Tuesday, September 7, 2021

किसने कहा रेपिस्टों की न हो फांसी ?

rapeदिल्ली।। (डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क) लड़कियों और महिलाओं पर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कानून में संशोधन की सिफारिश के लिए बनाई गई जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। लेकिन सबसे चौकाने वाली बात ये है कि कमेटी ने बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा पर असहमति जताते हुए बलात्कार और गैंग रेप के दोषियों को ताउम्र सलाखों के पीछे रखे जाने की सिफारिश की। कमेटी के मुताबिक पत्नी से जबरदस्ती और बिना सहमति के समलैंगिक संबंध को भी बलात्कार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। हालांकि कमेटी नाबालिग की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल करने के पक्ष में नहीं है।

कमेटी ने सरकारी तंत्र की उदासीनता को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का मुख्य कारण बताते हुए पुलिस के कामकाज, न्यायपालिका के तौर तरीके, चुनाव प्रक्रिया और महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्म की कानूनी परिभाषा में आमूलचूल बदलाव की सिफारिश की है। कमेटी ने कहा है कि हमारे वर्तमान कानून में कोई कमी नहीं है। वह महिलाओं के खिलाफ जुर्म से निपटने में सक्षम है बशर्ते सरकारी तंत्र अपनी मानसिकता में बदलाव लाकर उसका पालन कारगर तरीके से करे। गृहमंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के दो अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के बाद बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में जस्टिस वर्मा ने सरकार और पूरे तंत्र की उदासीनता पर हैरानी जताते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को समान अधिकार दिए बिना इस समस्या से नहीं निबटा जा सकता।

क्या बजट के पहले होगा फैसला ?

कमेटी ने इस रिपोर्ट को दरिंदगी की शिकार युवती के नाम समर्पित करते हुए कहा है कि सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि बजट सत्र के पहले रिपोर्ट की सिफारिशों पर ठोस फैसला ले। जस्टिस वर्मा ने इस घटना के बाद सरकार को चुनौति देने के लिए सड़कों पर उतरे नौजवानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि अगर उन्होंने यह रूप नहीं दिखाया होता तो सरकार और सरकारी तंत्र अपने ही ढर्रे पर चल रहे होते।

कमेटी ने महिलाओं से जुड़े कानून में कई बदलवों की सिफारिश की है। साथ ही मानव तस्करी को महिला अत्याचार की शुरुआत का मुख्य कारण बताते हुए उससे जुड़े कानून को और सख्त बनाने को कहा है। कमेटी ने रिपोर्ट में महिलाओं से जुड़े कानून के  पालन में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भी एक से दस साल की सजा का प्रावधान रखा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं में सुरक्षा की भावना पैदा करना सरकार की जिम्मेदारी है। लिहाजा अब सरकार को वे सभी कदम उठाने होंगे जिनसे महानगरों के साथ दूर दराज के इलाकों की महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए कानून में फेरबदल के साथ उसके कारगर अमल पर काम करना होगा।

इस तीन सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट में युवतियों पर तेजाब फेंके जाने और अशांत क्षेत्र में तैनात फौज और अर्धसैनिक बलों से जुड़े मामलों पर भी बदलाव की कई सिफारिशें की हैं।

बलात्कारियों को नपुंसक बनाने के पक्ष में नहीं कमेटी

कमेटी ने बलात्कारियों को सजा के तौर पर रासायनिक इंजेक्शन देकर नपुंसक बनाने के सुझावों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि यह एक तो मानवाधिकारों के खिलाफ है और दूसरे हमारा संविधान किसी व्यक्ति को पंगु बनाने की इजाजत नहीं देता। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि किसी का वंध्याकरण करना असंवैधानिक और अमानवीय है। ऐसे में हम यौन अपराधियों के विरुद्ध इस सुझाव की सिफारिश नहीं कर रहे हैं। जबर्दस्ती रासायनिक ढंग से वंध्याकरण के दुष्प्रभाव होते हैं और यही कारण है कि सरकार ने रासायनिक उपायों को अपनी परिवार नियोजन की योजनाओं से अलग रखा है।

कमेटी ने रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि रासायनिक वंध्याकरण बलात्कार को खत्म करने का उपाय भी नहीं है। बलात्कार शक्ति के दुरुपयोग और यौन व्यवहार की विकृति है। इसलिए हमने इस सुझाव को खारिज कर दिया है।

 

 

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