Friday, September 3, 2021

पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के विरोध को लेकर कहा…

देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को लेकर छिड़ी चर्चा और विपक्षी दलों के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समिति बनाकर इसके हर पहलू पर समयबद्ध रूप से चर्चा कराने का आश्वासन दिया है।

बैठक के जरिए यह जरूर संकेत दे दिया गया है कि पहली बार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक के बाद इस मुद्दे को सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। बैठक का कांग्रेस समेत तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा, द्रमुक जैसे कई दलों ने बहिष्कार किया। जबकि राजग के सहयोगी दलों के साथ-साथ विपक्ष से राकांपा, बीजद और वाम दल बैठक में शामिल हुए।

बुधवार को पांच मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी जिसमें 21 दल शामिल हुए। इन पांच मु्द्दों में एक साथ चुनाव के साथ-साथ, संसद की उत्पादकता बढ़ाने, स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर न्यू इंडिया के निर्माण और पिछड़े हुए आकांक्षी जिलों के विकास पर चर्चा शामिल थी, लेकिन कांग्रेस समेत कई दलों ने इस बैठक से दूरी बना ली। कांग्रेस ने इसे ध्यान भटकाने का जरिया बताया तो तृणमूल ने श्वेत पत्र की मांग की। बैठक का संचालन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।

बताते हैं कि एक साथ चुनाव को लेकर बैठक में शामिल अधिकतर दलों ने व्यापक विचार-विमर्श की बात की। हालांकि भाजपा समेत कई दलों का मानना था कि एक साथ चुनाव समय की मांग है और देश को एक बार फिर से इस दिशा में बढ़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय मुद्दा है और इसे किसी एक दल का एजेंडा नहीं माना जाना चाहिए। सभी दलों के विचार को शामिल किया जाएगा। बैठक में मौजूद सभी दलों के विचार को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कमेटी गठित करने की बात कही और सबने सहमति जताई।

गौरतलब है कि एक साथ चुनाव भाजपा के एजेंडे में टॉप पर है और इसे चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री 2014 से ही लगातार इस बाबत अपील करते रहे हैं जबकि तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव आयोग को भी पत्र लिखकर इस दिशा में अपनी राय जताई थी। जाहिर है कि इस बाबत कई संविधान संशोधन भी करने होंगे और उससे पहले एक राय बनानी होगी क्योंकि कई राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को खत्म करना होगा।

बहरहाल जहां तक राजनीतिक दलों की बात है सबसे चौंकाने वाला फैसला कांग्रेस का रहा है, जिसने अंतिम समय में बैठक में न जाने का ऐलान किया। हालांकि इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, बसपा प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस बैठक में नहीं शामिल हुए है।

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री की ओर से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर बुलाई गई पर बैठक पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। सरकार यदि इस मुद्दे पर वाकई गंभीर है, तो उन्हें इस मुद्दे पर संसद के अंदर चर्चा करानी चाहिए।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ अभी संभव नहीं : चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने कहा है कि फिलहाल ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लागू करना संभव नहीं है। चुनाव आयोग के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि अगर ऐसा संभव होता तो आयोग इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनावों के साथ ही करा लेता। लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की जरूरत होगी। जबकि, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संख्या सीमित है। सूत्रों ने यह भी कहा कि देश में इस समय 90 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। इनके लिए बड़ी संख्या में मतदान अधिकारी, ईवीएम और अन्य संसाधनों की जरूरत होगी, जिसे जुटा पाना फिलहाल संभव नहीं है।

विधि आयोग एक साथ चुनाव कराने के लिए सख्त कानूनी ढांचा के पक्ष में

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सरकार की राय के बीच विधि आयोग ने इस तरह की विशाल कवायद के लिए सख्त कानूनी ढांचे की सिफारिश की है। आयोग ने पिछले साल अगस्त में की गई मसौदा सिफारिशों में संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन की बात की थी ताकि एक साथ चुनाव सुनिश्चित हो सकें। आयोग ने सिफारिश की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव दो चरणों में कराए जा सकते है बशर्ते संविधान के कम से कम दो प्रावधानों में संशोधन किए जाएं और बहुमत से राज्यों द्वारा उनका अनुमोदन किया जाए।