Tuesday, September 7, 2021

हाईकोर्ट का आदेश बना मजाक

resizedimageबस्ती ।। (मनोज पांडे)।। उच्च न्यायालय के ग्रामसभा की भूमि से अतिक्रमण हटाने सम्बन्धी निर्देश का बस्ती जिले में न सिर्फ मखौल उड़ाया जा रहा है। बल्कि निर्देश की आंड़ में खासी कमाई भी की जा रही है। मंजर यह है कि शिकायतकर्ता लगातार शिकायत किये जा रहे हैं, अधिकारी आदेश दिये जा रहे हैं। लेकिन अतिक्रमणकारी हैं कि, पैसे के दम पर तालाब, सार्वजनिक रास्ते पर भी बेखौफ निर्माण कराये जा रहे हैं। निचले स्तर पर पैसा कुछ ऐसा चल रहा है कि, तहसील दिवसों का आयोजन, उच्च न्यायालय या जिलाधिकारी का आदेश सब बेकार से नजर आते हैं। हद तो यह कि यहां सूचना का अधिकार भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। तहसील और विकास खण्ड हर्रैया के ग्राम व ग्रामसभा बेलाड़े शुक्ल में पिछले साल 6 सितम्बर 2012 को गांव के ही सन्तराम, नन्हू और भगवानदीन नें योजनाबद्ध ढंग से तालाब की जमीन से गुजरने वाले सार्वजनिक रास्ते को रातोरात घेर लिया। और तेजी से निर्माण करा कर इसे अवरूद्ध कर दिया। 7 सितम्बर की सुबह जब ग्रामीणों नें रास्ते को अवरूद्ध देखा तो प्रभावित लोगों में से एक, रामजियावन नें इसकी लिखित शिकायत उप जिलाधिकारी हर्रैया से इसी तारीख में की। जिस पर अधिकारी नें तुरन्त ही निर्माण रोक देने का आदेश जारी भी कर दिया। इस आदेश पर अमल करते हुये निर्माण कार्य फिलहाल रूकवा दिया गया। लेकिन हुआ वही जो योजनाबद्ध था। और कुछ ही दिनों बाद निर्माण फिर चालू हो गया। इस बार रामजियावन नें इसकी शिकायत बाकायदा तहसील दिवस पर 18 सितम्बर को दर्ज करा दी। उसे भरोसा था कि चूंकि ग्राम सभाओं की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश उच्च न्यायालय नें भी दे रखा है। और प्रशासन अभियान चलाकर अतिक्रमण हटा भी रहा है। लिहाजा इस बार इसकी शिकायत बेकार नहीं जाएगी। लेकिन सड़ चुके सिस्टम में एक आम आदमी की शिकायत बेकार जानी ही थी और गई भी। न तो अतिक्रमण पर कार्यवाही हुई और न ही शिकायतकर्ता को सूचना।  रामजियावन नें सोचा कि शायद अधिकारी व्यस्तता में मामले को भूल गये होंगे। लिहाजा 3 अक्टूबर को तहसील दिवस के अगले आयोजन पर इसनें अपनी शिकायत दुबारा दर्ज करा दी। शिकायतकर्ता मौके पर कार्यवाही और सूचना का इन्तजार करता रहा लेकिन इस बार भी अधिकारी टस से मस नहीं हुए। रामजियावन अभी थका नहीं, उसनें अपनी निष्ठा प्रशासन में दिखाते हुए अगले तहसील दिवस के आयोजन पर 6 नवम्बर को लगातार तीसरी बार शिकायत दर्ज कराई। इस पर भी जब कार्यवाही नहीं होती दिखी तो उसनें 11 दिसम्बर 2012 को आरटीआई का प्रयोग करते हुए कार्यवाही की जानकारी मांग ली। जो उसे एक माह से अधिक बीत जाने के बाद आज भी मुहैया नहीं हो सकी है।
                                   
इसी बीच 1 जनवरी 2013 को अगले तहसील दिवस के आयोजन पर एक बार फिर उसनें शिकायत दर्ज करा दी। रामजियावन नें बताया कि इस तहसील दिवस पर खुद जिलाधिकारी महोदया मौजूद थीं। और उन्होंने उप जिलाधिकारी हर्रैया सोमदत्त मौर्या को अविलम्ब मौके पर जाकर वस्तु स्थिति से अवगत होते हुए अतिक्रमण हटवाने का निर्देश दिया था। उपजिलाधिकारी नें भी शिकायतकर्ता को अगले दिन मौके पर आने का आश्वासन जिलाधिकारी की मौजूदगी वाले इस आयोजन में तो दे दिया लेकिन पहुंचे आज तक नहीं ।
 राम जियावन नें इस पूरे प्रकरण के दस्तावेज और रसीदों की नुमाइश करते हुए बताया कि जब अगले दो दिन तक मौके पर कोई नहीं पहुंचा तो उसनें अलग से एक पत्र भी इस सन्दर्भ में 4 जनवरी को अपर जिलाधिकारी बस्ती को प्रेषित किया। बावजूद इसके आज तक उसका
सूचना का अधिकार तो छिना ही हुआ है, तालाब की जमीन के सार्वजनिक रास्ते से अतिक्रमण भी नहीं हटवाया गया है। जिसका हटाया जाना न सिर्फ जनहित में है उच्च न्यायालय और शासन की मंशा के अनुरूप भी।  मामले में उप जिलाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने अब प्रभावी कार्यवाही करने की बात तो कही है लेकिन समय सीमा बताने से इनकार किया है |

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