Tuesday, September 7, 2021

महिला आयोग की वार्षिक रिपोर्ट गायब !

resizedimage (1)डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क।। लखनऊ।।  उत्तर प्रदेश का महिला आयोग महिलाओं की हर शिकायत को सुलझाने का दावा करता है लेकिन आलम ये है कि आयोग की सरकारी वेबसाइट से वार्षिक रिपोर्ट ही गायब है और इतना ही नहीं इसके बारे में कोई बताने वाला नहीं। आयोग दर्ज हो रहे मामलों का आंकड़ा देने में भी नाकाम है। 

उत्तर प्रदेश में महिला आयोग आबादी के हिसाब से भले ही जरूरत से ज्यादा सेहतमंद है लेकिन महिलाओं के उत्पीड़न को न तो रोक पा रहा है और न ही उन्हें सही तरीके से सुलझा पा रहा है। कहने तो तो यहां एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और 24 सदस्य हैं । लेकिन राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी से जब डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क के संवाददाता ने अब तक कितनी शिकायतें आईं को लेकर सवाल किया तो उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं । इतना ही नहीं सोमवार को महिला आयोग के मुख्यालय पर राज्य स्तरीय मीटिंग का एजेंडा क्या था और मीटिंग में क्या तय हुआ का जवाब भी अध्यक्ष जरीना उस्मानी ने नपे तुले शब्दों में ही दिया।

अब महिला आयोग की जनसंख्या का आंकड़ा भी देख लीजिए पिछली बीएसपी सरकार से पहले इस आयोग में एक अध्यक्ष और सात सदस्य हुआ करते थे लेकिन बीएसपी सरकार में यहां 17 सदस्य और दो उपाध्यक्ष के साथ एक अध्यक्ष आयोग का संचालन तय किया गया। लेकिन अब यह संख्या पच्चीस सदस्य और दो उपाध्यक्ष के साथ एक अध्यक्ष की है, हर सदस्य को तीन-तीन जिले का प्रभार सौंपा गया है लेकिन असलियत तो यह है कि आयोग के सदस्य इलाकों में केवल सैर करने ही जाते हैं । लेकिन आयोग की मुखिया का कहना तो कुछ और ही है। जब डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता ने अध्यक्ष जरीना उस्मानी से उनके कार्यकाल में आने वाली शिकायतों की लिस्ट मांगी तो पहले तो उन्होंने देने का वादा किया लेकिन अगले ही घंटे वो पलट गईं जरीना उस्मानी का कहना है कि बहुत मामले आते हैं लिस्ट बाद में मिल जाएगी।

महिला आयोग की वेबसाइट से वार्षिक रिपोर्ट गायब है। इसका जवाब न तो महिला आयोग के सदस्यों के पास है और न ही अध्यक्ष के पास। लेकिन मामलों को लेकर महिला आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि हर दिन दो सौ से ढाई सौ शिकायतें आती हैं अगर आयोग के ही इन आंकड़ों को सच मानें तो समझा जा सकता है कि आयोग की जिम्मेदारी कितनी अहम है। लेकिन शिकायतों की हकीकत और उनके निपटारे का खुलासा करने के लिए अब आपको शिकायतों के पंजीकरण की लिस्ट और वार्षिक रिपोर्ट आरटीआई से ही लेनी पड़ेगी। 

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