Monday, September 6, 2021

मेजर को कब मिलेगा भारत रत्न

Major-Dhyan-Chandदिल्ली/लखनऊ।।डीडीसी न्यूज़।। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद को भारत रत्न मिलना लगभग तय माना जा रहा है। खेल मंत्रालय ने सचिन तेंदुलकर एवं मेजर ध्यान चंद के नामों पर विचार करते हुए मेजर को वरीयता दी है और उनके ही नाम को भारत रत्न के लिए आगे बढ़ा दिया है। ओलिंपिक में वह दौर भी था जब भारतीय हॉकी का ही जादू चलता था। भारत की इस बादशाहत के पीछे मेजर ध्यान चंद का बहुत बड़ा योगदान था। ध्यान चंद के बेटे अशोक कुमार के नेतृत्व में एक डेलिगेशन खेलमंत्री जितेंद्र सिंह से 12 जुलाई को मिला और मेजर ध्यान चंद के लिए जोरदार दावेदारी की थी। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कैप्टन बिशन सिंह बेदी भी उस डेलिगेशन का हिस्सा रहे। लेकिन इस कवायद पर पीएम और राष्ट्रपति की मुहर लगनी अभी बाकी है।

मेजर ध्यान चंद ने भारत के लिए तीन ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते थे जिसमें 1928 का (ऐम्सटर्डम), 1932 का  (लॉस एंजिलिस), और 1936 का (बर्लिन) ओलिंपिक भारत के नाम रहा। हॉकी के इस जादूगर ने साल 1979 में दुनिया को अलविदा कह दिया। ध्यान चंद ने आजादी के पहले वाले भारत में इस खेल के प्रति भारतीयों में एक जुनून पैदा कर दिया था, जो ध्यान चंद के बाद कोई नहीं कर पाया। राष्‍ट्रीय खेल हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद ने हिटलर के जर्मनी की ओर से खेलने की पेशकश को भी नकार दिया था। उन्हें असाधारण खिलाड़ी के साथ प्रखर व मुखर राष्ट्रवादी भी माना जाता है। अपने समय में ध्यान चंद ने अपनी प्रतिभा से पूरे विश्व को चौंका दिया था। ध्यान चंद जैसी शख्सियत हमारे खेल इतिहास में देखने को नहीं मिलीं। लगातार तीन ओलिंपिक्स में स्वर्ण पदक मिलना किसी सपने से कम नहीं है, लेकिन मेजर ने उसे हकीकत में बदला था। कहा जाता है कि दुर्भाग्य से ध्यान चंद का आखिरी समय काफी अभाव और आर्थिक तंगी में गुजरा। सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया, और खेल मंत्रालय भी उदासीन रहा।

ध्यान चंद को मरणोपरांत भारत रत्न देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी चाहिए होगी। ऐसा नहीं है कि मेजर का नाम पहली बार आगे बढ़ाया गया है बल्कि दिसंबर 2011 में भी ध्यान चंद का नाम 82 सांसदों ने भारत रत्न के लिए आगे बढ़ाया था, लेकिन सरकार ने उसे मंजूरी नहीं दी थी। लखनऊ में साधना न्यूज़ चैनल के संवाददाता राज बी. सिंह कहते हैं कि ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि देश के सबसे बड़े खिलाड़ी को भारत रत्न आज तक नहीं मिला। ध्यान चंद की मौत के 34 साल बाद भी उन्हें भारत रत्न देने की कवायद ही चल रही है। देश का कौन से पीएम और राष्ट्रपति हुआ होगा जो ध्यान चंद के योगदान को नहीं जानता हो लेकिन ये दुर्भाग्य है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से कभी भारत रत्न देने की कोशिश की ही नहीं गई।   

 

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