Wednesday, September 1, 2021

पेड न्यूज़ पर निर्वाचन आयोग सख्त

HHलखनऊ ।।अखिलेश कृष्ण मोहन।। हम जागरुक मतदाता हैं। भारत के भाग्यविधाता हैंजन-जन की यही पुकार वोट डालो अबकी बारऐसे स्लोगन अब चुनाव आयोग मतदाताओं को बूथ पर लाने के लिए गढ़ रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मतदाताओं का जागरुक होना जरूरी है और इस जागरुकता से बेहतर उम्मीदवार का चयन होता है। उचित और सही उम्मीदवार के चयन को निर्धारित करने के लिए निर्वाचन आयोग पेड न्यूज़ पर पाबंदी लगाने की कोशिश में लगा है। लखनऊ के योजना भवन में 12 फरवरी को पत्रकारों के साथ हुई कार्यशाला में हर मुद्दे की चुनौतियों पर आयोग के महानिदेशक अक्षय राऊत ने विस्तार से चर्चा की। आम चुनाव से पहले ही निर्वाचन आयोग को पेड न्यूज़ की चिंता सताने लगी है। यही वजह है कि लखनऊ के योजना भवन में मीडिया कर्मियों के साथ चुनाव आयोग के महानिदेशक ने कार्यशाला कर हर मुद्दे पर मीडिया से भी सहयोग की अपील की।

चुनाव आयोग का कहना है कि वह कुछ भी नया नहीं कर रहा है केवल पीसीआई (प्रेस काऊंसिल ऑफ इंडिया) की गाइडलाइंस को ही लागू करने की कोशिश की जा रही है जिससे मतदाताओं को गलत या भ्रामक संदेश न दिया जा सके, वोटरों को चुनाव से पहले लुभाया न जा सके। चुनाव के दौरान और उसके 48 घंटे पहले से ही मीडिया कवरेज को लेकर आयोग इस कदर गंभीर है इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वह पीसीआई से भी इस बारे में पूरी तरह वार्ता करने के बाद ही यह कदम उठा रहा है। इस बार आम चुनाव में पेड न्यूज़ को लेकर फंफूदी की तरह उग रहे नेताओं के समाचार पत्रों या उगाही के मकसद से संचालित किए जा रहे इलेक्ट्रोनिक मीडिया संगठनों पर भी आयोग निगरानी रखेगा। आयोग के महानिदेशक अक्षय राऊत का कहना है कि पेड न्यूज़ को रोकने को लेकर धारा 127 ए के तहत आयोग अब किसी भी ऐसे पोस्टर या पर्चा छपवाने पर कार्रवाई करेगा, जिसमें पोस्टर छपवाने वाले का नाम या संगठन का पूरा विवरण न हो। आयोग का मानना है कि ऐसा चुनाव में किसी भी ख़बर को लेकर गलत संदेश न जाए, सांप्रदायिक उन्माद न फैले इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं चुनाव से पहले हर मीडिया संस्थान और पत्रकारों को अब आयोग मीडिया हैण्डबुक देने की योजना भी तैयार कर रहा है जिसमें चुनाव कवरेज की पूरी जानकारी होगी। चुनाव आयोग सोशल मीडिया पर भी नजर रखेगा और कार्रवाई भी करेगा, लेकिन कहीकत में यह आयोग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है इसे निर्वाचन आयोग भी मान रहा है।

चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव से 48 घंटे पहले ऐसी ख़बरों पर लगाम लगना ही चाहिए जिससे मतदाताओं को प्रभावित या प्रलोभित किया जा रहा हो। यही वजह है कि चुनाव के 48 घंटे के दौरान वह जीत रहे हैं, वह आगे चल रहे हैं और वह हार रहे हैं जैसी ख़बरें सेक्शन 126 बी आरपी एक्ट के तहत प्रतिबंधित रहेंगी और प्रसारित करने वालों पर कार्रवाई होगी। हालांकि आयोग का यह भी कहना है कि पेड न्यूज़ की परिभाषा को हमें समझना होगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि ऐसी ख़बरों पर लोकसभा उम्मीदवारों पर ही कार्रवाई करेगा न कि पार्टी पर। आयोग की मानें तो पेड न्यूज़ का एंगल कंडीडेट ही होता है लिहाजा उसी पर कार्रवाई होनी भी चाहिए।  

