Saturday, August 28, 2021

61 मुस्लिम अभ्यर्थियों का IAS में हुआ चयन, तो कहा- हमें उच्च शिक्षा की जरुरत !

बरेली। हमारी कौम को नाकामी के डर से बाहर निकलने की जरूरत है। देश की शीर्ष नौकरियों में किसी तरह का भेदभाव नहीं है। इस बार आया IAS का रिजल्ट इसका गवाह है। इसमें 61 मुसलमानों का चयन हुआ है। आज हमें जरूरत है क्वालिटी एजुकेशन है। इसके जरिये हम देश के पॉलिसी मेकर में जगह बना सकते हैं।

दुनिया जानती है कि ताजमहल आपके पूर्वजों ने बनवाया है। उसे भूल जाइए और अब विश्वविद्यालय तामीर कीजिए। क्योंकि शिक्षा से ही मुसलमानों के मसाइल हल हो सकते हैं। रविवार को पैगाम-ए-इंसानियत की ओर से आइएमए हॉल में आयोजित तालीमी कांफ्रेंस में एएमयू के पूर्व उप-कुलपति व ब्रिगेडियर सय्यद अहमद अली ने ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी बहन, बेटी और बीवी को उच्च शिक्षा दिलाने की जरूरत है। बेटियां अपने वालिद से कहें कि बेशक जिस भी उम्र में उनकी शादी कर दीजिए, पर पढ़ाई से मत रोकिए। क्योंकि जब महिलाएं कमाएंगी तभी मुसलमान गरीबी से बाहर निकलेंगे। जब तक घर का एक सदस्य कमाएगा पांच खाएंगे, तब तक गरीबी दूर नहीं होगी।

कनाडा से आए प्रोफेसर इदरीस सिद्दीकी ने भी क्वालिटी एजुकेशन पर जोर दिया। वैज्ञानिक मुनीर खान को डॉ. एजाज हसन मैमोरियल अवार्ड से नवाजा किया। बोर्ड, कंप्टीशन एग्जाम में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया। इस दौरान सुहेल फारुक, डॉ. शारिक वदूद, सय्यद वजाहत हुसैन, सय्यद इकराम, डॉ. सय्यद नोमान ने शिक्षा पर रोशनी डाली। इस दौरान संस्था के संस्थापक डॉ. एजाज हसन खां को याद किया गया।