Wednesday, September 1, 2021

99 मदरसों को अनुदान, देखिए मुख्यमंत्री ने क्या कहा

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। यूपी सरकार ने कैबिनेट में कई अहम फैसले लिए। इसमें आलिया स्तर के स्थाई मान्यता प्राप्त 99 मदरसों को अनुदान सूची में लिए जाने के फैसले को मंजूरी दे दी गई है। इनमें से छह मदरसे, जिन्हें उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पहले ही अनुदान सूची पर लिया जा चुका है, को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई है। शासन स्तर पर गठित समिति के उपयुक्त पाए जाने पर 93 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने का फैसला लिया गया है। मदरसों को दो चरणों में अनुदान सूची पर लिए जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिमंडल ने अनुमोदित कर दिया है।

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ज्ञात हो कि प्रदेश के मदरसों के उत्थान तथा इनके शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 2003 तक के स्थाई मान्यता प्राप्त मदरसों में से 146 मदरसों को अनुदानित करने की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए, इन्हें दो वर्षों में अनुदान सूची में लिए जाने का निर्णय लिया गया था। निर्णय को कार्यान्वित करने के लिए मदरसों को अनुदान सूची पर लिए जाने हेतु शर्तें एवं मानक निर्धारित करते हुए प्रस्ताव प्राप्त किए गए। निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण द्वारा 192 प्रस्तावों पर संस्तुति सहित आख्या उपलब्ध कराई गई। इनमें से छह मदरसों को उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 20 मार्च, 2015 को अनुदान सूची पर लिया गया है। शेष 186 प्रस्तावों पर इस हेतु गठित समिति द्वारा 27 फरवरी, 2015 के शासनादेश में निर्धारित मानक एवं शर्तों को पूर्ण करने की स्थिति को देखते हुए, 93 मदरसों को अर्ह पाते हुए इनकी मान्यता की तिथि से, वरिष्ठता क्रम में अनुदान सूची पर लिए जाने की संस्तुति की गई है।

मान्यता एवं सेवा नियमावली 1987 के नियम 22 का पालन किए जाने पर नियमानुसार नियुक्त शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वेतन दिया जा सकेगा। इस सम्बन्ध में रजिस्ट्रार, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा पुष्टि के उपरान्त आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस शर्त एवं प्रतिबंध के तहत ही 93 मदरसों को अनुदान सूची में लिया गया है। पूर्व सन्दर्भित शासनादेश की व्यवस्थानुसार प्रत्येक मदरसे में एक प्रधानाचार्य, 12 अध्यापक, एक लिपिक तथा एक अनुचर सहित कुल 15 पदों का मानक निर्धारित है, जिसके लिए छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार प्रत्येक मदरसे पर कुल 46 लाख छह हजार 612 रुपए प्रतिवर्ष का व्यय भार सम्भावित है। इस इस प्रकार 146 मदरसों को अनुदानित किए जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2015-16 में 41 करोड़ 80 लाख रुपए का बजट प्राविधान किया गया है।

जनेश्वर मिश्र सोलर स्ट्रीट लाइट योजना’ को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने 2,000 ग्राम पंचायतों में आठ सार्वजनिक स्थलों पर सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना की योजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह योजना ‘श्री जनेश्वर मिश्र सोलर स्ट्रीट लाइट योजना’ के नाम से जानी जाएगी। इस योजना के द्वारा सौर ऊर्जा के माध्यम से स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था होने पर गांवों में सामाजिक उत्थान के साथ-साथ ग्रामीण परिवेश में कार्य क्षमता, सामाजिक सुरक्षा आदि के बोध के साथ ही स्वच्छ वातावरण का निर्माण भी हो सकेगा।

