Tuesday, September 7, 2021

तहलका में ख़बर के नाम पर विज्ञापन, पेज नंबर भी गायब

large_1लखनऊ।।अखिलेश कृष्ण मोहन।। नेताओं और घपलेबाजों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाली तहलका पत्रिका ने 31 मार्च के अंक में विज्ञापन को ही ख़बर के शक्ल में परोस दिया। 10 रुपए में हक़ीक़त दिखाने वाली पत्रिका के प्रबंधकों ने पेज नंबर इकतीस के बाद सीधे पेज नंबर अड़तीस दिखा दिया और बीच में छह पेजों पर विज्ञापन घुसेड़ दिया। इतना ही नहीं पता नहीं कैसे विज्ञापन वाले पृष्टों पर कहीं भी पेज नंबर अंकित नहीं है। पत्रिका की पॉलिसी भी देख लीजिए कवर स्टोरी है ‘चौपट राजकुमार’ यानी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यूपी का चौपट राजकुमार बता रहे हैं और पत्रिका अखिलेश सरकार की उपलब्धियों के विज्ञापन से पटी है।

विज्ञापन वाले पृष्टों पर प्रचार-समाचार लिखा है। अब ये तो तहलका के पत्रकार ही बता सकते हैं कि प्रचार-समाचार, पेड न्यूज़ और इस तरह के छुपे विज्ञापन का अर्थ क्या होता है। छह पृष्ठों वाले विज्ञापन कथा के पहले पृष्ठ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आर्थिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्ध और विज्ञापन कथा के दूसरे पेज पर 27 से 29 जनवरी को आगरा में हुआ ग्लोबल पार्टनरशिप सम्मिट के दौरान मुख्य नीतियों का अनावरण करते हुए मुख्यमंत्री को दिखाया गया है, ख़बर का मजमून किसी विज्ञापन से कम नहीं है और दूसरे ही पेज पर अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव को बिलगेट्स की पत्नी मिलिंडा गेट्स से हाथ मिलाते दिखाया गया है। ये नहीं बताया गया है कि ये मुलाकात कब और कहां हुई। विज्ञापन कथा के पेज नंबर तीन पर उत्तर प्रदेश उभरती हुई आर्थिक शक्ति के नाम से पेज दिया गया है। इसमें आगरा का हाईवे और यूपी सरकार के जनता दर्शन को तस्वीर में दिखाया गया है। विज्ञापन कथा पेज नंबर चार पर भी एम्बुलेंस दिखाई गई है जो 108 वाले विज्ञापन को प्रदर्शित करती है। इसी पेज पर दो चिमनी वाला कारखाना दिखाया गया है लेकिन कारखाने में क्या बनता है यह कहीं नहीं लिखा है।

विज्ञापन कथा पेज नंबर पांच पर चलते हैं। यहां तो साक्षात् मुलायम सिंह ही मौजूद हैं, सीएम अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह कन्या विद्या धन चेक का वितरण कर रहे हैं। (ख़बर के शब्दों से आप समझ सकते हैं कि ये क्या है।) यहां भी उत्तर प्रदेश उभरती हुई आर्थिक शक्ति दिखाया गया है। इसी पेज पर आपको शिवपाल यादव जी कुछ करीबी मंत्रियों और सीएम के साथ कुछ ई-गवर्नेंस द्वारा कई जनोपयोगी सेवाओं की शुरूआत कर रहे हैं लेकिन ये तस्वीर एक अगस्त 2012 की है। इसी तस्वीर के पीछे लगा पोस्टर ये सरकार और विज्ञापन छापने वालों की पोल खोल रहा है लेकिन ये समझ में नहीं आ रहा है कि तहलका ये सब कुछ अब क्यों छाप रहा है, जो कई महीनों पहले हो चुका है। और विज्ञापन कथा पेज नंबर छह क्या है ये हमारे समझ से परे है लेकिन इतना स्पष्ट है कि ये विज्ञापन से अलग कुछ हो ही नहीं सकता। जी  हाँ ,यही है तहलका की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता। 

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