Saturday, September 4, 2021

क्या यूपी में फिर जलेगी आरक्षण की आग ?

resizedimage (1)लखनऊ ।। (दैनिक दुनिया न्यूज़ नेटवर्क) । प्रदेश में सत्ता रूढ़ समाजवादी पार्टी आगामी 16 फरवरी को लखनऊ में कार्यकर्ता सम्मेलन कर 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने की मांग को हवा देना चाहती है। ख़बरों की माने तो समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय विक्रमादित्य मार्ग पर होने वाले सम्मेलन में मुलायम सिंह यादव भी शामिल होंगे। मुलायम सिंह यादव के शामिल होने की ख़बरों के बाद से सम्मेलन में होने वाले फैसलों को मीडिया और सियासी दलों में कई तरह की प्रतिक्रिया आ रही है।

सम्मेलन के संयोजक विधायक गायित्री प्रसाद प्रजापति की माने तो सपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में 17 पिछड़ी जातियों राजभर, निषाद, मल्लाह, कहार, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिन्द, प्रजापति, धीवर, भर, केवट, बाथम, मछुआ,तुरहा, माझी, गौड़ को अनुसूचित जाति में शामिल कराने का वायदा किया था। इनको अनुसूचित जाति की सुविधाओं का हकदार मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में 10 अक्टूबर, 2005 को अधिसूचना जारी कर बना या था, परन्तु 2007 में बसपा सरकार ने इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति को प्राप्त होने वाली सुविधाएं समाप्त कर दी थी।

resizedimageआरक्षण बचाओं संघर्ष समिति (एबीएसएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी सिंह ने इसे संविधान का उल्लंघन बताया है । आरपी सिंह का कहना है कि भारत में अभी भी कुछ ऐसी जातियां हैं जिनको अनुसूचित सूची में शामिल किया जाए क्यों कि संविधान में अनुसूचित जाति, जनजाति  और पिछड़ों का स्पष्ट उल्लेख है । ऐसा तब किया जा सकता है जब उसी अनुपात में अरक्षण का दायरा भी बढ़ाया जाए।

 

 

भाजपा नेता उमा भारती ने कहा है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ही जातीय वोट बैंकों की राजनीति करते हैं । इससे प्रदेश का भला नहीं होगा।

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