ज्ञात हो कि राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद द्वारा श्री जनेश्वर मिश्र ग्रामों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु आवश्यकतानुसार सी.सी. रोड का निर्माण, नाली निर्माण, इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्प की स्थापना एवं ग्रामों के विद्युतीकरण के कार्य कराए जा रहे हैं। विकास एजेण्डा सूत्र-25 (ख) के अनुक्रम में मंत्रिपरिषद द्वारा जनेश्वर मिश्र ग्रामों में अवस्थापना कार्य हेतु वर्ष 2014-15 में चयनित 1,000 गांवों एवं वर्ष 2015-16 में चयनित होने वाले 1,000 श्री जनेश्वर मिश्र गांवों में उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) द्वारा आठ सार्वजनिक स्थलों पर सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना का प्रस्ताव है।

जनेश्वर मिश्र ग्रामों में सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना हेतु छाया रहित सार्वजनिक स्थल का चयन, खण्ड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, परियोजना अधिकारी, यूपीनेडा की उपस्थिति में डुग-डुगी बजाकर अधिक से अधिक ग्रामवासियों को एकत्रित कर ग्राम सभा की खुली बैठक में किया जाएगा। संयंत्र की स्थापना हेतु आबादी के मध्य सार्वजनिक स्थान पर चैराहा/स्कूल/ आंगनबाड़ी/हाट/पंचायत घर जैसे स्थानों का चयन किया जाएगा। चयनित स्थलों की सूची खुली बैठक में पढ़कर सुनाई जाएगी। यदि किसी ग्राम में, पूर्व में, किसी योजनान्तर्गत पर्याप्त संख्या में सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना कराई गई है तो उस ग्राम में सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र की स्थापना नहीं कराई जाएगी तथा नवीन श्री जनेश्वर मिश्र ग्राम का चयन, मण्डी परिषद द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत किया जाएगा।

परियोजना का क्रियान्वयन यूपीनेडा द्वारा किया जाएगा। अभिकरण द्वारा प्रदेश के वित्तीय नियमों के अंतर्गत ई-टेण्डर के माध्यम से संयंत्रों की आपूर्ति एवं स्थापना तथा 5 वर्ष के कम्प्रीहेन्सिव मेन्टिनेन्स के साथ दरें एवं आपूर्तिकर्ता का चयन कर अनुबन्ध किया जाएगा एवं चयनित फर्मों को कार्यादेश दिया जाएगा। संयंत्र की स्थापना व्यक्तिगत स्थान/घर के अंदर नहीं की जाएगी। सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र की स्थापना हेतु ग्राम पंचायत का सहयोग स्थल चयन से संयंत्र की स्थापना तक लिया जाएगा। संयंत्र की स्थापना के उपरान्त सामुदायिक उपयोग हेतु ग्राम पंचायत को हस्तगत किया जाएगा। संयंत्रों की मरम्म्त, रख-रखाव तथा स्पेयर पाटर्स की उपलब्धता के लिए पांच वर्ष के बाद भी सर्विस जारी रखने के उद्देश्य से सम्बन्धित आपूर्तिकर्ताओं द्वारा अनिवार्य रूप से जनपदीय स्तर पर एक सर्विस सेण्टर की स्थापना की जाएगी। वारण्टी अवधि के पश्चात् संयंत्रों का संचालन/रख-रखाव पर होने वाले व्यय का वहन सम्बन्धित ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।

संयंत्रों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने हेतु यूपीनेडा का टोल फ्री नं0 1800 180 0005 उपलब्ध रहेगा ताकि संयंत्रों के काम न करने की दशा में ग्रामीणों द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा सके। जनपद स्तर पर समय-समय पर परियोजना की फीडबैक प्राप्त की जाएगी तथा फीडबैक के आधार पर योजना को और सुदृढ़ बनाया जाएगा।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनेगा आठ लेन

मंत्रिपरिषद ने आगरा से लखनऊ प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे (ग्रीनफील्ड) परियोजना को छह के स्थान पर छह लेन एक्सपैण्डेबल टू आठ लेन में स्ट्रक्चर्स (पुल/पुलिया/अण्डर पास आदि) को आठ लेन चैड़ा बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय से भविष्य में पूरी सड़क को छह लेन से आठ लेन में परिवर्तित करने में कठिनाई नहीं होगी।

