Saturday, September 4, 2021

जानिए कितने ‘सेक्सिस्ट’ हैं हमारे नेता ?

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“हम में से किसने पीछा नहीं किया है। और जब महिला से बात करनी होती है तब पहल महिला नहीं करती है, पहल तो हमें ही करना होता है। कोशिश तो हमें ही करनी पड़ती है। प्यार से बताना पढ़ता है, यह पूरे देश का किस्सा है। हमने खुद अनुभव किया है।

आखिर क्या वजह है देश के नेता महिलाओं के बारे में ऐसी सोच रखते है ? जनता दल (यू) के नेता शरद यादव ने जब लोक सभा में कहा कि हम सभी महिलाओं का पीछा करते हैं तो सारा देश चौंक गया। चौंकाने वाली बात इसलिए भी क्योंकि यह बात उन्होंने  बलात्कार विरोधी बिल पर मंगलवार को हो रही बहस में कही। लेकिन यह पहला मौका नहीं है कि भारत के किसी नेता ने कोई ऐसी बात कही हो जिसमें महिलाओं के प्रति इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया हो जिसमें उनकी पितृसत्तात्मक सोच साफ झलकती हो।

आखिर क्या वजह है देश के नेता महिलाओं के बारे में ऐसी सोच रखते है?

शरद यादव ने कहा था, “हम में से किसने पीछा नहीं किया है। और जब महिला से बात करनी होती है तब पहल महिला नहीं करती है, पहल तो हमें ही करना होता है। कोशिश तो हमें ही करनी पड़ती है। प्यार से बताना पढ़ता है, यह पूरे देश का किस्सा है। हमने खुद अनुभव किया है। हम सब लोग उस दौर से गुजरे हैं, उसको ऐसे मत भूलो।”

“एक तरह से उन्होंने स्टॉकिंग की प्रेम मोहब्बत से तुलना की और बहस की संजीदगी को हल्का किया और स्टॉकिंग कि निंदा करने की जगह उसको बढ़ावा दिया।”

क्या कहती हैं कविता कृष्णनन

महिलाओं के हित के लिए काम करने वाली संस्था ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णनन कहती हैं, ”एक तरह से उन्होंने स्टॉकिंग की प्रेम मोहब्बत से तुलना की और बहस की संजीदगी को हल्का किया और स्टॉकिंग कि निंदा करने की जगह उसको बढ़ावा दिया। हम जानते हैं कि स्टॉकिंग की वजह से कई लड़कियां एसिड अटैक का शिकार हुई हैं।”

कैसे-कैसे बयान !

आपको शायद याद होगा जब कांग्रेस सांसद संजय निरुपम ने बीजेपी सांसद स्मृति इरानी को कहा था, ”आप तो टीवी पे ठुमके लगाती थी। आज चुनावी विश्लेषक बन गईं।”

जिन दिनों सारा देश दिल्ली के 16 दिसंबर को हुए गैंगरेप को लेकर गुस्से में था और महिलाएं प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आई थी तब कांग्रेस के सांसद और राष्ट्रपति के पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने उनके बारे में कहा था कि वे ”डेंटिड पेंटिड महिलाएं” हैं जो डिस्को में जाती हैं और फिर इंडिया गेट पर।

गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर के बारे में कहा था, ”वाह! क्या गर्ल फ्रेंड है। क्या आपने 50 करोड़ रुपए की गर्लफ्रेंड देखी है।”

नरेन्द्र मोदी भी अपने बयानों की वजह से विवाद में रहे हैं।

आरएसएस के मोहन भागवत के उस बयान को कौन भूल सकता है जब उन्होंने कहा था कि यौन अपराध इंडिया में होते हैं भारत में नहीं और इसके लिए पश्चिमी सभ्यता को दोषी ठहराया था।

कांग्रेस के दिगविजय सिंह ने ट्वीट किया था कि, अरविंद केजरीवाल राखी सावंत की तरह हैं। दोनों प्रयास करते हैं और बिना ‘सबस्टांस’ के ‘एक्सपोस’ करते हैं।

पुरुषवादी सोच’

कविता कृष्णनन का मानना है कि, ”एक तरफ यह सब राजनीतिक लोग जो बिना सोच समझकर बयान नहीं दे रहे हैं। एक तरफ वे लोग हैं जो महिलाओं की बराबरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो एक तरफ इन लोगों का राजनीतिक संघर्ष है जो पुरुषवादी सोच या पितृसत्तात्मकता को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।”

कविता का कहना है, ”ऐसे भाषण दे कर यह लोग दिखा रहे हैं कि संसद के अंदर ऐसी सोच रखने वालों के पैर मज़बूत हैं।”

प्रगतिशील महिला परिषद की दिल्ली इकाई की महासचिव पूनम कौशिक का कहना है, ”शरद यादव का बयान साबित करता है कि हमारे नुमाइंदे महिलाओं के प्रति किस तरह की सोच रखते हैं। दुख की बात यह है कि ऐसी सोच रखने वाले ही नीति निर्धारित करते हैं कि महिलाओं के साथ छेड़ छाड़ करने वालों पर क्या कार्रवाई की जाए।”

उनके मुताबिक, ”ऐसी टिप्पणियों के बावजूद भी इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। बस यह लोग यह कह कर निकल जाते हैं कि मीडिया में उनकी बात को तोड़ मरोड़ के पेश किया गया।”

(साभार-बीबीसी)

 

 

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