Tuesday, September 7, 2021

बिजली की दरों में कभी भी हो सकती है बढ़ोतरी

electric_bill1लखनऊ । प्रदेश के लोगों को जल्दी ही महंगी बिजली का झटका लगना तय है। सरकार ने बिजली कंपनियां को घाटे से उबरने के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना को सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया है। सरकार को योजना की शर्तो के तहत बिजली की मौजूदा दर में इजाफा करके उसे आपूर्ति लागत के बराबर करना होगा। कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा राज्यों की विद्युत वितरण कम्पनियों के लिए मंजूर वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) को सिद्धान्त रूप से स्वीकार करते हुए केंन्द्र सरकार को सहमति भेजने का फैसला किया गया। एफआरपी के पुनरीक्षण के लिए प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति में सचिव ऊर्जा व पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक को सदस्य तथा कार्पोरेशन के निदेशक (वित्त) को सदस्य सचिव नामित किया गया है। योजना की देखरेख के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति बनाने का भी फैसला किया गया है। वित्त विभाग के योजना के संबंध में सुझाव भी केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। योजना को लागू करने के लिए एफआरपी में स्पष्ट कार्य योजना एवं सुधार के संबंध में वचनबद्धता को रखा जाएगा।

गौरतलब है कि विद्युत कंपनियां को कर्ज से उबारने वाली उक्त योजना में सुधार की शर्तो के तहत बिजली की मौजूदा दर को तीन से पांच वर्ष में बढ़ाकर आपूर्ति लागत के बराबर करना होगा। सस्ती बिजली के लिए सरकार को बिजली कंपनियों को सब्सिडी देनी होगी। कंपनियों को विद्युत हानि भी घटाना होगा। विदित हो कि वर्तमान में बिजली आपूर्ति की औसत लागत लगभग छह रुपये यूनिट है जबकि घरेलू बिजली ही 1.90 से 3.80 रुपये यूनिट है। ऐसे में सालाना अनिवार्य रूप से बिजली की दरों में इजाफा करके उसे आपूर्ति लागत के बराबर रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि सूबे की बिजली कंपनियां तकरीबन 31 हजार करोड़ रुपये के घाटे में हैं। इन पर लगभग 17 हजार करोड़ रुपये बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्ज लदा है। चूंकि पिछले दिनों औद्योगिक व वाणिज्यिक बिजली के दाम बढ़ाए जा चुके हैं इसलिए अब घरेलू बिजली के ही दाम बढ़ना तय माना जा रहा है।

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