Wednesday, September 8, 2021

लिव इन की वजह से कोर्ट को देना पड़ा यह फैसला

dainikdunai.comलखनऊ।। (दिलीप सैनी) ।। लिव इन रिलेशन को लेकर कोर्ट को अलग फैसला देने पर मजबूर होना पड़ा। हिंदू विवाह अधिनियम इसमें आड़े आ रहा था, लेकिन जज ने यहां मामले को लेकर पारिवारिक कोर्ट जाने का आदेश देकर, लड़की को मर्जी के मुताबिक प्रेमी के साथ रहने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

मामला लखनऊ का है। लड़की की उम्र 21 साल है। वह लड़के साथ जाने के लिए राजी है। उसके पिता ने इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की थी और यह भी तर्क दिया था कि वह जिस लड़के से प्रेम करती है, वह विधुर है और रिश्ते में उसका चचेरा भाई है। उसके तीन बच्चे हैं। उसका विवाह लड़की के साथ प्रतिबंधित है। अब कोर्ट के सामने सवाल था कि वह इसे कैसे स्वीकार करे।

लड़की के चचेरे भाई संतोष की ओर से दलील दी गई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशन की मान्यता दे रखी है। यदि लड़की बालिग है, तो उसे नारी संरक्षण गृह मे रखना उसकी आजादी पर पाबंदी लगाना होगा। संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है। संतोष ने यह भी बताया कि वह बीए पास है और 30 अक्टूबर 2014 को आर्य समाज मंदिर में शादी चुका है।

कोर्ट ने कहा कि नारी निकेतन में किसी बालिग लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ नहीं रखा जा सकता। यह फैसला सोमवार को हाईकोर्ट ने दिया है। लखनऊ की एक लड़की अपने ही चचेरे भाई को प्यार करती है, लेकिन उसके हिंदू होने की वजह से हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह प्रतिबंधित है। फिर भी कोर्ट को ऐसा फैसला देना पड़ा।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लड़की बालिग है। वह जहां चाहे जा सकती है। जहां तक प्रतिबंधित श्रेणी के व्यक्ति के साथ विवाह की बात है। पक्षकार पारिवारिक न्यायालय के सामने अपनी अर्जी पेशकर समुचित रिलीफ मांग सकते हैं।

फोटोः प्रतीकात्मक।