Wednesday, September 8, 2021

किसानों की जमीन पर दो दलों की सियासी लड़ाई

collage__060714114213लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। किसानों के जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को हथियाने के लिए होड़ मची है। मायावती जहां 27 अप्रैल से यूपी में आंदोलन का आगाज करने जा रही हैं और दो मई से पूरे देश में बहुजन समाज पार्टी आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कर रही है वहीं, कांग्रेस इसे हथियाने में पूरी तरह से जुट गई है। दिल्ली के राम लीला मैदान में रैली के बाद उसे संजीवनी मिल गई है।

राहुल गांधी के वापस लौटने के पहले ही मायावती ने ऐलान कर दिया था कि वह केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन करेंगी। इसके बाद राहुल की वापसी की राह देख रही कांग्रेस ने मौका पाते ही मायावती के भूमि अधिग्रहण के आंदोलन पर ग्रहण लगाने की तैयारी कर ली। राम लीला मैदान में हजारों लोगों के साथ राहुल सोनिया की रैली ने यह साबित कर दिया कि उनका निशाना मायावती की जमीन को छींनना ही नहीं है, बल्कि वह उस जमीन को भी हासिल करना चाहती हैं, जिसे वह खो चुकी हैं। इसी हथियार से वह यूपी या अन्य प्रदेशों में मोदी को मात दे पाएंगी।

राहुल ने वापसी के बाद राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश से आए किसानों के कई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की और भूमि अधिग्रहण विधेयक के प्रति और बेमौसम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकासन के प्रति उनकी चिंताओं पर उनसे बात की। राहुल ने किसानों को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी उनके मुद्दों के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी।

पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से उबरने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस की इस ‘खेत किसान रैली’ को पार्टी के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में मायावती के मुख्यमंत्री रहते 2011 में राज्य सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में राहुल ने भट्टा परसौल में पदयात्रा निकाली थी। राहुल एक बार फिर उसी तरह किसानों की इस रैली का नेतृत्व करते नजर आएंगे, लेकिन एक अहम सवाल यह है कि क्या किसानों की जमीन पर मायावती और राहुल की बैटिंग उन्हें कितना फायदा पहुंचाएगी।