Friday, September 3, 2021

जानिए लखनऊ महापौर को किसने दिया झटका ?

0लखनऊ । प्रदेश सरकार ने महापौरों के एक और अधिकार को छीन लिया है। अब नगर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले महापौर के न चाहने पर भी हो सकेंगे। तबादले में महापौर किसी तरह का दखल नहीं दे सकेंगे।

दरअसल, नगर निगम में तैनात अधिकारियों व तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों का एक विभाग से दूसरे विभाग या अनुभाग में तबादला करने से पहले अभी महापौर का अनुमोदन लेना जरूरी है। इस संबंध में 17 अप्रैल 1997 का शासनादेश है। मौजूदा अखिलेश सरकार का मानना है कि उक्त व्यवस्था के चलते एक ही पटल पर लंबे समय तक नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने से उनकी कार्य कुशलता में शिथिलता आई है। पटल परिवर्तन में महापौर का अनुमोदन हासिल करने में नगर आयुक्तों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है जिससे तबादले में अनावश्यक विलंब होता है।

उक्त को देखते हुए वर्ष 1997 के शासनादेश की व्यवस्था को समाप्त करने हुए नया शासनादेश जारी किया गया है। नगर विकास विभाग के सभी नगर आयुक्तों को जारी शासनादेश के मुताबिक अब निगम अधिकारियों व तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एक विभाग या अनुभाग से दूसरे में स्थानांतरित करने के लिए नगर आयुक्त ही सक्षम होंगे। ऐसे मामलों में उन्हें महापौर के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।

राज्य सरकार द्वारा एक और अधिकार समाप्त किए जाने पर उत्तर प्रदेश मेयर काउंसिल के अध्यक्ष व लखनऊ के मेयर डाक्टर दिनेश शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महापौरों के अधिकारों में लगातार कटौती की जा रही है। उन्होंने बताया कि महापौरों की समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री समय भी नहीं दे रहे हैं। डाक्टर शर्मा ने बताया कि जल्द ही उक्त के संबंध में मेयर काउंसिल की बैठक बुलायी जाएगी।

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