Saturday, September 4, 2021

सेना की डाक व्यवस्था में हैं कई सितारे

army सशस्त्र सेनाओं के कार्मिकों की तैनाती का स्थान निस्संदेह गुप्त रखा जाता है । वर्तमान में अधिकांश लोगों के लिए मोबाइल और इंटरनेट संचार के पसंदीदा माध्यम बन गए हैं लेकिन यह सुविधा हमारे देश की सीमाओं पर मुस्तैद जवानों को उपलब्ध नहीं है। उनके पास पत्र भेजने के लिए लिफाफे या अंतर्देशीय पत्र पर सैनिक का नाम, इकार्इ का विवरण लिखकर और ”केयर आफ- C/o 56 या 99 ए पी ओ लिखकर डाक में भेज दिया जाता है। ये ए पी ओ संख्या क्रमश: पश्चिमी या पूर्वी सेक्टर  में तैनाती पर निर्भर करती है। वे भले ही दूर-दराज के अगि्रम ठिकाने या ऐसे क्षेत्र में तैनात हों जहां बाज़ भी उड़ान नहीं भर सकता, सेना डाक सेवा- ए पी एस अपने सेना डाक घर और ढेर से क्षेत्रीय डाक घरों के सहायक नेटवर्क से डाक समय पर पहुंचाना सुनिशिचत करती है।

56 और 99 ए पी ओ नर्इ दिल्ली से बाहर काम कर रहे दो (1 सी बी पी ओ) और कोलकाता ( 2 सी बी पी ओ) केंद्रीय आधार डाक घर हैं जहां डाक छांटी जाती है। इन दोनों के द्वारा सशस्त्र सेनाओं की समूची डाक जरूरतों और कुछ अन्य सहायक अद्र्ध सैनिक संगठनों की ऐसी जरूरतों को भारत के भीतर पूरा किया जाता है।

 ए पी एस के दो प्रमुख प्रसिद्ध डाक केंद्रों की शुरूआत का रोचक इतिहास है। अगस्त 1945 में सहयोगी सैनिकों की जापान पर विजय के बाद भारतीय सेना डाक सेवा के रूप में, तब विख्यात सेवा की शुरूआत की गर्इ और इससे मौजूदा 137 एफ पी ओ – क्षेत्रीय डाक घरों को बंद करने की भी प्रकि्रया शुरू हुर्इ।

 सिकंदराबाद में 30 जून 1941 को गठित 56 एफ पी ओ जो कि एक मात्र अंतिम एफ पी ओ बचा था, अभी इसे बंद किया जाना था। जापान में इवाकूनी से बि्रटिश कामनवेल्थ आकुपेशन फोर्स एयर बेस के लौटने के बाद भी इस एफ पी ओ को जारी रखा गया।

24 अक्तूबर 1947 को इसे नया कोड सुरक्षा पता देकर नर्इ दिल्ली में डाक छांटने के नए आधार के लिए C/o 56 ए पी ओ के रूप में शुरू किया गया। इसका मकसद 20 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी हमलावरों के प्रवेश के फलस्वरूप पंजाब और जम्मू कश्मीर में सैनिकों की डाक ज़रूरतों को पूरा करना था।

इस समय C/o 56 ए पी ओ पते की डाक के लिए 1 सी बी पी ओ के अंतर्गत 350 से अधिक एफ पी ओ हैं जिनसे पूर्वी सेक्टर को छोड़कर देश के समूचे क्षेत्र में कार्यवाही में जुटे सैनिकों की डाक ज़रूरतें पूरी की जाती हैं।  इस बीच, सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों, पशिचम बंगाल और अंडमान द्वीप समूह समेत पूर्वी क्षेत्र के लिए पहली अप्रैल 1964 को 2 सी बी पी ओ के गठन के साथ कोड सुरक्षा पते के रूप में C/o 99 ए पी ओ काम करने लगा । यह अपने लगभग 130 एफ पी ओ के साथ मिलकर डाक व्यवस्था का काम करता है। ए पी एस कोर ने पहली मार्च 2013 को अपना 41वां कोर स्थापना दिवस मनाया। इसकी शुरूआत हालांकि 1856 से मानी जाती है, जब ए पी एस को सबसे पहले तीव्रगामी सेना के युद्धकालीन समेकित संगठन के तौर पर चालू किया गया था। ये सेना फारस की खाड़ी में बुशायर में सबसे पहले और बाद में कर्इ अन्य ऐसे मिशन पर भेजी गर्इ थी।

