Friday, September 3, 2021

कैसे पढ़ेंगी लड़कियां जब ऐसे हैं हालात ?

girl-education-indiaनई दिल्ली।  दसवीं-बारहवीं के नतीजों में हर बार छात्रों से आगे रहने वाली छात्राएं हायर सेकंडरी के स्तर पर पिछड़ती जा रही हैं। 2002 से 09 के बीच देश के शहरी क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं में 48.13 छात्राएं थीं जबकि हायर सेकंडरी पर आंकड़ा 42.56 फीसदी रहा। न सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालातइससे अलग नहीं हैं। यहां छात्र शिक्षक अनुपात तो 32 छात्रों पर 1 शिक्षक तक पहुंचा है लेकिन पेयजल, खेल का मैदान और शौचालयों को लेकर स्थिति खराब बनी हुई है।  

 राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा 2002-09 तक के 8वें ऑल इंडिया एजुकेशन सर्वे में सामने आए तथ्यों ने छात्राओं की शिक्षा को लेकर सब पढ़े सब बढ़ेके नारे को बेमानी साबित कर दिया है। इस सर्वे में देशभर के 13 लाख 6 हजार 992 स्कूलों में मिल रही शिक्षा की स्थिति की पड़ताल हुई है। सर्वे में 84.14 फीसदी स्कूल ग्रामीण और शेष शहरी क्षेत्रों के हैं। इसमें स्कूलों की स्थिति मसलन सुविधाएं, छात्र-शिक्षक अनुपात, मूलभूत सुविधाएं आदि से जुड़े आंकड़े एकत्र किए गए हैं। शिक्षा के बढ़ते कदमों पर नजर डालें तो स्कूलों तक बच्चों को ले जाने की कोशिश में कहीं न कहीं सरकारी प्रयास कामयाब हुए हैं, लेकिन यह प्राथमिक स्तर तक ही सीमित हैं। देश में कुल स्कूलों की संख्या में 26.77 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा 49.15 फीसदी प्राथमिक स्कूलों की संख्या बढ़ी है। हायर सेकंडरी स्तर पर यह बढ़ोतरी 46.8 फीसदी और सेकंडरी स्तर पर 28.95 फीसदी है। एनसीईआरटी के अनुसार बीते साल की तुलना में स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 

 स्कूल में बढ़ा पंजीकरण का आंकड़ा: बीते सात सालों में 22 करोड़ 89 लाख 94 हजार 454 विद्यार्थियों का विभिन्न मान्यता प्राप्त स्कूलों में पंजीकरण हुआ है। पहली से बारहवीं कक्षा में इस पंजीकरण में 13.67 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें लड़कियों के पंजीकरण में 19.12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

आवश्यक सुविधाओं की कमी : सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के पांच में से एक स्कूल में पीने के पानी की भी सुविधा नहीं है। वहीं, दस में से तीन स्कूलों में शौचालय तक की सुविधा नहीं है। जबकि आधे स्कूलों में खेल के मैदान भी नहीं हैं।

32 छात्रों पर एक शिक्षक

सर्वे के मुताबिक स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। शिक्षकों की हायर सेकंडरी स्तर पर 34 फीसदी और गांवों के हायर सेकंडरी स्कूलों में 50 फीसदी की दर से बढ़े हैं। नतीजतन, छात्र शिक्षक अनुपात प्राइमरी स्कूलों में 42: 1 से कम होकर 32:1 हो गया है। जबकि 40 फीसदी प्राइमरी स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए दो शिक्षक ही मौजूद हैं (सा.दै.भा)। 

 

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