चुनाव आयोग पेड न्यूज़ को रोकने की मुहिम भी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन्स के अनुसार ही चला रहा है लिहाजा इसका पालन भी मीडिया संस्थानों को करना ही होगा। लेकिन पेड न्यूज़ के दायरे में कौन सी ख़बर आती है और उस पर कार्रवाई में कितना समय लगता है यह सबसे बड़ी चुनौती है । आयोग पेड न्यूज़ रोकने की मुहिम तो हकीकत में चला रहा है लेकिन उसके पास इससे निपटने का कोई कारगर हथियार अभी नहीं है। वह केवल उम्मीदवार से विज्ञापन के हिसाब से शुल्क वसूल सकता है कोई जरूरी कारगर कार्रवाई नहीं कर सकता।

आम चुनाव लड़ने जा रहे हैं तो जान लें

चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की लिखित उम्र 25 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। आपको कभी भी कानून की किसी प्रक्रिया के अन्तर्गत निर्वाचन लड़ने लिए अयोग्य घोषित किया गया है तो आप चुनाव नहीं लड़ सकते। कोई भी देश का नागरिक दो तरीके से चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। पहला वह किसी पार्टी के टिकट पर और दूसरा स्वतंत्र रूप से, लेकिन किसी मान्यता प्राप्त पार्टी से चुनाव लड़ने पर उसे केवल एक प्रस्तावक की जरूरत होगी जबकि जो राजनीतिक दल मान्यता प्राप्त नहीं हैं उनके टिकट पर या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को नॉमिनेशन के लिए 10 प्रस्तवाकों का होना जरूरी है। प्रस्तावक एक से अधिक उम्मीदवारों का भी प्रस्तावक भी हो सकता है।  

नॉमिनेशन के लिए जरूरी दस्तावेज

लोकसभा चुनावों के हर सामान्य उम्मीदवार के लिए चाहे वह किसी पार्टी से लड़ रहा हो या स्वतंत्र रूप से उसे पच्चीस हजार रुपए की जमानत राशि जमा करनी होगी। जबकि विधानसभा चुनाव में जमानत राशि दस हजार रुपए है। अनुसूचित जाति या जनजाति के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित जमानत राशि की केवल आधी धनराशि ही जमा करनी होती है। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को निर्धारित प्रपत्र पर एक शपथ भी देना होता है जो उम्मीदवार के दस्तावेज के साथ संलग्न कर दिया जाता है। अब सवाल उठता है कि उम्मीदवार की जमानत राशि का क्या होता है । तो इसके बारे में स्पष्ट नियम है यदि उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है तो उसे जमानत राशि वापस कर दी जाती है हारने के बाद भी यदि उम्मीदवार चुनाव नहीं जीतता है और उसे कुल वैध मतों का 1/6 मत या उससे अधिक मिलता है तो भी जमानत राशि वापस कर दी जाती है। नॉमिनेशन रद्द होने या निर्धारित समय में उम्मीदवारी वापस लेने पर भी निर्वाचन आयोग जमानत राशि को वापस कर देता है।

उम्मीदवार कितना ख़र्च कर सकता है

निर्वाचन आयोग के अनुसार एक उम्मीदवार की लोकसभा चुनाव में ख़र्च की अधिकतम सीमा 40 हजार रुपए है। विधानसभा चुनाव के लिए यही सीमा 16 हजार रुपए आयोग ने निर्धारित की है। आयोग चुनावी ख़र्च की निगरानी को लेकर हर जिले में एक केंद्रीय टीम के गठन को ही हरीझंड़ी दे दी है, स्वंसेवी संगठन के साथ साथ जिले का डीएम भी टीम का हिस्सा होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी का टोल फ्री नंबर 1800-180-1950 सभी लिए चौबीसों घंटे खुला रहेगा। इसके साथ ही आप चुनाव अधिकारियों के कान्टेक्ट नंबर पर भी आसानी से शिकायत या सुझाव दर्ज करवा सकते हैं। शिकायतों पर क्या कार्रवाही हुई इसके बारे में विस्तार से आप कंट्रोल रूम से जानकारी ले सकेंगे।  

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