Tuesday, September 7, 2021

क्या है दुनिया का सच ?

resizedimage (12)दुनिया का सच है कि ताकतवर के आगे सब दंडवत होते हैं। आज यही स्थिति चीन की है। भारत के मामूली पड़ोसी देश (मालदीव और सेसेल्स द्वीप) भी भारत को आंख दिखाते हैं। नेपाल तो पूरी तरह चीन की गोद में है। तिब्बत की ऊंचाई पर अब चीन सुपरहाइवे बना रहा है। इधर भारतीय सड़कें मैदानी इलाकों में भी दुर्दिन में हैं। यहां बिजली की खराब हालत है। इन्फ्रास्ट्रक्चर जर्जर हैं। क्योंकि सरकारें सिर्फ गद्दी बचाने में लगी हैं। –

 

अब राजनीति और जनता, आगे बढ़ गये हैं। देश पीछे छूट गया है। देश के हालात, अब राष्ट्रीय मुद्दे नहीं बनते। न मुल्क को बेचैन करते हैं। देशप्रेम की बात पुरातनपंथी है। अप्रगतिशील और पिछड़े मानस की पहचान। राष्ट्रीय मुद्दे क्या हैं? राहुल गांधी या नरेंद्र मोदी? अपनी सत्ता, अपना स्वार्थ, अपने को महानतम सिद्ध करने की होड़? बाजार के भोग में डूबे युवा वर्ग के बीच फैशन, फ्रेंडशिप वगैरह पर फेसबुक पर होते विवाद। इन सबके बीच भारत मुल्क कहां खड़ा है? उसका भविष्य क्या है?

इसी सप्ताह की खबर है। चीन, भारत को चौतरफा घेर चुका है। पाकिस्तान ने एक फरवरी को ग्वादर पोर्ट (बंदरगाह) को बनाने और विकसित करने का काम चीन को सौंप दिया है। पाकिस्तान की इच्छा है कि चीन इस बंदरगाह को नौसैनिक अड्डा भी बना दे।

पाकिस्तान ने इस काम के लिए तय कुल 1331 करोड़ रुपये के 75 फीसदी का भुगतान भी चीन को कर दिया है। मालदीव के मराओ में चीन उपस्थित है। 1991 में मालदीव ने इस द्वीप को चीन को लीज पर दिया। श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर चीन मौजूद है। डीप-वाटर पोर्ट बनाने का काम लेकर। भारत के रणनीतिक हिसाब से यह बंदरगाह बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के मालवाहक जहाज और नौसेना के जहाज भी इधर से गुजरते हैं। बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह में चीन मौजूद है। उसने बांग्लादेश को चटगांव पोर्ट के विस्तार के लिए लगभग 47,000 करोड़ रुपये की मदद की है। चीनी नौसेना के लड़ाकू जहाज यहां आते हैं। इस बंदरगाह से बांग्लादेश का 90 फीसदी व्यापार होता है।

म्यामांर (बर्मा) के शीतबे बंदरगाह का अलग सितम है। इसे एक भारतीय कंपनी ने लगभग साढ़े छह सौ करोड़ रुपये में तैयार किया। पर इस बंदरगाह से ज्यादा लाभ चीन ले रहा है। नेपाल में चीन की उपस्थिति अलग है। जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल तक चीन, भारतीय सीमा पर तीन तरह से उपस्थित है। अच्छी, मजबूत और चौड़ी सड़कें बना कर। कई हवाई अड्डे बना कर। कई जगहों पर रेल लाइनें बिछा कर।

अब चीन, भारत की सेना की हर कोशिश विफल करने की स्थिति में है। वह हवाई मार्ग और समुद्र मार्ग से 70 हजार चीनी सैनिकों को एक पहल पर, एक जगह जुटा सकता है और भारत? सिर्फ समुद्री रास्ते महज तीन हजार सैनिकों को एक पहल में एकजुट कर सकता है। यानी 70 हजार बनाम तीन हजार का मुकाबला?

पिछले सप्ताह ही चीन ने अपने वाई-20 वायुयान का परीक्षण किया है। देश में ही बना वायुयान। 66 टन भार ढोनेवाला। इस तरह चीन, तीस हजार सैनिकों को अपने हवाई बेड़े से ढो सकता है। साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ सड़कें और हवाई अड्डे, भारत-चीन सीमा पर चीन ने बना दिये हैं। आज चीन इस उपमहाद्वीप में एकमात्र निर्णायक हैसियत (गेम चेंजर) है।

रूस ने अपना मालवाहक आइएल-76 जहाज चीन को नहीं दिया, चीन ने इसके जवाब में वाई-20 तैयार कर लिया। चीन बारह बड़े जलपोतों का निर्माण कर रहा है। बीस हजार टन से अधिक भार के, जो सेना के तीन डिविजनों यानी तीस हजार सैनिकों को ढो सकते हैं। इससे भारत अपने ही समुद्री क्षेत्र में चीन से मात खा जायेगा। इनके अलावा चीन ने दो लैंडिंग प्लेटफार्म डाक्स भी भारतीय समुद्री इलाके में लगाये हैं, जिनमें दस हजार सैनिक, टैंक और लड़ाई के हेलीकाप्टर रह सकते हैं। इन सबके मुकाबले भारत के पास महज एक जहाज है, आइएनएस जलाश्व। यह जहाज महज तीन हजार सैनिकों को ढो सकता है। यह भी अमेरिका से खरीदा गया है।

भारतीय सीमा में लद्दाख और अरुणाचल के क्षेत्र में खराब नेटवर्क, सड़कों का न होना, अलग गंभीर मुद्दे हैं। चीन की लगातार तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था, नौसेना और वायुसेना की मारक क्षमता में स्तब्धकारी विस्तार भारत के लिए शुभ नहीं है। भारतीय समुद्र में स्थित मालदीव और सेसेल्स द्वीप जैसे देशों से चीन ने प्रगाढ़ रिश्ते बना लिये हैं। अब ये छोटे द्वीप भी भारत को आंख दिखा रहे हैं। आज चीन समुद्री जहाज बनाने में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। क्षमता और विस्तार के हिसाब से। अब भारत को भारतीय समुद्र में ही चीन ने घेर लिया है। घर में ही भारत घिर चुका है।

न्यूयार्क टाइम्स में हाल में छपे एक लेख में स्टीवन रैटनर ने भारत और चीन की तुलना की है। काफी खोज और परिश्रम के बाद रैटनर का निष्कर्ष है कि हर मापदंड पर भारत, चीन से बहुत पीछे है। चीन ने 21 वीं शताब्दी में छलांग लगा ली है। झपट कर आगे बढ़ गया है। पर भारत अब भी 21 वीं सदी में घुसने में ही पछाड़ खा रहा है। लंगड़ा और लड़खड़ा रहा है। भाव है कि एक चीते की तरह छलांग लगा चुका है, दूसरा कछुए की चाल में भी नहीं है। (सा.प्र.ख़)

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