Tuesday, August 31, 2021

समाजवादी अधिवेशन में किसान खो गया, सत्ता-सियासत और समाजवाद पर हुई बात

DSC0600600x521लखनऊ।। (अरविंद यादव) ।। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में सत्ता, सियासत और समाजवाद की बात हुई, लेकिन किसानों के हक की आवाज कहीं से भी सुनाई नहीं दी। ये अलग बात है कि मुलायम सिंह यादव अपने आपको किसान कहते हैं। उनके बेटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी दबे कुचले और पिछड़ों की बात करते हैं। इस सब के बीच किसान न जाने कहां खो जाता है।

यूपी में अखिलेश यादव सरकार के दो साल से अधिक कार्यकाल बीतने के बाद भी किसान उनकी ओर टकटकी लगाए देख रहा है। हकीकत जानने के लिए अखिलेश यादव को उन लोगों को किसानों के बीच भेजना चाहिए जो पार्टी कार्यालय में बैठकर समाजवाद की बात करते हैं। किसानों का कर्जा बढ़ता जा रहा है। गन्ना भुगतान पूरा नहीं होने से किसान परेशान है।

चुनाव के दौर में याद आते हैं जमीनी नेता
सरकार ही नहीं किसान को अपना बताती है, बल्कि समाजवादी सरकार को किसान भी अपनी सरकार कहता है, लेकिन वह इन दो सालों में समझ नहीं पा रहा है कि आखिर अपने इतने निष्ठुर क्यों हो गए। वास्तव में किसानों की दशा यूपी में पहले से खराब हुई है। इसे किसान के साथ साथ सपा के वो नेता भी बता सकते हैं जो मुलायम और अखिलेश से मिल ही नहीं सकते। उनकी याद इन नेताओं को तब आती है जब चुनाव का दौर होता है।

क्या कहते हैं अधिवेशन में आए नेता
समाजवादी अधिवेशन में आए जमीनी नेता नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि किसान तो मर रहा है। वह केवल वोट बैंक बनकर रह गया। वह मुलायम को अपना नेता मानता है। सपा को अपनी पार्टी मानता है, लेकिन वह क्या करे, हमने तो भी उसे उसकी दशा पर छोड़ दिया है। आज उसे विकास चाहिए। समाजवाद नहीं। विकास मोदी कर सकते हैं, उसने मोदी में आशा की किरण देखी तो मोदी को वोट दे दिया।

फोटोः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए मुलायम सिंह यादव।