Tuesday, September 7, 2021

BJP के 6 पूर्व सासंद समेत 12 के खिलाफ चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा, आरोप तय

अदालत ने सवाल के बदलने पैसे लेने के मामले में आखिर 11 पूर्व सांसदों व एक अन्य को आपराधिक षडयंत्र व भ्रष्टाचार के आरोप में प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया है। अदालत ने इन सभी के खिलाफ अभियोग तय करते हुए कहा इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। -DAINIKDUNIA.COM

विशेष न्यायाधीश किरण बंसल ने आरोपियों से पूछा कि आप सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार व आपराधिक षडयंत्र के तहत मुकदम चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। क्या वे अपना अपराध स्वीकार कर रहे है।

11 पूर्व सांसदों

 

सभी को 12 जनवरी 2018 को पेश होने का निर्देश

आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए अपना अपराध स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा वे मुकदमा लडना चाहते है। अदालत ने सभी को 12 जनवरी 2018 को पेश होने का निर्देश देते हुए अभियोजन पक्ष को अपने गवाहों को पेश करने को कहा है। आरोपियों में BJP के 6, RJD व CONGRESS का एक-एक व बीएसपी के तीन पूर्व सांसद शामिल है।

 

विजय फोगट की मृत्यु होने पर उनके खिलाफ सुनवाई बंद

अदालत ने इस मामले में पूर्व सांसद वाईजी महाजन (BJP), छतरपाल सिंह लोढ़ा (BJP), अन्ना साहेब एमके पाटिल (BJP), मनोज कुमार (RJD), चंद्र प्रताप सिंह (BJP), राम सेवक सिंह (CONGRESS), नरेंद्र कुमार कुशवाहा (BSP), प्रदीप गांधी (BJP), सुरेश चंदेल (BJP), लाल चंद्र कोल (BSP) और राजा रामपाल (BSP) के खिलाफ अभियोग तय किए है। सांसद राम के तत्कालीन पीए रविन्द्र कुमार के खिलाफ भी अभियोग तय किए गए है। वहीं बिचोलिए विजय फोगट की मृत्यु होने पर उनके खिलाफ सुनवाई बंद कर दी गई थी।

 

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अभियोजन पक्ष ने सीडी-डीवीडी पर भरोसा किया

तत्कालीन सांसदों के खिलाफ दो पत्रकारों ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस संबंध में एक निजी न्यूज चैनल पर 12 दिसंबर 2005 को प्रसारित किया गया। स्टिंग में सांसदों को संसद में सवाल उठाने के लिए नकद राशि लेते दिखाया गया था। दिसंबर 2005 में लोकसभा ने अपने 10 सदस्यों को निष्कासित कर दिया था, जबकि लोढा को राज्यसभा से हटा दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने सीडी-डीवीडी पर भरोसा किया, जिसमें आरोपी और अन्य लोगों के बीच बातचीत हुई थी।

 

हाईकोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी

अदालत ने 10 अगस्त को सभी के खिलाफ अभियोग तय करने का निर्णय किया था लेकिन सभी आरोपियों के पेश न होने पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। दिल्ली पुलिस ने मामले में आरोप पत्र 2009 में दायर किया था। पुलिस ने मामले में स्टिंग करने वाले दो पत्रकारों को भी भ्रष्टाचार के लिए उकसाने पर आरोपी बनाया था लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी थी।

 

-FILE PHOTO