Friday, September 3, 2021

किसने कहा पहले सैलरी फिर उड़ेगा विमान ?

kinदिल्ली।।  सरकार ने स्पष्ट किया कि संकटग्रस्त विमानन कंपनी किंगफिशर को तब तक उड़ान भरने नहीं दिया जाएगा जबतक कि वह अपने कर्मचारियों के लंबित वेतन सहित सभी बकाए का भुगतान नहीं कर देती। नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा,‘किंगफिशर को बकाए का भुगतान किए बगैर उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कर्मचारियों को महज भुगतान करना पर्याप्त नहीं है। डीजीसीए ने कहा है कि सभी भागीदारों को संतुष्ट करने की जरूरत है।’  यहां नागर विमानन सचिव के.एन. श्रीवास्तव से किंगफिशर एयरलाइंस के सीईओ संजय अग्रवाल की मुलाकात के बाद विमानन मंत्री सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि किंगफिशर को बैंकों, हवाईअड्डा संचालकों और कर्मचारियों सहित ऋणदाताओं से ये बयान लेने की जरूरत है कि उन्हें उड़ान बहाल किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। कंपनी के सीईओ अग्रवाल किंगफिशर का परिचालन दोबारा शुरू करने की अनुमति लेने आए थे। सिंह ने कहा कि विजय माल्या के स्वामित्व वाली कंपनी के पास कोई ठोस वित्त पोषण योजना नहीं है। कंपनी को परिचालन दोबारा शुरू करने के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपए की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के बकाए से ‘कोई समझौता’ नहीं किया जा सकता।

विमानन मंत्री ने कहा कि संकटग्रस्त किंगफिशर एयरलाइंस को धन जुटाने की अपनी क्षमता सिद्ध करनी पड़ेगी। ‘उन्हें सिद्ध करना पड़ेगा कि वे परिचालन बहाल रखने के लिए धन जुटाने में सक्षम हैं।’ हालांकि,अग्रवाल के साथ बैठक के दौरान श्रीवास्तव ने संकेत दिया कि परिचालन शुरू करने की किंगफिशर की याचिका पर निर्णय तभी किया जा सकता है जब कंपनी अपने कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान कर दे। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि श्रीवास्तव ने अग्रवाल को बताया कि एएआई सहित अन्य वेंडरों के बकाया के मुद्दे पर बाद में विचार किया जा सकता है, लेकिन परिचालन दोबारा शुरू करने की अनुमति लेने से पहले उसे कर्मचारियों का वेतन देना होगा।

क्या है पूरा मामला ?

किंगफिशर कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते आठ महीने से अधिक समय से लंबित हैं। विमानन कंपनी को 7,000 करोड़ रुपए ऋण देने वाले 17 बैंकों के समूह के अगुवा एसबीआई के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने आज भुवनेश्वर में कहा कि किंगफिशर को अपना परिचालन दोबारा शुरू करने के लिए कम से कम 2,000 करोड़ रुपए निवेश करने की जरूरत है।

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