योरा मांगा, लेकिन कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं थी। इस पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए आठ सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देने को कहा है। मानवाधिकार की टीम ने इस तीन दिन की बैठक में एनजीओ के साथ भी कई मुद्दों पर चर्चा की। महिलाओं को लेकर हिंसक माहौल को लेकर भी एनएचआरसी ने सवाल उठाए। लेकिन मुजफ्फरनगर में कई मुद्दों पर मानवाधिकार गोल मोल जवाब देता ही दिखा।

रूपरेखा वर्मा ने मीटिंग पर उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा ने पूरी मीटिंग को ड्रामा करार दिया है। रूप रेखा ने कहा कि लगता है कि मानवाधिकार की टीम यूपी सरकार से मिल गई है और फर्जी दंगा पीड़ितों को यहां लाया गया है। 

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