ए पी एस 1947 तक भारतीय सामान्य सेवा का अंग था, जिसे बंद करके सेना सर्विस कोर के साथ इसकी एक डाक शाखा के रूप में संबद्ध किया गया था। इसके बाद एक निशिचत भूमिका के लिए पहली मार्च 1972 को इसे स्वतंत्र कोर के रूप में स्थापित किया गया। इसे सुरक्षा पते के इस्तेमाल से सुरक्षा सुनिशिचत करने और सेंसरशिप में मदद देने, डाक रियायतें लागू करने और कार्यवाही के क्षेत्र में सैनिकों को डाक सुविधाएं प्रदान करने का काम दिया गया। 

इसने उड़ते हुए हंस का प्रतीक चिन्ह अपनाया जिसे महाभारत सहित कर्इ भारतीय पौराणिक गाथाओं में संदेशवाहक के रूप में जाना जाता था। इसने अपने चिन्ह पर ध्येय रखा मेल मिलाप। हंस एक ऐसा शालीन पक्षी है जिसे शकित, साहस, गति और दुर्गम स्थानों तक पहुंचने की क्षमता के रूप में जाना जाता है। यह प्रतीक चिन्ह ए पी एस के लिए उपयुक्त है।

सैनिकों के फायदे के लिए ए पी एस ऐसी सेवाएं प्रदान करती है जो इंडिया पोस्ट अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा रही है। इन सेवाओं में स्पीड पोस्ट, एक्सप्रैस पार्सल पोस्ट, डाक जीवन बीमा, र्इ पोस्ट, डाक घर बचत खाता, सार्वजनिक भविष्य निधि कोष तथा अन्य जैसी कर्इ सामान्य डाक सेवाएं हैं।  यह कर्इ कोर बैंकिंग साल्यूशन और मूल्य सवंर्धित सेवाएं शुरू करने का तैयार है जिनसे अगि्रम क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों को उत्सुकता से मुक्त किया जा सकेगा।

मोबाइल सेवा के विस्तार और इंटरनेट से वर्तमान में डाक की प्रमात्रा में कमी आने की अवधारणा के विपरीत आंकडों से पता चलता है कि दरअसल डाक की प्रमात्रा में बढ़ोत्तरी हो रही है। पूर्वी कमान ए पी एस में बि्रगेडियर बी चंद्रशेखर इसे समान रूप से सरकारी और व्यापारिक डाक में बढ़ोत्तरी मानते हैं।

इसी तथ्य का समर्थन करते हुए 2 सी बी पी ओ में कमांडेंट कर्नल अखिलेश पांडेय कहते हैं कि बैंकों, बीमा और निवेश कंपनियों जैसे सेवा प्रदाताओं की व्यापारिक कारोबार से संबंधित डाक बढ़ रही है। सेना अपनी गुप्त सरकारी डाक के लिए अक्सर शिडयूल्ड डिसपैच सेवा का इस्तेमाल करती है।

      संगठन में प्रतिनियुकित पर डाक सेवा से अधिकारी लिए जाते हैं जो डाक विभाग के 75 प्रतिशत कार्मिकों के साथ मिलकर काम करते हैं। ये अपनी सफलताओं के बाद भी और काम करने का उत्साह नहीं छोड़ते और लगातार नर्इ मूल्य संवर्धित सेवाएं विकसित करते हैं ताकि संतुष्ट ग्राहकों के आधार को बनाए रखा जा सके। उन्हें मालूम है कि उनका उड़ता हंस उन्हें हमेशा परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ संपर्क में रखेगा। भले ही उनकी तैनाती दूर दराज के इलाकों में हो या गुप्त स्थानों पर।

जब सैनिकों को अपने मित्रजनों और संबंधियों से कोर्इ पत्र मिलता है तो उनकी भावनाओं की अभिव्यकित अदभुत और संतोषजनक होती है। इस अभिव्यकित को जे पी दत्ता की फिल्म के मशहूर गीत….. संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं तो चिटठी आती है, में अच्छी तरह दिखाया गया है। उड़ता हुआ हंस दरअसल सैनिकों के लिए मुस्कान लाता है और उन्हें संतोषजनक आभास देता है।

 

तरूण कुमार सिंघा

(साभार-पीआईबी)

 

 

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