Thursday, September 2, 2021

यूपी : इस अधिकारी के 11 साल की नौकरी में हुआ 14 बार ट्रांसफर, जानें वजह

लखनऊ. नगर पालिका परिषद चन्दौसी की अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने बार बार तबादले से परेशान होकर इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की तो अदालत ने सरकार को बेहद सख्त लहजे में फटकार लगाई है।

अमिता वरुण

अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने जब भी गलत का विरोध किया तो तबादले का आदेश हाथ में आ गया। हालात यह हुए कि 11 साल की नौकरी के सफर में 14 तबादलों का सामना करना पड़ा मगर अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने अब भी गलत कार्यों का विरोध करने का अपना जज्बा बरकरार रखा है। बार-बार के तबादलों को लेकर अदालत ने उनके दर्द को समझा तो अमिता का हौंसला बढ़ा है।

जानकारी के मुताबिक, अमिता वरुण ने कहा कि जहां भी उन्होंने कार्यभार संभाला, उनकी मंशा रही है कि वह जनहित में निष्पक्षता से विकास कार्यों को अंजाम दें, लेकिन उनकी कार्यशैली से खफा लोग शिकायतों पर उतर आते हैं। जहां चेयरमैन पार्टी बेस पर विकास कार्य कराते वह हमेशा विरोध करती रहीं।

बिना टेंडर सड़कें डलवाने व नियम कायदों के बिना काम का विरोध भी उनके जल्दी-जल्दी स्थानांतरण का कारण बना। जनपद संभल की बहजोई नगर पालिका परिषद में अतिक्रमण हटवाने और नालों के चौड़ीकरण कराने पर उनका विरोध हुआ था। इस पर उनका तबादला बहजोई से शामली कर दिया गया। चन्दौंसी का कार्यभार संभालते ही उन्होंने बकायेदारों से ढाई करोड़ की वसूली को आरसी जारी करने के लिए नोटिस जारी कर दिए थे।

चन्दौसी में ही ज्वाइनिंग करने में आयीं थीं दिक्कतें

अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण को चन्दौसी का चार्ज लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। 28 जुलाई 2018 को उनका मारहरा से चन्दौसी नगर पालिका परिषद में स्थानांतरण हुआ था। दो अगस्त 2018 को उन्हें चन्दौसी नगर पालिका परिषद का चार्ज लेना था मगर चार्ज देने में टालमटोल होती रही। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद चार अगस्त को ज्वाइंनिंग प्रपत्र पर हस्ताक्षर तो हो गए लेकन ज्वाइंनिंग 12 अगस्त को हो पाई थी।

नगर पालिका परिषद चन्दौसी में भी ईओ अमिता वरुण की चेयरमैन के साथ नहीं बन रही है। पालिका बोर्ड की बैठक पिछले सात माह से नहीं हुई है। जनवरी 2018 के बाद मार्च माह में बैठक हुई थी। इसके बाद अभी तक बोर्ड की बैठक नहीं हुई है। चार दिन पहले भी सभासदों ने बोर्ड की बैठक न होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए पालिकाध्यक्ष इंदू रानी को ज्ञापन भी दिया था।

नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण का कहना है कि मेरी सबसे पहली प्राथमिकता रहती है कि पालिका का स्टाफ समय से दफ्तर आए और कार्यों को निष्पक्षता से निपटाएं, मेरी किसी से कोई द्वेष भावना नहीं है, चेयरमैन को बोर्ड की बैठक तक ही सीमित रहना चाहिए।

यह है 11 साल की नौकरी का सफर

20 फरवरी 2009 को गुरसरी से एटा के मारहरा स्थानांतरण किया गया
पांच फरवरी 2011 को महरारा से बुलंदशहर के स्याना
पांच जून 2013 को स्याना से जनपद संभल के बहजोई
एक सितंबर 2014 को बहजोई से शामली मुजफ्फरनगर
छह जनवरी 2016 को शामली से जनपद इटावा के जसवंत नगर
सात अप्रैल 2016 को जसवंत नगर से जहांगीराबाद बुलंदशहर
26 मई 2016 को जहांगीराबाद से शिकारपुर बुलंदशहर
30 जून 2017 को शिकारपुर से बिलारी मुरादाबाद
25 अक्टूबर 2017 को बिलारी से मुरादनगर गाजियाबाद
सात दिसंबर 2017 को मुरादनगर से गढ़मुक्तेश्वर हापुड़
12 अप्रैल 2018 को गढ़मुक्तेश्वर से मारहरा एटा
28 जुलाई 2018 को मारहरा से चन्दौसी स्थानांतरण हुआ