Sunday, September 5, 2021

फिर बढ़ सकती हैं मायावती की मुश्किलें !

resizedimageनई दिल्ली ।। (एजेंसी) ।। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ ताज कॉरिडोर मामले में मुकदमा फिर शुरू हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सोमवार को नोटिस जारी कर मायावती से जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई, उत्तर प्रदेश सरकार और मायावती की सरकार में शामिल नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भी नोटिस जारी किया है। दरअसल, 17 करोड़ रुपये के ताज कॉरिडोर घोटाले में राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने मायावती पर मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी थी। इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। वह खारिज हो गई। मामले में उत्तरप्रदेश के तत्कालीन पर्यावरण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भी आरोपी बनाया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी। अब जस्टिस एचएल दत्तू और रंजन गोगोई की बेंच ने कहा है कि वह मामले की जांच करेंगे।  

सभी पक्षों से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा गया है। याचिका दायर करने वालों का दावा है कि इस मामले में राज्यपाल की इजाजत के बगैर भी केस चल सकता है। इस बीच मायावती के वकील केके वेणुगोपाल ने कहा है कि ऐसी अर्जी चौथी बार आई है। लेकिन बेंच ने मामले में नए सिरे से जांच करने का फैसला किया है।

सीबीआई ने जून में लिए थे आरोप वापस: जून 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने मायावती और सिद्दीकी के खिलाफ आरोप वापस ले लिए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच नवंबर 2012 में इसे सही ठहराया था।

आनंद कुमार की सात कंपनियों पर सवाल 

बसपा अध्यक्ष मायावती के भाई आनंद कुमार की सात कंपनियां सवालों के घेरे में है। इन कंपनियों को 760 करोड़ रुपये नकद मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की जांच कर रह है कि इतना पैसा कहां से आया है। सोमवार को आई मीडिया रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक आनंद कुमार की सबसे पुरानी 1987 में बनी कंपनी होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड को ही पिछले पांच साल में 346 करोड़ रुपये मिले हैं। ये पैसा कंपनी को निवेश की बिक्री से मिला है। लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया है कि ये निवेश क्या था और किसे बेचा गया। सातों कंपनियों के डायरेक्टर आनंद कुमार ही हैं।

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा दस्तावेज के मुताबिक सात में से छह कंपनियां 2007 के बाद बनाई गई हैं। उसी साल मायावती फिर से मुख्यमंत्री बनी थीं। इनमें से सिर्फ एक कंपनी का कारोबार बड़ा और बाकी छह कंपनियां बेहद छोटी हैं। इन में से एक कंपनी रियल्टर्स के एक डायरेक्टर सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल भी हैं। आनंद कुमार की इन कंपनियों को ज्यादातर पैसा ऊंचे प्रीमियम पर शेयर बेचने से मिला। कुछ इन कंपनियों ने थर्ड पार्टी से मिले एडवांस को जब्त किया। इसके अलावा ऐसे निवेश को बेचा जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। आनंद कुमार ने अपना करियर नोएडा अथॉरिटी में बतौर क्लर्क शुरू किया था। (डीडीसी न्यूज़ नेटवर्क)

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