Monday, September 6, 2021

राहुल ने जैन समुदाय को बनाया अल्पसंख्यक

RAHUL_GANDHI_313544fदिल्ली।। डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क।। केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दे दिया है। अब जैन समुदाय के लोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में अल्पसंख्यक समुदायों को मिलने वाले फायदे प्राप्तक कर सकेंगे। जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने का फैसला सोमवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने यह मुद्दा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सामने उठाया था। जैन समुदाय के लोगों के समूह ने रविवार को राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी मांग रखी थी। जैन समुदाय को अल्पहसंख्यकक दर्जा देने को लेकर लंबे समय से मांग चली आ रही थी, लेकिन हर बार मामला टल जाता था, लेकिन इस बार राहुल गांधी ने खुद मामला आगे बढ़ाया और नतीजा फटाफट आ गया। वैसे इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है, क्यों कि राहुल के कहते ही मिनटों में पूरी कांग्रेस का रुख बदल जाता है। इससे पहले राहुल के कहने पर सब्सिडी वाले सिलेंडर 12 करने, दागियों को बचाने वाला अध्या।देश वापस लेने जैसे फैसले हो चुके हैं।    

बहरहाल, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जैन समुदाय के करीब 50 लाख लोगों को अल्पसंख्यक दर्जा मिल गया है। जैन समुदाय अल्पसंख्यक दर्जा पाने वाला छठा समुदाय हो गया है। मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय को पहले से अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान ने बताया कि उनका मंत्रालय इस बारे में जल्द ही अधिसूचना जारी करेगा।

जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद उसके सदस्यों को अल्पसंख्यकों के लिए कल्याण कार्यक्रमों और छात्रवृत्तियों में केंद्रीय मदद हासिल होगी। वे अपने शैक्षिक संस्थान भी चला सकते हैं। इस समुदाय को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा पहले से ही हासिल है। कांग्रेस उपाध्याक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एआईसीसी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्याज 9 से 12 करने की मांग रखी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा  मोइली हरकत में आ गए। कुछ समय पहले जब मोइली से सब्सिडी वाले सिलेंडर बढ़ाने के बारे में सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने कहा था कि ऐसा कोई प्रस्तालव हमारे पास नहीं है। हालांकि, 13 जनवरी को दिए बयान में उन्हों ने इतना जरूर कहा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह या राहुल गांधी अगर इस संबंध में कुछ कहते हैं तो विचार किया जाएगा। शुक्रवार को तालकटोरा स्टेमडियम में एआईसीसी की बैठक में ऐसा ही हुआ और राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान मंच पर बैठे प्रधानमंत्री से मांग सिलेंडर की संख्यास बढ़ाने की मांग कर डाली।

राहुल ने कहा 12 कर दीजिए तो 12 हो गया

राहुल गांधी ने कहा- प्रधानमंत्रीजी 9 सिलेंडर से हमारा काम नहीं चलता, इसे बढ़ाकर 12 कर दीजिए। बस फिर क्याब था, राहुल भाषण देकर मंच से उतरे भी नहीं थे और खबर आ गई कि वीरप्पाक मोइली ने सिलेंडर बढ़ाए जाने की बात कही है। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी के कहते ही कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री, मुख्येमंत्री या नेता हरकत में आए हों। इससे पहले राहुल गांधी के कहने पर ही दागी नेताओं को बचाने वाला अध्यादेश वापस ले लिया गया था। आदर्श घोटाले की जांच रिपोर्ट को खारिज कर देने वाले महाराष्ट्र  के मुख्यामंत्री पृथ्वीलराज चव्हााण ने राहुल के कहने के कुछ मिनट बाद ही अपना फैसला बदल लिया था।   

दिसंबर 2013 में कांग्रेस शासित राज्यों के 12 मुख्यमंत्रियों के साथ राहुल गांधी ने बैठक की थी। इसमें राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित सभी राज्यों में लोकायुक्त बनाने, जमाखोरों पर कार्रवाई करने और जनवतिरण प्रणाली को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए राहुल ने विपक्ष पर भी जमकर हमला बोला था। उन्होंेने कहा था कि भ्रष्टा चार की बातें सभी करते हैं, लेकिन जब कानून बनाने की बात होती है तो सभी पीछे हट जाते हैं। राहुल गांधी ने ज्याटदा देर पत्रकारों से बात नहीं की थी, लेकिन जाते-जाते वह आदर्श घोटाले में फंसे महाराष्ट्रे के पूर्व सीएम अशोक चव्हायण की मुश्किलें बढ़ा गए थे। राहुल से आदर्श घोटाले पर सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंनने कहा- मेरी निजी राय है कि आदर्श घोटाले की रिपोर्ट पर फिर से विचार होना चाहिए। राहुल गांधी की निजी राय सुनने के कुछ मिनट बाद ही चव्हारण ने आदर्श घोटाले की जांच रिपोर्ट पर विचार करने की बात कह दी थी।

राहुल ने कैसे फाड़ा था अध्यादेश

कांग्रेस उपाध्याक्ष राहुल गांधी ने 27 दिसंबर को सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों की सदस्यता बरकरार रखने के लिए लाए गए विवादित अध्यादेश को फाड़कर कूड़ेदान में फेंकने की बात कही थी। उस वक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ अजय माकन मौजदू थे। राहुल के हाथ में एक कागज था, जिसे उन्होंने फाड़ दिया था। इसके कुछ दिनों बाद ही यूपीए सरकार को अध्यादेश वापस लेना पड़ा था। यूपीए सरकार और कांग्रेस कोर ग्रुप ने पलटी मारते हुए राहुल गांधी के सामने समर्पण कर दिया था। विवादों के साए में हुई कैबिनेट की बैठक में न केवल राहुल की ओर से बकवास बताए गए अध्यादेश को वापस लेने का फैसला हुआ बल्कि इस विवाद की जड़ संसद में पेश जनप्रतिनिधित्व संशोधन विधेयक को भी सरकार ने वापस ले लिया था। इस फैसले के बाद संसद और विधानसभा में दागियों के बचने की राह अब पूरी तरह बंद हो गई थी।

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