Monday, September 6, 2021

जानिए किसे कहते हैं बागों का शहर, यहां पार्कों की भी नहीं है कमी

Clock-Tower-Lucknow-5510लखनऊ. यूपी की राजधानी कहे जाने वाले लखनऊ को बागों का शहर कहते हैं। बाग यहां की पहचान रही हैं। यही वजह है कि लखनऊ के कई इलाकों के नाम के आखिरी में बाग लगा हुआ है। चारबाग, आलमबाग, लालबाग, कैसरबाग, बंदरियाबाग ऐसे इलाके हैं जहां कभी बागें ही बागें हुआ करती थी। आज भी इन इलाकों में काफी बागें हैं। चारबाग में रेलवे स्टेशन तो है ही यहां का रेलवे स्टेशन भी चारों ओर से बाग से घिरा है।

पार्कों के मामले में भी लखनऊ पीछे नहीं है। किसी भी दूसरे शहर की तुलना में लखनऊ में सबसे अधिक पार्क हैं। मुलायम सिंह यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट जनेश्वर मिश्र पार्क तो एशिया का सबसे बड़ा पार्क कहा जाता है। इसके बाद अंबेडकर पार्क और रमाबाई पार्क भी अपने आपमें काफी बड़े हैं।

लखनऊ को प्राचीन काल में लक्ष्मणपुर और लखनपुर के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि अयोध्या के राम ने लक्ष्मण को लखनऊ भेंट किया था। लखनऊ के वर्तमान स्वरूप की स्थापना नवाब आसफउद्दौला ने 1775 ई.में की थी। अवध के शासकों ने लखनऊ को अपनी राजधानी बनाकर इसे समृद्ध किया। लेकिन बाद के नवाब विलासी और निकम्मे साबित हुए। आगे चलकर लॉर्ड डलहौली ने अवध का अधिग्रहण कर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। 1850 में अवध के अन्तिम नवाब वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश अधीनता स्वीकार कर ली।

लखनऊ में नवाबकाल
अवध के चौथे नवाब असिफुद्दोला या अशफ-उद-दुलाह ने अवध की राजधानी को 1775 में फ़ैज़ाबाद से लखनऊ स्थानांतरित किया था। वास्तुकला की दृष्टि से अवध के नवाबों का इस शहर में काफी योगदान है, इसके अलावा उस समय के लखनऊ की मुग़ल चित्रकारी भी आज बहुत से संग्रहालय में सुरक्षित हैं। भवनों के स्तर पर बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, तथा रूमी दरवाज़ा मुग़ल वास्तुकला का जीता जागता उदाहरण है। हालाँकि आधुनिक प्रशासन की उपेक्षा से इन महत्त्वपूर्ण विरासतों का खंडहरों में तब्दील होने का खतरा हो गया है।

प्राचीन अवध राज्य का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में वर्ष 1857 के सिपाही विद्रोह के फलस्वरुप हुआ था। यह शहर भारत के इस पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सबसे पहले जीते गए कुछ शहरों में से था। ब्रिटिश शासकों को यह शहर अपने कब्ज़े में लेने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ी। लखनऊ का “शहीद स्मारक” आज भी हमें उन क्रांतिकारियों की याद ताज़ा कराता है।

ये हैं यहां की अमूल्य धरोहरें
लखनऊ के आधुनिक वास्तुकारी में लखनऊ विधानसभा और चारबाग़ स्थित लखनऊ रेलवे स्टेशन का नाम लिया जा सकता है। विश्व के सबसे पुराने आधुनिक स्कूलों में से एक ला मार्टीनियर कॉलेज भी इस शहर में मौजूद है, जिसकी स्थापना ब्रिटिश शासक क्लाउड मार्टिन की याद में की गई थी।
अहमद शाह अब्दाली के दिल्ली पर हमले के बाद शायर मीर तकी “मीर” अवध के चौथे नवाब अशफ – उद – दुलाह या असफ़ुद्दौला के दरबार मे लखनऊ चले आये थे और अपनी जिन्दगी के बाकी दिन उन्होने यहीं गुजारे थे और 20 सितम्बर 1810 को यहीं उनका निधन हुआ।

1950 में यूपी नाम रखा गया
सन 1902 में नार्थ वेस्ट प्रोविन्स का नाम बदल कर यूनाइटिड प्रोविन्स ऑफ आगरा एण्ड अवध कर दिया गया। साधारण बोलचाल की भाषा में इसे यूपी कहा गया। सन 1920 में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ कर दिया गया। प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद ही बना रहा और् लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक बेंच स्थापित की गयी। स्वतन्त्रता के बाद 12 जनवरी सन 1950 में इस क्षेत्र का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश रख दिया गया और लखनऊ इसकी राजधानी बनी। गोविंद वल्लभ पंत यूपी के प्रथम मुख्य मन्त्री बने। अक्टूबर 1963 में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश एवं देश की प्रथम महिला मुख्य मन्त्री बनी।

लखनऊ के सांसद श्री अटल बिहारी वाजपेयी दो बार, मई 16, 1996 से June 1, 1996 तक और फिर मार्च 19, 1998 से मई 22, 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं।

फोटोः लखनऊ का क्लाक टावर।