ज्ञातव्य है कि स्ट्रक्चर्स को छह लेन के स्थान पर आठ लेन चैड़ाई में बनाए जाने का प्रस्तावित चेंज ऑफ स्कोप अनुबन्ध में दिए गए प्राविधानों के अनुरूप है तथा अतिरिक्त लागत का आकलन अनुबन्ध के क्लाज 13.2.2 एवं 13.2.3 के अनुसार किया जाएगा। पूर्व में परियोजना लागत में स्ट्रक्चर्स अर्थात् कल्वर्ट, पी.यू.पी., वी.यू.पी. तथा सेतुओं की चैड़ाई आठ लेन चैड़े एक्सप्रेस-वे के अनुसार ली गयी थी।
देश के वर्तमान आर्थिक परिवेश एवं प्रदेश के द्रुतगामी विकास के मद्देनजर परियोजना के लिए सम्पूर्ण धनराशि का प्राविधान राज्य सरकार के बजट में किया जाएगा। परियोजना को आठ लेन चैड़े स्ट्रक्चर्स के स्थान पर 08 लेन चैड़े स्ट्रक्चर्स बनाए जाने की दशा में गठित अनुबंधों में 491 करोड़ 41 लाख रुपए की वृद्धि अनुमानित है।

गाजीपुर में सेवराई को नई तहसील बनाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने जनपद गाजीपुर में सेवराई को नई तहसील बनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्यालय ग्राम सेवराई में होगा। विशेष परिस्थितियों, जनहित एवं प्रशासनिक सुगमता के दृष्टिगत मंत्रिपरिषद ने निर्धारित मानक में शिथिलीकरण प्रदान करते हुए उच्च स्तरीय समिति की संस्तुति के आधार पर यह निर्णय लिया है।

राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों को संविदा के आधार पर भरे जाने का फैसला

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों को संविदा के आधार पर प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर के राजकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के सेवानिवृत्त चिकित्सा शिक्षकों से भरने, एमडी डिग्री धारक होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों को राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों/ चिकित्सालयों में आवश्यकतानुसार लेक्चरर के रिक्त पदों पर तैनात करने तथा राजकीय होम्योपैथिक महाविद्यालयों में अतिथि प्रवक्ता के रूप में आठ विषय-विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद ने इन शिक्षकों की नियुक्ति/चयन प्रक्रिया तथा सम्बन्धित शर्तें और प्रतिबन्धों को भी अनुमोदित कर दिया है। राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेजों में शिक्षकों की कमी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।

गुलकन्द वैट से मुक्त

मंत्रिपरिषद ने गुलकन्द को यूपी मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2008 की करमुक्त वस्तुओं की अनुसूची-1 में रखे जाने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश में गुलकन्द वैट से मुक्त हो गया है। ज्ञातव्य है कि गुलकन्द गुलाब के फूल की पत्तियों को शक्कर के साथ कूट-कूट के तैयार किया जाता है। इसका उपयोग आंख की ज्योति बढ़ाने व पेट से सम्बन्धित रोगों के इलाज में होता है। गुलकन्द का निर्माण लघु गृह उद्योग के तहत होता है, जिसमें काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। गुलकन्द को वैट मुक्त किए जाने से गुलाब की खेती करने वाले किसानों तथा लघु उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।

300 रुपए तक के मूल्य के सभी प्रकार के फुटवियर वैट से मुक्त

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2008 के तहत फुटवियर पर कर की दर युक्तियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। इसके तहत 300 रुपए तक के अधिकतम फुटकर मूल्य के सभी प्रकार के फुटवियर, जिनमें हवाई चप्पल एवं इनके स्ट्रेप भी सम्मिलित हैं, को अधिनियम की करमुक्त वस्तुओं की अनुसूची-1 में रखकर करमुक्त कर दिया है, बशर्ते फुटवियर पर ही अधिकतम फुटकर मूल्य अमिट रूप से चिन्हित या उभरा हो। इसके साथ ही, अधिनियम की अनुसूची-2 भाग-क की प्रविष्टि संख्या-83 को विलोपित करने का भी निर्णय लिया है।