Monday, September 6, 2021

ईट-भट्ठा मजदूरों के दिन कब बहुरेंगे

bhatta1बस्ती।। डीडीसी न्यूज़ नेवटवर्क/राघवेंद्र सिंह।। गोरखपुर से सटे बस्ती जिले में ईट भट्ठा मालिक, ठेकेदारों के साथ मिली भगत कर संगठित अपराध कर रहे हैं। दूसरे प्रदेशों से मजदूरों को 3 सौ रुपए रोज देने का लालच देकर लाने के बाद मजदूरों को ईट-भट्ठा मालिकों के हाथों बेच दिया जाता है ।  इससे भट्ठा मालिकों को भी फायदा होता है और ठेकेदारों को भी, लिहाजा ये धंधा चलता रहता है और मजदूर को इसका पता तब चलता है जब एक दो महीने बाद पैसे मांगते हैं।

बस्ती जिले के भानपुर तहसील के परसा कुतुब गांव के जंग बहादुर एण्ड लालबहादुर सन्स ईट-भट्ठा पर काम कर रहे मजदूरों का आरोप है कि वहां सात परिवार के 24 मजदूरों को बंधक बनाकर काम करवाया जाता रहा है, कुछ दिन तो ठीक-ठाक बीता लेकिन जब ये मजदूर अपने मजदूरी की मांग करने लगे तो इन्हें पता चला कि इनका ही ठेकेदार इनको भट्ठा मालिक के हाथ बेचकर फरार हो गया है। इन्हें 500 रूपये प्रति माह दिया जाता है। जिससे इनकी दो जून की रोटी भी मुश्किल है। आरोप है कि जब मजदूरों ने इसका विरोध करते हैं तो इनके साथ मार पिटाई भी की जाती है। मजदूरों को डराने धमकाने के लिए उनकी पत्नियों को भी जान से मार देने की धमकी दी जाती है । कुछ इस तरह से दूर दराज से पैसों की लालच में आए मजदूर ऐसे फंसते हैं कि न तो उनके पास खाने के पैसे होते हैं और न ही वापस जाने का किराया ।

इतना ही नहीं आरोप तो ये भी है कि मजदूरों की रखवाली करने के लिए भट्ठा मालिक पहरेदार भी लगाते हैं जो हर मजदूर पर निगाह रखता है।  जिससे मजदूर भाग न जाए। इस तरह मजदूरों का शारीरिक, मानसिक, और आर्थिक रूप से शोषण किया जाता है। आरोप ये भी है कि मजदूरों से मनमानी तरीके से 12 से 16 घण्टे तक काम करवाया जाता है । भट्ठा मालिक और ठेकेदारों की तो इसमें चांदी रहती है, लेकिन मजदूर बंधक बनकर सबकुछ खो देता है और वापस जाने लायक ही नहीं बचता।bh3

एक एनजीओ के माध्यम से पूरे मामले का खुलासा हुआ है। डीएम से शिकायत पत्र में दो भट्ठे के 104 मजदूरों के बन्धक बनाए जाने का मामला सामने आया है। कार्यवाही करते हुए भानपुर एसडीएम ने छापामारे की तो परसा कुतुब भट्ठे के 24 मजदूरों को मुक्त कराया गया। उन्हें उनके घर भेजा जा रहा है। एसडीएम की माने तो पुर्नवास की जो भी योजनाए होगी उससे मजदूरों को लाभान्वित किया जायेगा। पांच महीने से बंधक बने मजदूरों के बारे में प्रशासन का दावा है कि पहले कोई जानकारी नहीं थी और प्रशासन की इसमें कोई मिलीभगत नहीं है। 

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