Friday, September 3, 2021

बीजेपी विधानसभा में उठाएगी मुद्दा

resizedimageलखनऊ/मुज़फ्फ़रनगर।।डीडीसी न्यूज़।। भाजपा विधायक संगीत सोम और सुरेश राणा पर रासुका लगाने को लेकर हमलावर रुख अख्तियार करने लगी है। सरकार ने भले ही रासुका हटा लिया है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मुजफ्फरनगर दंगे में आरोपी बनाये गये भाजपा के दोनों विधायकों सुरेश राणा व संगीत सोम से रासुका हटाये जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी पहले से ही रासुका तामील को अवैधानिक बता रही थी। विधायक के नाते उनके विशेषाधिकार का हनन हुआ है। पार्टी विशेषाधिकार हनन का मुद्दा विधानसभा में रखेगी।

प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि रासुका का आरोपपत्र जिस डी.जी.सी ने तैयार किया है, आरोप पत्र को जिस पुलिस कप्तान ने संतुति दी और जिस जिलाधिकारी ने रासुका लगाया है उनको निलंबित करने का प्रकरण विशेषाधिकार हनन के तहत लाया जायेगा। बाजपेयी ने मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान घटी घटनाओं पर प्रेस के माध्यम से  सरकार से कुछ सवाल किए। 7 सितम्बर को पूर्व बलियान व जौली नहर के पास हुए दर्दनाक घटना क्रम में कोई गिरफ्तारी अभी तक क्यों नही हुई ? अपनी बहन की इज्जत को बचाने में बलिदान हुए गौरव-सचिन हत्याकाण्ड के शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी कब होगी ? दंगों के दौरान जलाएं गए ट्रक्टरों जिनकी कीमत लगभग 4 से 6 लाख होती है, का मुआवजा 2500-5000 हजार क्यों ? खेतों में लगी ट्यूबलों को खराब करने वाले व खड़ी गन्ने की फसल को जलाने वालों की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नही हुई ?

 डॉ. बाजपेयी ने उत्तर प्रदेश शासन व मुजफ्फरनगर प्रशासन की कार्यवाही पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि मोहम्मदपुर रायसिंह गांव की घटना में हथियार लेकर आये लोगों ने राजेन्द्र पर हमला किया, पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में गांव वासियों से संघर्ष में उन तीनों की मृत्यु हो गयी। पूरे घटनाक्रम मे गिरफ्तारी भी राजेन्द्र व एक चौरासी साल के वृद्ध की गई। इस घटनाक्रम से स्थानीय स्तर पर जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी विस्फोट का रूप ले सकती है।

डॉ. बाजपेयी ने उत्तर प्रदेश शासन पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि 1800 दंगा पीड़ितों को 5 लाख रुपया मुआवजा देने के शासनादेश में ”मुस्लिम समुदाय” शब्द का प्रयोग किया गया है। दंगों में पीडि़त हिन्दूओं को कोई मुआवजा-सहायता नहीं दिया जा रहा है। धर्म विशेष का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 32 का उल्लंघन है। डॉ. बाजपेयी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब विस्थापितों को पुर्नस्थापित करने के बजाए, 5 लाख मुआवजा पाने वालों से सरकार पुनः अपने मूल स्थान वापस नहीं जाने का शपथपत्र भरवा रही है।

 

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