Saturday, September 4, 2021

तीसरी पारी के लिए तैयार हैं मनमोहन

pmप्रधानमंत्री के विशेष विमान से (सा.दै.जा.) ।। गठबंधन के झटकों से हिचकोले खा रही संप्रग सरकार की स्थिरता को लेकर चाहे जितना संशय हो, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी सरकार के कार्यकाल को लेकर पूरा भरोसा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि गठबंधन की सियासी मजबूरियों के बावजूद उनकी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। मौका मिलने पर प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी तीसरी पारी के सवाल को उन्होंने आने वाले वक्त पर छोड़कर सियासी पंडितों को कयास लगाने के लिए संकेत भी छोड़ दिए।

डरबन में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से लौटते हुए अपने विशेष विमान में जब प्रधानमंत्री से पूछा गया कि अगर 2014 के चुनाव में मौका आने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी तीसरी बार आपको प्रधानमंत्री बनने को कहती है तो क्या आप इसे स्वीकार करेंगे? उन्होने इस सवाल को टालते हुए कहा ‘अभी इन सवालों का कोई मतलब नहीं है। अभी ये सब वास्तविकता से परे हैं।’ आजादी के बाद लगातार करीब दस साल तक सत्ता की बागडोर संभालने वाले मनमोहन सिंह पंडित नेहरू के बाद दूसरे प्रधानमंत्री हैं। उनसे जब यह सवाल किया गया कि दुनिया भर में कई नेताओं ने 80 साल की उम्र पूरी करने के बाद भी कई मुकाम छुए हैं और क्या आपमें भी उतनी ऊर्जा और इच्छाशक्ति बरकरार है जो आपको और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है तो प्रधानमंत्री ने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा, ‘मैंने पूरी ईमानदारी और लगन से देश की सेवा की है। मैं इसमें कामयाब रहा या नहीं, इसका फैसला देश की जनता करेगी।’

प्रधानमंत्री ने बेहद सहजता के साथ हर उस मुश्किल सवाल का जवाब दिया जो इस वक्त सत्ता के गलियारों में सरकार की स्थिरता को लेकर उठ रहा है। अस्थिरता के इस दौर में मुलायम सिंह द्वारा समर्थन वापस लेने की आशंकाओं पर प्रधानमंत्री ने कहा ‘निश्चित तौर पर गठबंधन सरकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई बार ऐसा आभास होता है कि यह गठबंधन बहुत स्थिर नहीं है। मैं इस बात से इन्कार नहीं करता कि हमारे साथ ऐसा नहीं है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी और अगले लोकसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे।’

प्रधानमंत्री ने सीधे शब्दों में इस बात से इन्कार किया कि उनकी अगुआई में कांग्रेस पार्टी अपने सहयोगियों को एक साथ जोड़ पाने में नाकाम हो रही है। उनका कहना था ‘मैं ऐसा नहीं समझता। जैसा मैंने कहा कि गठबंधन की कुछ मजबूरियां होती हैं और हम उनसे मुंह नहीं मोड़ सकते।’ उन्होंने जोड़ा कि हम गठबंधन की इन मजबूरियों के चलते न तो आर्थिक सुधारों की रफ्तार धीमी पड़ने देंगे और न ही शासन के कामकाज पर असर पड़ने देंगे। प्रधानमंत्री के मुताबिक हमारे पास कुछ आर्थिक सुधारों को संसद से पारित कराने के लिए बहुमत नहीं है। ऐसे में हम निश्चित तौर पर अपने सहयोगियों के भरोसे हैं।(सा.दै.जा)

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