Wednesday, September 8, 2021

‘सीएम फाइलों पर साइन क्यों नहीं करते’

resizedimageडीडीसी न्यूज़ नेटवर्क।। लखनऊ।। यूपी में एक ही दिन सरकार को कोर्ट की दो फटकार देखने को मिली। इलाहाबाद हार्इ कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्तर पर पत्रावली पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं करने सम्बंधित पीआईएल पर राज्य सरकार से जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।

जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसे निर्णित होना आवश्यक है। अतिरिक्त महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने प्रारम्भिक आपत्ति प्रस्तुत की कि यह पीआईएल नहीं है, जिस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार को जो बात कहनी हो, वह लिखित रूप में प्रस्तुत की जाए।

याचिका के अनुसार यूपी में मुख्यमंत्री पत्रावली पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं करते और उनकी जगह मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी उनके नाम पर पत्रावली अनुमोदित करते हैं। यह विधि के सिद्धांतों के विपरीत है क्योंकि यह उत्तरदायित्व की भावना का विलोप करता है और इससे कई प्रकार के विवाद और दुरुपयोग की संभावना रहती है।

दूसरा मामला आजम खान से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को यूपी के मंत्री आजम खान को नोटिस जारी किया है। साथ ही कोर्ट ने मुजफ्फरनगर दंगों के मामलों में निलंबित किए गए पांच पुलिस वालों के निलंबन पर रोक लगा दी है। मुजफ्फरनगर दंगों के मामले में यूपी सरकार ने पांच थानाप्रभारियों को निलंबित कर दिया था। पुलिसवालों का आरोप है कि यह निलंबन यूपी के मंत्री आजम खान के इशारे पर किया गया था। इन पुलिसवालों ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान के दबाव के बाद उन सात लोगों को हिरासत से रिहा किया गया था जिन पर दो जाट और एक मुस्लिम लड़के की हत्या का आरोप लगा था। कहा जा रहा था कि इसी वजह से इलाके में दंगे भड़के थे। इन दंगों में 50 लोग मारे गए थे और करीब 45 हजार लोग विस्थापित हुए थे।

कोर्ट ने कहा कि निलंबन के आदेश में दुर्व्यवहार का जो आरोप लगाया गया है वह उचित नहीं लगता, इससे मात्र यही पता लगता है कि ये पुलिस वाले दंगों के समय और कारगर ढंग से निपट सकते थे।वहीं, कोर्ट ने कहा कि जो आरोप यूपी के मंत्री पर लग रहे हैं, वह काफी गंभीर हैं और इस पूरे प्रकरण पर गौर किया जाए तो इस आदेश के पीछे के कारणों पर गौर किया जाना चाहिए। इस पर यह भी देखा जाना जरूरी है कि कानून का पालन हुआ है या नहीं।

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