Saturday, September 4, 2021

मुलायम के सपनों को चकनाचूर कर रहा निर्माण निगम

MULAYAM SINGH YADAVदो साल में नहीं हो पाया, कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रोजेक्ट का टेंडर, चहेते ठेकेदारों को अधिक लागत में फायदा पहुंचने का हो रहा खेल, सरकार की साख को भी निगम लगा रहा पलीता।

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। मुलायम सिंह यादव के सपनों को यूपी का निर्माण निगम चकनाचूर करने में जुटा है। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि निगम में फैला भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लापरवाही, इस कहानी को चीख-चीखकर बयां कर रही है। सरकार की योजनाओं का भले ही शिलान्यास हो जाए, लेकिन इसका टेंडर देने में जो भ्रष्टाचार हो रहा है, वह सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर पलीता लगा रहा है। ये परियोजनाएं विधानसभा चुनाव तक आधी-अधूरी ही पूरी हो पाएंगी।

यूपी में कैंसर मरीजों को इलाज के अभाव में दम न तोड़ना पड़े, इसको लेकर मुलायम सिंह यादव की एक सोच थी। उन्होंने वर्ष 2012 में नई सरकार बनने के दौरान ही लखनऊ में कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने का एलान किया था। कुछ दिन बाद इसे साकार रूप देने के लिए लखनऊ के चक गंजरिया में सरकार ने हरी झंडी देदी। इसके बाद में मुलायम सिंह यादव ने इसका शिलान्यास भी कर दिया, जिससे यह जल्दी पूरी हो जाए। यह प्रोजेक्ट करीब सात सौ करोड़ रुपए की लागत का है। मुलायम सिंह यादव की कोशिश थी कि यहां काम शुरू हो सके और प्रदेश के मरीजों को इलाज करवाने के लिए बाहर न जाना पड़े, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि मुलायम का यह डीम प्रोजेक्ट उनकी ही सरकार में पूरा नहीं हो पाएगा। यह न केवल सरकार के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की बदहाल स्थिति का नमूना है, बल्कि इस प्रोजेक्ट को देख रहे निर्माण निगम की लापरवाही भी इससे उजागर होती है।

चहेतों को दिए जा रहे टेंडर

इसे निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल की मेहरबानी कहें या कुछ और कि यहां अभी तक काम शुरू ही नहीं हो पाया। काम शुरू भी कैसे हो जब एमडी आरके गोयल अभी भी टेंडर को फाइनल करने में ही उलझे हैं। उन्हें यह फिक्र है कि आखिर सात सौ करोड़ का टेंडर किसी ऐसे को न मिल जाए कि उसका फायदा न उठाया सकें। यही वजह है कि टेंडर की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया कि केवल चेहते ही टेंडर डाल पाएं और उन्हें ही इसका लाभ दिया जा सके। हुआ भी ऐसा ही, हाल ही में जब टेंडर डाला गया तो केवल दो कंपनियों एल एंड टी और शाकूर कंपनी ही फाइनल हो पाईं। ये दोनों ही कंपनियां एमडी आरके गोयल की चेहती कंपनी मानी जाती हैं। यही नहीं, इन कंपनियों को कैसे भरपूर फायदा पहुंचाया जाए, इसका भी पूरा खेल खेला गया। टेंडर डलवाने में दोनों ही कंपनियों से 10 से 20 फीसदी अधिक के बजट पर टेंडर डलवाया गया, जिससे उन्हें फायदा पहुंचाया जा सके। जबकि हकीकत है कि यदि समय पर काम शुरू हो जाता तो यह लागत कम आती। निर्माण निगम की इस कारगुजारी से यह लागत न केवल अधिक आएगी, बल्कि मुलायम सिंह यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट ड्रीम ही होकर रह जाएगा।

कैसे हो रहा निगम में भ्रष्टाचार

पहले निगम 50 करोड़ तक के छोटे मोटे काम खुद करवाता था। इससे न केवल योजनाएं समय पर पूरी हो जाती थी, बल्कि मजदूरों और इंजीनियरों को काम भी मिलता था, लेकिन अब इसमें उगाही का नया धंधा अधिकारियों ने शुरू कर लिया है। अब हर काम टेंडर पर दूसरी कंपनियों को देकर करवाया जाता है। इसमें निगम अपने चेहते ठेकेदारों को कमीशन लेकर उनकी मदद करता है। मनचाहे रेट पर टेंडर फाइनल कर दिए जाते हैं। छोटे ठेकेदारों को उनकी हैशियत बता दी जाती है और बड़े ठेकेदारों से लेनदेन शुरू हो जाता है। जब निगम को उपयुक्त ठेकेदार नहीं मिलता है, तो यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ जाता है और फिर शुरू होती है ठेकेदारों की खोज। यही वजह है कि यूपी सरकार के कई दर्जन प्रोजेक्ट इस सरकार में पूरे होने तो दूर शुरू ही नहीं हो पाएंगे। सरकार जिन प्रोजेक्टों को अपना ड्रीम बता रही है, उसे निर्माण निगम विधानसभा चुनाव तक आधा भी पूरा कर ले तो बड़ी बात होगी।

क्या कहते हैं एमडी आरके गोयल

निर्माण निगम के एमडी का वैसे तो फोन ही नहीं उठता है। वह हमेशा मीटिंग और दौरे पर ही रहते हैं, लेकिन सोमवार को ऐसा नहीं था। उन्होंने फोन उठाया और जानकारी भी दी। एमडी आरके गोयल का कहना है कि वर्ष 2016 में मुलायम सिहं यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाएगा। भले ही वहां पर कोई काम शुरू न हुआ हो, लेकिन टेंडर फाइनल करने का काम हो रहा है। जल्द ही जून में काम भी शुरू हो जाएगा। इसका जवाब वह नहीं दे पाए कि आखिर निर्माण निगम भी चुनाव का ही इंतजार क्यों कर रहा है। जबकि कैंसर इंस्टीट्यूट लोगों की सेहत और जान से जुड़ा मसला है।

(साभार-पत्रकार सत्ता)