Thursday, September 9, 2021

जौनपुर की जमीन से केपी को चाहती है सपा, विरोधी हो रहे लामबंद

 

photoलखनऊ. समाजवादी पार्टी भले ही लोकसभा में पांच सीट पर सिमट कर रह गई है, लेकिन पार्टी में आंतरिक विरोध पर लगाम लगाने में मुलायम सिंह यादव नाकाम हैं। जौनपुर के दिग्गज सपा नेता केपी यादव को पार्टी में एक बार फिर से शामिल करने को लेकर यूपी सरकार के एक बड़े नेता ने लोगों को लामबंद करना शुरू कर दिया है। यह भी खबर है कि उन्हें डर है कि केपी के पार्टी में आने से उनकी सपा में साख कम हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, डॉ. केपी यादव मुलायम सिंह के करीबी माने जाते हैं। उन्हें 2014 में जौनपुर से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया था, लेकिन बाद में पारस नाथ यादव को टिकट दे दिया गया। हालांकि वह भी चुनाव हार गए थे। पार्टी ने उस समय यह फैसला यह कहते हुए लिया था कि पारसनाथ यादव की लोकल पालिटिक्स पर पकड़ है। वह केपी से अच्छे उम्मीदवार हैं, लेकिन चुनाव हारने के बाद पार्टी को हकीकत पता चल गई।

यह भी कहा जाता है कि पारसनाथ यादव यहां पर अपने बेटे लकी यादव के लिए लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को नहीं, उन्हें ही टिकट दिया। पारसनाथ छह बार एमएलए और दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वह इस समय यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

केपी यादव की पार्टी में वापसी से पार्टी जहां 2017 का विधानसभा चुनाव देख रही है वहीं पार्टी के कुछ नेता व्यक्तिगत स्वार्थों को देखते हुए लोगों को गोल बंद करने में जुटे हैं। केपी यादव लोकसभा का टिकट सपा से काटे जाने के बाद आम आदमी पार्टी में चले गए थे। उनकी फिर से सपा में वापसी की खबरें तेज हो गईं हैं।

दैनिक दुनिया से क्या कहते हैं डॉ. केपी यादव

दैनिक दुनिया संवाददाता अरविंद यादव से बातचीत में डॉ. केपी यादव ने बताया कि जल्द ही वह सपा में वापस आ जाएंगे, सपा उनका पुराना घर है। लोगों ने साजिश कर उन्हें बाहर करवा दिया था। पार्टी नेतृत्व का विश्वास उनके ऊपर बना हुआ है, यह बड़ी बात है। वह नेता मुलायम सिंह यादव के विचारों से हमेशा प्रभावित रहे हैं। पार्टी में वापसी से उनके विरोधियों को परेशानी हो रही है।

फाइल फोटोः डॉ. केपी यादव।