Wednesday, September 8, 2021

कांग्रेस से नहीं होगा गठबंधन, निशाने पर मीडिया

resizedimage (1)लखनऊ।।डीडीसी न्यूज़।।दिल्ली में तीन बंगले को मिलाकर बने बहुजन प्रेरणा केंद्र को लेकर मायावती ने लखनऊ में मीडिया पर निशाना साधा। बीजेपी की तिकड़ी में मचे घमासान को खुद के लिए फायदेमंद बताया तो साफ-साफ कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया। आरटीआई से मिली सूचना के आधार पर जो खुलासा हुआ उसकी सफाई पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में प्रेस कॉफ्रेंस बुलाकर दी।

यूपी में मायावती काफी दिनों बाद मीडिया से मिलीं लेकिन उनका हमला भी मीडिया पर ही था। उनका कहना था कि दिल्ली के रकाबगंज में कांशीराम प्रेरणा स्थल बनाए जाने को लेकर जो ख़बरें दिखाई जा रहीं हैं वो पत्रकारों की दलित विरोधी मांसिकता को उजागर करती हैं और चुनाव के समय बीएसपी के खिलाफ ये साजिश है । लखनऊ में मायावती ने बीजेपी में राजनाथ सिंह, लाल कृष्ण आडवाणी और मोदी की तिकड़ी को उसके लिए ही ख़तरनाक बताया और कहा कि इससे बीएसपी को ही फायदा होगा। काफी समय बात मीडिया से लखनऊ में मिल रही मायावती ने इसकी वजह दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव की तैयारियों और टिकटों के बंटवारों में व्यस्तता को बताया। साथ ही ये भी कहा कि जल्द ही चार राज्यों में चुनावी दौरा करेंगी। लेकिन लोकसभा में कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया लेकिन यह जरूर कहा कि अन्य राज्यों में बीएसपी बैलेंसिग पॉवर बनेगी और गरीबों शोषितों की मदद करेगी ।

मायावती से मीडिया ने जैसे ही नौकरानी की हत्या को लेकर गिरफ्तार बीएसपी सांसद धनंजय सिंह के टिकट देने पर सवाल किया तो मायावती का जवाब काफी हैरान कर देने वाला था। बीते विधानसभा चुनाव में दागियों को टिकट नहीं देने को लेकर पहले ही घोषणा करने वाली मायावती धनंजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद भी टिकट देने को लेकर पशोपेश में हैं। प्रदेश की गिरती कानून व्यवस्था और 17 जातियों को एससी में शामिल किए जाने का मुद्दे पर भी मायावती ने निशाना साधा और समाजवादी पार्टी की सरकार को सांप्रदायिक बताने से भी नहीं  कीं।16वीं लोकसभा की तैयारियों के साथ ही मायावती ने लखनऊ में संगठन की समीक्षा होने की बात तो मानी लेकिन मुलायम सिंह के तीसरे मोर्चे पर बोलने से इनकार कर दिया। तीसरे मोर्चे को लेकर मायावती के रूख से तो साफ है कि मायावती तीसरे मोर्चे की गुटबंदी का हिस्सा नहीं बनेंगी। और कांग्रेस का साथ देकर सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर करने का राग भी नहीं छोड़ेंगी।

 

 

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